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कोरोना संक्रमित हैं तो न करें हीटर-ब्लोअर का इस्तेमाल, घुट सकता है दम
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कोरोना वायरस: जांच के लिए सैंपल देते लोग
- फोटो : अमर उजाला
रूम हीटर के प्रयोग से कमरे में कम होगी ऑक्सीजन
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हैप्पी हाइपोक्सिया से ग्रसित हो सकते हैं संक्रमित
बरेली। कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में रहने के बजाय घर पर ही आइसोलेशन की सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी तो मिल चुकी है मगर इसमें खतरे भी बेशुमार हैं। संक्रमितों को पूरी सतर्कता बरतनी होगी वरना जरा सी चूक जानलेवा हो सकती है। कोरोना वायरस की गतिविधियों पर निगाह रख रहे विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी बढ़ रही है मगर संक्रमित अपने कमरे में हीटर और ब्लोअर का इस्तेमाल न करें। क्योंकि इनके इस्तेमाल से कमरे में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाता है। इस स्थित में संक्रमित हैप्पी हाइपोक्सिया का शिकार हो सकता है। जिससे दम भी घुट सकता है।
कोरोना वायरस को लेकर हुए शोध में पता चला है कि कोरोना के चलते शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। वहीं, अगर संक्रमित ऐसे माहौल में रहें जहां पर ऑक्सीजन का स्तर कम है तो यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है। आमतौर पर घरों में वेंटीलेशन की व्यवस्था रहती है। जिसके चलते ऑक्सीजन का स्तर भी सामान्य रहता है मगर सर्दियों में ठंड को भगाने के लिए ब्लोअर, हीटर, गीजर आदि का प्रयोग किया जाता है, जो घातक हो सकता है। कमरों में अगर ब्लोअर और हीटर लगाया जाएगा तो हवा के गर्म होने से मोनो ऑक्साइड की मात्रा बढ़ेगी और ऑक्सीजन की कम होती जाएगी। ऑक्सीजन का कम होना संक्रमितों के लिए जानलेवा हो सकता है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी को हैप्पी हाइपोक्सिया कहते हैं। ये स्थित तो स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी घातक होती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संक्रमित, जिनकी रोग प्रतिरोधक और ऑक्सीजन लेवल पहले से ही प्रभावित है, उनके लिए ऑक्सीजन की कमी कितनी घातक होगी।
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इस तरह दम घोटते हैं ब्लोअर और हीटर
फिजीशियन डॉ. अजमेर सिंह के मुताबिक संक्रमित के शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने की आशंका रहती है। रूम में ब्लोअर या हीटर के प्रयोग से कार्बन डाईऑक्साइड की अधिकता से फेफड़ों में दाग बनने लगते हैं। ऑक्सीजन की कम होती दर से हल्की सुस्ती रहती है, मगर सेहत पर लक्षण नहीं दिखते। रक्त में ऑक्सीजन का स्तर 70 फीसदी से कम होने पर कभी भी सांस थम सकती है। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है।
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ऑक्सीमीटर से चेक करते रहें ऑक्सीजन का स्तर
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अर्जुन गुप्ता के मुताबिक ब्लोअर-हीटर का प्रयोग करने पर थोड़ी-थोड़ी देर में पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर मापते रहने की बेहद जरूरत है। अगर ऑक्सीजन का स्तर कम होता दिख रहा है तो संक्रमित इसे छिपाएं नहीं बल्कि मॉनिटरिंग करने वालों को बताएं। स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते इसका उपचार शुरू हो सके। उपकरणों का प्रयोग तत्काल बंद करना ही समझदारी रहेगी।
तीन सौ संक्रमित होम आइसोलेशन में
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 नवंबर तक होम आइसोलेशन पर करीब तीन सौ मरीज रह रहे हैं। जिन्हें सावधान रहने की बेहद जरूरत है। कोविड चिकित्सालय के सीएमएस और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक संक्रमित ऐसे कमरे में रहें, जो हवादार हों। इससे ऑक्सीजन लेवल सामान्य रहेगा। ठंड से बचने को कुछ ही देर हीटर, ब्लोअर का प्रयोग करें।
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हैप्पी हाइपोक्सिया से ग्रसित हो सकते हैं संक्रमित बरेली। कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में रहने के बजाय घर पर ही आइसोलेशन की सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी तो मिल चुकी है मगर इसमें खतरे भी बेशुमार हैं। संक्रमितों को पूरी सतर्कता बरतनी होगी वरना जरा सी चूक जानलेवा हो सकती है। कोरोना वायरस की गतिविधियों पर निगाह रख रहे विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी बढ़ रही है मगर संक्रमित अपने कमरे में हीटर और ब्लोअर का इस्तेमाल न करें। क्योंकि इनके इस्तेमाल से कमरे में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाता है। इस स्थित में संक्रमित हैप्पी हाइपोक्सिया का शिकार हो सकता है। जिससे दम भी घुट सकता है।
कोरोना वायरस को लेकर हुए शोध में पता चला है कि कोरोना के चलते शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। वहीं, अगर संक्रमित ऐसे माहौल में रहें जहां पर ऑक्सीजन का स्तर कम है तो यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है। आमतौर पर घरों में वेंटीलेशन की व्यवस्था रहती है। जिसके चलते ऑक्सीजन का स्तर भी सामान्य रहता है मगर सर्दियों में ठंड को भगाने के लिए ब्लोअर, हीटर, गीजर आदि का प्रयोग किया जाता है, जो घातक हो सकता है। कमरों में अगर ब्लोअर और हीटर लगाया जाएगा तो हवा के गर्म होने से मोनो ऑक्साइड की मात्रा बढ़ेगी और ऑक्सीजन की कम होती जाएगी। ऑक्सीजन का कम होना संक्रमितों के लिए जानलेवा हो सकता है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी को हैप्पी हाइपोक्सिया कहते हैं। ये स्थित तो स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी घातक होती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संक्रमित, जिनकी रोग प्रतिरोधक और ऑक्सीजन लेवल पहले से ही प्रभावित है, उनके लिए ऑक्सीजन की कमी कितनी घातक होगी।
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इस तरह दम घोटते हैं ब्लोअर और हीटर
फिजीशियन डॉ. अजमेर सिंह के मुताबिक संक्रमित के शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने की आशंका रहती है। रूम में ब्लोअर या हीटर के प्रयोग से कार्बन डाईऑक्साइड की अधिकता से फेफड़ों में दाग बनने लगते हैं। ऑक्सीजन की कम होती दर से हल्की सुस्ती रहती है, मगर सेहत पर लक्षण नहीं दिखते। रक्त में ऑक्सीजन का स्तर 70 फीसदी से कम होने पर कभी भी सांस थम सकती है। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है।
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