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मैडम, बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, गाली-गलौज सीखने नहीं
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बरेली। प्राथमिक विद्यालयों में कम हो रही छात्र संख्या और शिक्षा की गुणवत्ता गिरती जा रही है, जिसे सुधारने के लिए शासन ने बच्चों से सलीके से पेश आने, उन्हें शिक्षण कार्य में मदद करने आदि सुझाव दिए हैं, लेकिन शिक्षक हैं कि मानते नहीं। बुधवार को बीएसए कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने विद्यालय की शिक्षिका की पोल खोली तो मौजूद सभी हैरत में पड़ गए। ग्रामीणों ने शिक्षिका पर मोबाइल पर ‘प्रेमालाप’ करने, प्रेमी को स्कूल बुलाने, बच्चो को मारने पीटने समेत विद्यालय में स्टेशनरी की दुकान चलाने के आरोप लगाए हैं।
बीएसए कार्यालय पहुंचीं प्रधान नन्ही देवी, रामेश्वर सिंह, फूला देवी, रूपदेई, ऊषा देवी, प्रेम सिंह, संतोष कुमार, राजेश कुमार व अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि तजपुरा प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका स्कूल खुलने के बाद आती हैं और बंद होने से पहले चली जाती हैं। पिछले सत्र के परीक्षा परिणाम अब तक वितरित नहीं किए हैं। बच्चों पर उनकी स्टेशनरी की दुकान से कॉपी खरीदने का दबाव बनाती हैं, जो बच्चे बाहर से कॉपी खरीदते हैं उन्हें फाड़ देती हैं या जलाने की चेतावनी देती हैं। बताया कि शिक्षिका स्कूल समय में वीडियो कॉलिंग व चैटिंग में व्यस्त रहती हैं। मोबाइल पर लड़ाई होने का गुस्सा बच्चों पर निकालती हैं। स्केल व छड़ी से उन्हें मारती/ पीटती हैं। कहा, वे बच्चो को विद्यालय पढ़ने भेजते हैं ताकि वे सभ्य नागरिक बनें लेकिन शिक्षिका की हरकतों से बच्चों के बिगड़ने की संभावना जताई है।
सहमे हुए बच्चे स्कूल नहीं जाते
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षिका के व्यवहार से बच्चे सहमे हैं। वे स्कूल जाने से घबराते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल में असमाजिक तत्व उनसे मिलने आते हैं, जिनसे स्कूल प्रांगण में गाली/गलौज व हाथापाई की घटना भी हुई है। जिससे स्कूल का माहौल खराब होने के साथ ही बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शिक्षिका के साथ असामाजिक तत्वों के जरिए अप्रिय घटना होने की आशंका भी जताई है। सौंपे गए शिकायती पत्र पर बीएसए तनुजा त्रिपाठी ने ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन दिया और संबंधित बीइओ से मामले की रिपोर्ट तलब की है।
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बीएसए कार्यालय पहुंचीं प्रधान नन्ही देवी, रामेश्वर सिंह, फूला देवी, रूपदेई, ऊषा देवी, प्रेम सिंह, संतोष कुमार, राजेश कुमार व अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि तजपुरा प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका स्कूल खुलने के बाद आती हैं और बंद होने से पहले चली जाती हैं। पिछले सत्र के परीक्षा परिणाम अब तक वितरित नहीं किए हैं। बच्चों पर उनकी स्टेशनरी की दुकान से कॉपी खरीदने का दबाव बनाती हैं, जो बच्चे बाहर से कॉपी खरीदते हैं उन्हें फाड़ देती हैं या जलाने की चेतावनी देती हैं। बताया कि शिक्षिका स्कूल समय में वीडियो कॉलिंग व चैटिंग में व्यस्त रहती हैं। मोबाइल पर लड़ाई होने का गुस्सा बच्चों पर निकालती हैं। स्केल व छड़ी से उन्हें मारती/ पीटती हैं। कहा, वे बच्चो को विद्यालय पढ़ने भेजते हैं ताकि वे सभ्य नागरिक बनें लेकिन शिक्षिका की हरकतों से बच्चों के बिगड़ने की संभावना जताई है।
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सहमे हुए बच्चे स्कूल नहीं जाते
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षिका के व्यवहार से बच्चे सहमे हैं। वे स्कूल जाने से घबराते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल में असमाजिक तत्व उनसे मिलने आते हैं, जिनसे स्कूल प्रांगण में गाली/गलौज व हाथापाई की घटना भी हुई है। जिससे स्कूल का माहौल खराब होने के साथ ही बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शिक्षिका के साथ असामाजिक तत्वों के जरिए अप्रिय घटना होने की आशंका भी जताई है। सौंपे गए शिकायती पत्र पर बीएसए तनुजा त्रिपाठी ने ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन दिया और संबंधित बीइओ से मामले की रिपोर्ट तलब की है।
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