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Bareilly News: बच्चे को हथियार बनाकर खड़ा किया नशे का कारोबार
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बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र में किरायेदार और मकान मालिक का पुराना विवाद फिर से उठा तो महिला बेटे को साथ लेकर एसएसपी दफ्तर पहुंची। यहां 10 साल के बच्चे ने मकान मालकिन की करतूत उजागर कर दी। बताया कि मकान मालकिन उसको रुपयों का लालच देकर इधर-उधर स्मैक की पुड़िया भिजवाती है। इज्जतनगर पुलिस को मामले की जांच सौंपी गई है।
विवाद के बाद किरायेदार परिवार ने मकान छोड़ दिया है। उनका कुछ सामान अब भी उसी मकान में रखा है। मकान मालकिन 4,900 रुपये और मांग रही है। इसके बाद ही सामान देने के लिए कह रही है। इस बीच उसने बच्चे पर चोरी का आरोप भी लगाया है। दंपती ने आरोप लगाया कि महिला के खिलाफ शिकायत की जांच कर रहे पुलिसवाले समझौता कराने पर तुले हैं।
बच्चे ने बताया कि उसके माता-पिता दोनों काम पर चले जाते थे। वह घर में अकेला होता था तो आंटी उसे छत पर बुलाकर खाना खिलाती थीं। इस वजह से वह स्कूल से लौटकर खुद ही उनके पास जाने लगा। तब आंटी उसे एक ग्राम की पुड़िया देकर कॉलोनी के बाहरी हिस्से में भेजने लगीं। वहां कुछ लोगों को वह पुड़िया देकर आता था। महिला उसे दवा की पुड़िया बताती थी। वह इन रुपयों से अच्छी क्वालिटी की पेन खरीदता था। एक बार पेन की स्याही से कपड़े खराब होने पर उसके पिता ने डांट लगाई तो उसने पूरी बात बता दी। अब उन पर चोरी का आरोप लगाया जा रहा है।
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कामकाजी दंपती बच्चों को समय नहीं दे पाते। अधिकतर लोग नौकरी या मोबाइल फोन में व्यस्त होने के कारण भी बच्चों के पास नहीं बैठ पाते। ऐसी स्थिति में बाहरी लोग बच्चों को गलत तरह के धंधों में लगा सकते हैं। बेहतर रहेगा कि बच्चों को पर्याप्त समय दिया जाए। उनसे बात की जाए। उनकी झिझक दूर होगी तो खुद ही सारी बातें आपसे साझा करेंगे। बच्चों के सवालों से असहज न हों, उनकी जिज्ञासा शांत करने का प्रयास करें। - डॉ. हेमा खन्ना, मनोवैज्ञानिक
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विवाद के बाद किरायेदार परिवार ने मकान छोड़ दिया है। उनका कुछ सामान अब भी उसी मकान में रखा है। मकान मालकिन 4,900 रुपये और मांग रही है। इसके बाद ही सामान देने के लिए कह रही है। इस बीच उसने बच्चे पर चोरी का आरोप भी लगाया है। दंपती ने आरोप लगाया कि महिला के खिलाफ शिकायत की जांच कर रहे पुलिसवाले समझौता कराने पर तुले हैं।
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बच्चे ने बताया कि उसके माता-पिता दोनों काम पर चले जाते थे। वह घर में अकेला होता था तो आंटी उसे छत पर बुलाकर खाना खिलाती थीं। इस वजह से वह स्कूल से लौटकर खुद ही उनके पास जाने लगा। तब आंटी उसे एक ग्राम की पुड़िया देकर कॉलोनी के बाहरी हिस्से में भेजने लगीं। वहां कुछ लोगों को वह पुड़िया देकर आता था। महिला उसे दवा की पुड़िया बताती थी। वह इन रुपयों से अच्छी क्वालिटी की पेन खरीदता था। एक बार पेन की स्याही से कपड़े खराब होने पर उसके पिता ने डांट लगाई तो उसने पूरी बात बता दी। अब उन पर चोरी का आरोप लगाया जा रहा है।
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कामकाजी दंपती बच्चों को समय नहीं दे पाते। अधिकतर लोग नौकरी या मोबाइल फोन में व्यस्त होने के कारण भी बच्चों के पास नहीं बैठ पाते। ऐसी स्थिति में बाहरी लोग बच्चों को गलत तरह के धंधों में लगा सकते हैं। बेहतर रहेगा कि बच्चों को पर्याप्त समय दिया जाए। उनसे बात की जाए। उनकी झिझक दूर होगी तो खुद ही सारी बातें आपसे साझा करेंगे। बच्चों के सवालों से असहज न हों, उनकी जिज्ञासा शांत करने का प्रयास करें। - डॉ. हेमा खन्ना, मनोवैज्ञानिक