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भीषण गर्मी में 12 गांव पीने के पानी को तरसे

Mon, 12 Jun 2017 12:56 AM IST
बरेली। 
बरेली।  Updated Mon, 12 Jun 2017 12:56 AM IST
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Desperate to drink 12 villages in the fierce heat
Desperate to drink 12 villages in the fierce heat - फोटो : Desperate to drink 12 villages in the fierce heat
 योगी सरकार की प्राथमिकता में भले ही बिजली, पानी और सड़क सबसे ऊपर है लेकिन बरेली में पांच साल पहले से चल रही ग्रामीण पेयजल परियोजनाएं निर्धारित समय बीतने के बाद भी अधूरे होने से इन गांवों की 50 हजार से ऊपर आबादी पीने के स्वच्छ पानी को तरस रही है। इनमें से कई परियोजनाओं में जल निगम ने ठेकेदारों को सपा सरकार के दबाव में दूसरे मदों से पेमेंट कर दिया जिससे ये ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चले गए हैं। इनमें अधिकांश ठेकेदार रामपुर के पूर्व कैबिनेट मंत्री के नजदीकी बताए जा रहे हैं। 
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आलमपुर जाफराबाद के क्योना सादीपुर पेयजल परियोजना 116.49 लाख की लागत से वर्ष 2011-12 में ओवरहेड टैंक बनना था और पानी की पाइप लाइन गांव में पड़नी थी। ये परियोजना पूरा बजट मिलने के बाद भी अधूरी है। 2013-14 में प्रारंभ बगरऊ पेयजल परियोजना 2.10 करोड़ की लागत की है। इसमें 1.24 करोड़ अवमुक्त हो चुके हैं। दो साल से ओवरहेड टैंक निर्माण और पाइप लाइन बिछाने का काम बंद है। फतेहगंज पश्चिमी के मोहम्मद गंज पेयजल परियोजना में 3.01 करोड़ की लागत से अवर जलाशय, नलकूप और पंप हाउस बनना था। 1.32 करोड़ अवमुक्त होने के बाद दो साल से काम बंद है। यही हाल खनगवां श्याम ग्राम समूह पेयजल योजना का है। 2013-14 से यहां अवर जलाशय, नलकूप और पंप हाउस नहीं बन पाया। 3.03 करोड़ की लागत से होने वाले ये काम लंबे समय से बंद हैं। चार साल पहले सिसौना ग्राम समूह पेयजल परियोजना 2.94 करोड़ की लागत से प्रारंभ हुई। इसमें भी दो साल से ज्यादा समय से काम बंद है। अधिकांश ठेकेदार काम छोड़कर जा चुके हैं। सपा सरकार में ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं में अधिकांश ठेके पूर्व कैबिनेट मंत्री के दबाव में रामपुर के ठेकेदारों को मिले थे। इन ठेकेदारों ने मनमाने तरीके से काम औने पौने में निपटाकर काम अधूरे छोड़ दिए। जल निगम के तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं ने राजनीतिक दबाव में दूसरे मदों से ठेकेदारों को पेमेंट करा दिए। इसमें तत्कालीन एक्सईएन दिनेशचंद्रा निलंबित हुए थे जबकि पातीराम का उन्नाव ट्रांसफर किया गया था। इन प्रोजेक्ट में दो अन्य एक्सईएन के अलावा तीन एई और जेई की भी भूमिका संदिग्ध है। मोहनपुर, शिवपुरी, गैनी, टिसुआ, मनौना के अलावा सांसद आदर्श योजना के गोद लिए गांवों रोंधी मुस्तकिल और रहपुरा जागीर में भी ओवरहेड टैंक, नलकूप निर्माण के अलावा पानी की पाइप लाइन डालने का काम नहीं हो पाया है। इन गांवों को स्वच्छ पानी नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। 
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इन परियोजनाओं के काम 2013-14 से चल रहे हैं 
 प्रोजेक्ट का नाम                 लागत            वर्तमान प्रगति
 मेाहनपुर पेयजल परियोजना   668.35 लाख     अधूरी 
शिवपुरी पेयजल परियोजना     208.88 लाख    अधूरी
गैनी पेयजल परियोजना         267.490 लाख   अधूरी
टिसुआ पेयजल परियोजना     358.12 लाख    अधूरी
मनौना पेयजल परियोजना      366.75 लाख    अधूरी
सांसद आदर्श योजना में चयनित गांव ---
रोंधी मुस्तिकिल ग्राम पेयजल
परियोजना                      157.29 लाख     65 फीसदी 
रहपुरा जागीर                   200.42 लाख     65 फीसदी 
ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं के काम अधूरे होने की वजह बजट का पूरा न मिलना रहा। फिर भी काफी काम करा दिए गए हैं। बाकी काम भी कराए जा रहे हैं।  संजय कुमार, एक्सईएन जल निगम 
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