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Bareilly News: हर गली में गंदगी, कागजों पर कचरामुक्त शहर
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बरेली। दो दिन बाद स्वच्छ सर्वेक्षण का परिणाम आएगा। इसमें नगर निगम को पहली बार ओडीएफ प्लस प्लस और कचरामुक्त शहर का तमगा मिलेगा, लेकिन धरातल पर अब भी समस्याएं बरकरार हैं। सार्वजनिक शौचालयों से उठती दुर्गंध हकीकत बयां कर रही है। महिलाओं के लिए बनाए गए पिंक शौचालयों के दरवाजे टूटे हैं। केयर टेकर का भी पता नहीं रहता। सड़कों के किनारे भी कचरे के ढेर लगे हैं।
अमर उजाला की ओर से सोमवार को शहर के प्रमुख इलाकों की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आई। पिंक टॉयलेट में दी जा रहीं सुविधाएं स्वच्छता रैंकिंग के मानकों को भी पूरा नहीं कर रही हैं। सुभाषनगर, सिविल लाइंस, बिहारीपुर, जनकपुरी, गांधीपुरम, गंगापुर, सतीपुर क्षेत्र में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। यह हाल तब है जबकि, हाल में ही कूड़ा निस्तारण के लिए निगम को एक स्टार की श्रेणी में लिया गया है।
कचहरी रोड के किनारे कूड़े का ढेर लगा मिला। दुर्गंध के कारण राहगीर रुमाल से नाक बंदकर निकल रहे थे। गंदगी के बीच छुट्टा पशुओं का झुंड चारा तलाश रहा था। राहगीर अनुज ने बताया कि इस सड़क की आधी जगह में गंदगी का ढेर लगा रहता है। यहां से गुजरना दूभर हो गया है। कस्तूरबा कन्या इंटर कॉलेज के गेट पर भी दोपहर में कचरे का ढेर लगा था। यहां रोजाना राहगीरों समेत स्कूली बच्चों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। चौपुला चौराहे पर लगे कूड़ेदान का एक हिस्सा खराब हो चुका है।
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वॉश बेसिन का पाइप टूटा, डस्टबिन में भर रहा पानीकचहरी रोड पर बना पिंक शौचालय महिलाओं के इस्तेमाल करने योग्य नहीं है। इसके दरवाजे नीचे से टूट चुके हैं। उन्हें खोलने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। जिला पंचायत रोड पर बने पिंक शौचालय की स्थिति दयनीय है। स्थानीय लोगों ने बताया कि केयर टेकर सुबह आती है। कमरे और शौचालय का ताला खोलकर चली जाती है। जबकि, नियमानुसार जब तक शौचालय खुला रहता है, तब तक केयर टेकर को ड्यूटी पर रहना जरूरी है। दुर्गंध के कारण महिलाएं शौचालय में जाने से बचती हैं। इसमें लगी वॉश बेसिन का पाइप भी टूट चुका है। फर्श पर पानी न बहे, इसके लिए वॉश बेसिन के नीचे कूड़ेदान को रखा गया है। सुविधाओं के नाम पर यहां साबुन तक नहीं था।
ओडीएफ प्लस प्लस रैंकिंग के मानक
- पानी की उपलब्धता होनी चाहिए।
- पानी की टोटियां उपयोगी हों और कोई लीकेज न हो।
- प्रत्येक शौचालय की सीट के पास कूड़ेदान होना चाहिए।
- वॉश बेसिन हर समय साफ व उपयोगी हो।
- साबुन, डिस्पेंसर उपलब्ध होने चाहिए।
-केयर टेकर शौचालय खुलने के दौरान हर समय ड्यूटी पर रहना चाहिए।
-शौचालय के तीन मीटर के दायरे में अनधिकृत निर्माण व अतिक्रमण न हो।
वर्जन...
नगर निगम की ओर से स्वच्छता रैंकिंग बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कारण जीएफसी और ओडीएफ में बेहतर प्रदर्शन किया है। शहर में गंदगी और शौचालय की समस्या हो रही है तो इसमें सुधार किया जाएगा। - डॉ. संचित शर्मा, उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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अमर उजाला की ओर से सोमवार को शहर के प्रमुख इलाकों की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आई। पिंक टॉयलेट में दी जा रहीं सुविधाएं स्वच्छता रैंकिंग के मानकों को भी पूरा नहीं कर रही हैं। सुभाषनगर, सिविल लाइंस, बिहारीपुर, जनकपुरी, गांधीपुरम, गंगापुर, सतीपुर क्षेत्र में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। यह हाल तब है जबकि, हाल में ही कूड़ा निस्तारण के लिए निगम को एक स्टार की श्रेणी में लिया गया है।
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कचहरी रोड के किनारे कूड़े का ढेर लगा मिला। दुर्गंध के कारण राहगीर रुमाल से नाक बंदकर निकल रहे थे। गंदगी के बीच छुट्टा पशुओं का झुंड चारा तलाश रहा था। राहगीर अनुज ने बताया कि इस सड़क की आधी जगह में गंदगी का ढेर लगा रहता है। यहां से गुजरना दूभर हो गया है। कस्तूरबा कन्या इंटर कॉलेज के गेट पर भी दोपहर में कचरे का ढेर लगा था। यहां रोजाना राहगीरों समेत स्कूली बच्चों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। चौपुला चौराहे पर लगे कूड़ेदान का एक हिस्सा खराब हो चुका है।
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वॉश बेसिन का पाइप टूटा, डस्टबिन में भर रहा पानीकचहरी रोड पर बना पिंक शौचालय महिलाओं के इस्तेमाल करने योग्य नहीं है। इसके दरवाजे नीचे से टूट चुके हैं। उन्हें खोलने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। जिला पंचायत रोड पर बने पिंक शौचालय की स्थिति दयनीय है। स्थानीय लोगों ने बताया कि केयर टेकर सुबह आती है। कमरे और शौचालय का ताला खोलकर चली जाती है। जबकि, नियमानुसार जब तक शौचालय खुला रहता है, तब तक केयर टेकर को ड्यूटी पर रहना जरूरी है। दुर्गंध के कारण महिलाएं शौचालय में जाने से बचती हैं। इसमें लगी वॉश बेसिन का पाइप भी टूट चुका है। फर्श पर पानी न बहे, इसके लिए वॉश बेसिन के नीचे कूड़ेदान को रखा गया है। सुविधाओं के नाम पर यहां साबुन तक नहीं था।
ओडीएफ प्लस प्लस रैंकिंग के मानक
- पानी की उपलब्धता होनी चाहिए।
- पानी की टोटियां उपयोगी हों और कोई लीकेज न हो।
- प्रत्येक शौचालय की सीट के पास कूड़ेदान होना चाहिए।
- वॉश बेसिन हर समय साफ व उपयोगी हो।
- साबुन, डिस्पेंसर उपलब्ध होने चाहिए।
-केयर टेकर शौचालय खुलने के दौरान हर समय ड्यूटी पर रहना चाहिए।
-शौचालय के तीन मीटर के दायरे में अनधिकृत निर्माण व अतिक्रमण न हो।
वर्जन...
नगर निगम की ओर से स्वच्छता रैंकिंग बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कारण जीएफसी और ओडीएफ में बेहतर प्रदर्शन किया है। शहर में गंदगी और शौचालय की समस्या हो रही है तो इसमें सुधार किया जाएगा। - डॉ. संचित शर्मा, उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी