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एमएससी पर्यावरण विज्ञान- 40 सीटों पर सिर्फ 34 आवेदन.. फिर भी कराई प्रवेश परीक्षा
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के नीति निर्धारक भी अजब-गजब कारनामे करते हैं। एमएससी पर्यावरण विज्ञान में 40 सीटों पर सिर्फ 34 आवेदन आए और उसके लिए भी नियमों को ताक पर रखकर प्रवेश परीक्षा आयोजित कर दी गई। अब इस कोर्स में सीटें भरना भी मुश्किल हो गया है। यही हाल एमएससी के अन्य पाठ्यक्रम का है, जिनमें पहले तो प्रवेश परीक्षा कराई गई और जब सीटें नहीं भरीं तो अब सीधे एडमिशन की अनुमति दे दी गई है। इससे प्रवेश परीक्षा के औचित्य पर ही सवाल खड़ा हो रहा है।
बरेली कॉलेज एमएससी पर्यावरण विज्ञान कोर्स को संचालित करने वाला रुहेलखंड विश्वविद्यालय का इकलौता कॉलेज है। यहां 40 सीटें हैं। इस कोर्स में एडमिशन के लिए 43 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, मगर प्रवेश परीक्षा में सिर्फ 34 ही शामिल हुए। विश्वविद्यालय ने उन सभी की सूची बनाकर एडमिशन के लिए बरेली कॉलेज को सौंप दी। मगर इनमें से सिर्फ 15 ने ही एडमिशन लिया है और इस कोर्स की 25 सीटें खाली रह गई हैं। सेल्फ फाइनेंस कोर्स होने के चलते बरेली कॉलेज प्रशासन इसको लेकर चिंतित है। इसके चलते विश्वविद्यालय से प्रवेश परीक्षा में शामिल न होने वाले अभ्यर्थियों के सीधे एडमिशन की अनुमति चाहता है। शिक्षकों का कहना है कि प्रवेश परीक्षा तक कराई जाती है जब किसी कोर्स में निर्धारित सीटों से तीन गुना ज्यादा आवेदन हों। मगर यहां तो कम आवेदन होने पर भी प्रवेश परीक्षा कराकर समय खराब किया जा रहा है।
जब सीधे एडमिशन तो प्रवेश परीक्षा क्यों
रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एमएससी के विभिन्न पाठ्यक्रम में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की थी। मगर काउंसलिंग के बाद आधी सीटें भी नहीं भर सकीं। इससे विश्वविद्यालय का राजस्व तो घटा ही निजी कॉलेज संचालक भी चिंतित हो गए। इसके बाद विश्वविद्यालय ने प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों के सीधे एडमिशन के लिए कॉलेजों को मंजूरी दे दी। इससे पूर्व में कराई गई प्रवेश परीक्षा पर ही सवाल खड़ा हो गया है। कॉलेज संचालकों का कहना है कि अगर ऐसे ही एडमिशन कराए जाने थे तो प्रवेश प्रक्रिया कराने का क्या औचित्य था, जो इतना समय खराब किया गया।
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बरेली कॉलेज एमएससी पर्यावरण विज्ञान कोर्स को संचालित करने वाला रुहेलखंड विश्वविद्यालय का इकलौता कॉलेज है। यहां 40 सीटें हैं। इस कोर्स में एडमिशन के लिए 43 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, मगर प्रवेश परीक्षा में सिर्फ 34 ही शामिल हुए। विश्वविद्यालय ने उन सभी की सूची बनाकर एडमिशन के लिए बरेली कॉलेज को सौंप दी। मगर इनमें से सिर्फ 15 ने ही एडमिशन लिया है और इस कोर्स की 25 सीटें खाली रह गई हैं। सेल्फ फाइनेंस कोर्स होने के चलते बरेली कॉलेज प्रशासन इसको लेकर चिंतित है। इसके चलते विश्वविद्यालय से प्रवेश परीक्षा में शामिल न होने वाले अभ्यर्थियों के सीधे एडमिशन की अनुमति चाहता है। शिक्षकों का कहना है कि प्रवेश परीक्षा तक कराई जाती है जब किसी कोर्स में निर्धारित सीटों से तीन गुना ज्यादा आवेदन हों। मगर यहां तो कम आवेदन होने पर भी प्रवेश परीक्षा कराकर समय खराब किया जा रहा है।
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जब सीधे एडमिशन तो प्रवेश परीक्षा क्यों
रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एमएससी के विभिन्न पाठ्यक्रम में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की थी। मगर काउंसलिंग के बाद आधी सीटें भी नहीं भर सकीं। इससे विश्वविद्यालय का राजस्व तो घटा ही निजी कॉलेज संचालक भी चिंतित हो गए। इसके बाद विश्वविद्यालय ने प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों के सीधे एडमिशन के लिए कॉलेजों को मंजूरी दे दी। इससे पूर्व में कराई गई प्रवेश परीक्षा पर ही सवाल खड़ा हो गया है। कॉलेज संचालकों का कहना है कि अगर ऐसे ही एडमिशन कराए जाने थे तो प्रवेश प्रक्रिया कराने का क्या औचित्य था, जो इतना समय खराब किया गया।
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