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दरसन देहू न आपन हो छट्ठी मइया
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:54 AM IST
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Dracena Dehu not yo be the sixth Miya
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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केलवा जे फ रेला धवध से, ओह पर सुगा मिडराये..., उसे मरबो रे सुगवा धनुक से, सुगा जइहैं मुरझाए....। चार पहर राति जल- थल ला... सेवी ला चरण तोहार हो मइया...दरसन देहू न आपन हो छट्ठी मइया...। कुछ ऐसे ही गीतों के साथ शहर के कुछ प्रमुख मंदिरों और स्थलाें की रौनक बढ़ गई। निर्जल व्रत के साथ महिलाआें ने रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख शांति की कामना की। कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर, इज्जतनगर डिफेंस कालोनी स्थित शिव पार्वती मंदिर, रुहेलखंड विश्वविद्यालय, सुभाषनगर, आलोक नगर, कर्मचारी नगर और राजेंद्रनगर में छठ पर्व मनाया गया।
घाटों की छटा देखते ही बन रही थी। पूजा शुरू करने से पहले महिलाओं ने नाक से अपने माथे तक सिंदूर लगाया। गन्ने को कपड़े से बांधकर उसका मंडप बनाया और उसके नीचे मौसम का पहला फल अनानास, मूली, नींबू, पत्ते वाली हल्दी और अदरक, ठेकुवा, कद्दू और अन्य चीजों को सूप पर रखकर मां की आराधना की। घाट के पास ही मिट्टी की सुसुविता बनाई और जैसे ही सूर्य लालिमा छोड़ते हुए अस्त होने लगे महिलाओं ने गीत गाकर उसे श्रद्धा भाव से नमन किया और अर्घ्य दिया।
- परिवारों से बढ़ गई घाटों की रौनक
डिफेंस कालोनी के शिव पार्वती मंदिर में अच्छी भीड़ रही। मंदिर में ही महिलाआें ने गीत गाना शुरू कर दिया। यहां बने दो स्थायी घाट पर खड़े होकर महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। धोपेश्वर मंदिर घाट तक लोग अपने परिवाराें के साथ यहां पूजा करने आए। जिन्होंने व्रत रखा हैं वह अनुष्ठान करती रहीं साथ में आए परिवार के लोगाें ने पूजा में मदद की। घाट के चारों ओर भीड़ रही। बच्चाें ने खूब आतिशबाजी की। पटना के डीएन तिवारी ने बताया कि घर की बड़ी बहू या सास यह व्रत रखती है। काफी कठिन व्रत को नियम से किया जाता है। रामगंगा तट पर भी बदायूं रोड पर रहने वाले काफी परिवार छठ पूजा करने पहुंचे। कर्मचारी नगर में अस्थायी घाट बनाकर पूजा की गई।
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रात भर घरों में जलेगा दीपक, उगते सूर्य को देंगे अर्घ्य
घाट पर पूजन करने के बाद सभी महिलाएं रात भर दीपक जलाकर अपने- अपने घराें में कोसी भरेंगी। लाल फाटक पर रहने वाली अरुणा मिश्रा ने बताया कि सुबह सूर्य उगने से पहले ही सभी सदस्यों को नहाकर तैयार होना होगा। जिन्होंने व्रत रखा है वह घाट पर पहुंचकर अर्घ्य देंगी और प्रसाद वितरित कर अपने 36 घंटे के व्रत का पारण करेंगी।
व्रत नहीं रखा लेकिन पूजा का लिया आनंद
छठ पर्व की पूजा देखने का भी अलग आनंद है। तभी तो घाटाें और मंदिरों पर कुछ लोग सिर्फ पूजा देखने पहुंचे। बिजली विभाग में कार्यरत अनुपम अपनी पत्नी के साथ यहां आए हुए थे। उन्होंने बताया कि उनके यहां यह पूजा होती है लेकिन अभी यह पर्व नहीं मनाते, सिर्फ देखने आए हैं। फैजाबाद से आई बुजुर्ग महिला अपने बेटे के साथ धोपेश्वरनाथ मंदिर में पूजा देखने आई थीं।
व्रत से जुड़ी हैं कई मान्यताएं
छठ पर्व से कई मान्यताएं जुड़ी हैं। छठी मइया को सूर्य की बहन माना गया है। कहा जाता है कि महाभारत काल में कुंती ने पांच पांडवों के लिये यह व्रत रखा था।
पिछले कई सालों से यह व्रत रख रही हूं। बरेली में तीन साल से हूं। - सीमा सिंह, पटना
यह मेरा पहला व्रत है। काफी अच्छा अनुभव रहा है। मैंने इसके लिए अपने घर के बड़ों से काफी जानकारी ली। - चांदनी, लाल फाटक
चार साल से यह व्रत रख रही हूं। घर में मेरी सास भी यह व्रत रखती थीं। - नीरुपमा पांडेय, नकटिया
चंडीगढ़ से अपने भइया के यहां यह पूजा करने आई हूं। शादी के बाद इसे रखना शुरू किया था - करुणा, चंडीगढ़
इस पर्व की अलग ही छटा होती है। भाभी और दीदी के साथ व्रत रखकर देवी मां से आशीर्वाद मांगा। - वरुणा, चंडीगढ़
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घाटों की छटा देखते ही बन रही थी। पूजा शुरू करने से पहले महिलाओं ने नाक से अपने माथे तक सिंदूर लगाया। गन्ने को कपड़े से बांधकर उसका मंडप बनाया और उसके नीचे मौसम का पहला फल अनानास, मूली, नींबू, पत्ते वाली हल्दी और अदरक, ठेकुवा, कद्दू और अन्य चीजों को सूप पर रखकर मां की आराधना की। घाट के पास ही मिट्टी की सुसुविता बनाई और जैसे ही सूर्य लालिमा छोड़ते हुए अस्त होने लगे महिलाओं ने गीत गाकर उसे श्रद्धा भाव से नमन किया और अर्घ्य दिया।
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- परिवारों से बढ़ गई घाटों की रौनक
डिफेंस कालोनी के शिव पार्वती मंदिर में अच्छी भीड़ रही। मंदिर में ही महिलाआें ने गीत गाना शुरू कर दिया। यहां बने दो स्थायी घाट पर खड़े होकर महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। धोपेश्वर मंदिर घाट तक लोग अपने परिवाराें के साथ यहां पूजा करने आए। जिन्होंने व्रत रखा हैं वह अनुष्ठान करती रहीं साथ में आए परिवार के लोगाें ने पूजा में मदद की। घाट के चारों ओर भीड़ रही। बच्चाें ने खूब आतिशबाजी की। पटना के डीएन तिवारी ने बताया कि घर की बड़ी बहू या सास यह व्रत रखती है। काफी कठिन व्रत को नियम से किया जाता है। रामगंगा तट पर भी बदायूं रोड पर रहने वाले काफी परिवार छठ पूजा करने पहुंचे। कर्मचारी नगर में अस्थायी घाट बनाकर पूजा की गई।
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रात भर घरों में जलेगा दीपक, उगते सूर्य को देंगे अर्घ्य
घाट पर पूजन करने के बाद सभी महिलाएं रात भर दीपक जलाकर अपने- अपने घराें में कोसी भरेंगी। लाल फाटक पर रहने वाली अरुणा मिश्रा ने बताया कि सुबह सूर्य उगने से पहले ही सभी सदस्यों को नहाकर तैयार होना होगा। जिन्होंने व्रत रखा है वह घाट पर पहुंचकर अर्घ्य देंगी और प्रसाद वितरित कर अपने 36 घंटे के व्रत का पारण करेंगी।
व्रत नहीं रखा लेकिन पूजा का लिया आनंद
छठ पर्व की पूजा देखने का भी अलग आनंद है। तभी तो घाटाें और मंदिरों पर कुछ लोग सिर्फ पूजा देखने पहुंचे। बिजली विभाग में कार्यरत अनुपम अपनी पत्नी के साथ यहां आए हुए थे। उन्होंने बताया कि उनके यहां यह पूजा होती है लेकिन अभी यह पर्व नहीं मनाते, सिर्फ देखने आए हैं। फैजाबाद से आई बुजुर्ग महिला अपने बेटे के साथ धोपेश्वरनाथ मंदिर में पूजा देखने आई थीं।
व्रत से जुड़ी हैं कई मान्यताएं
छठ पर्व से कई मान्यताएं जुड़ी हैं। छठी मइया को सूर्य की बहन माना गया है। कहा जाता है कि महाभारत काल में कुंती ने पांच पांडवों के लिये यह व्रत रखा था।
पिछले कई सालों से यह व्रत रख रही हूं। बरेली में तीन साल से हूं। - सीमा सिंह, पटना
यह मेरा पहला व्रत है। काफी अच्छा अनुभव रहा है। मैंने इसके लिए अपने घर के बड़ों से काफी जानकारी ली। - चांदनी, लाल फाटक
चार साल से यह व्रत रख रही हूं। घर में मेरी सास भी यह व्रत रखती थीं। - नीरुपमा पांडेय, नकटिया
चंडीगढ़ से अपने भइया के यहां यह पूजा करने आई हूं। शादी के बाद इसे रखना शुरू किया था - करुणा, चंडीगढ़
इस पर्व की अलग ही छटा होती है। भाभी और दीदी के साथ व्रत रखकर देवी मां से आशीर्वाद मांगा। - वरुणा, चंडीगढ़