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36 घंटों से भूखे-प्यासे खेत में पड़े मजदूरों ने किया दिल्ली हाईवे जाम
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सब्र का बांध टूटा तो मजदूरों ने जाम कर दिया नेशनल हाईवे।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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दो घंटे तक किया जमकर हंगामा, बरेली जंक्शन से मजदूरों को लेकर जा रहीं 20 बसें भी फंसी
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बरेली और रामपुर के अफसरों में हुई तकरार, अंतत: रामपुर प्रशासन बसों से ले गया मजदूरों को
मीरगंज। दो जिलों के बीच फुटबॉल बने करीब 170 प्रवासी मजदूरों को भूखे-प्यासे एक खेत में 36 घंटे से ज्यादा समय तक पड़े रहना पड़ा तो उनका सब्र जवाब दे गया। गुस्साए मजदूरों ने मंगलवार रात रामपुर सीमा पर दिल्ली हाईवे जाम कर दिया और करीब दो घंटे तक जमकर हंगामा किया। जाम खुलवाने में दोनों जिलों के तहसील स्तरीय अफसरों के हाथ पैर फूल गए। इस बीच बरेली जंक्शन से मजदूरों को लेकर जा रहीं रोडवेज की करीब बीस बसें भी जाम में फंस गईं। बाद में मिलक के अधिकारी बसों से मजदूरों को ले गए। उनके परीक्षण, देखरेख और घर भिजवाने का वादा किया गया।
एडीजी पहले ही इस बात पर नाराजगी जता चुके थे कि पैदल और दूसरे साधनों से आ रहे प्रवासी मजदूरों को एक जिले का पुलिस प्रशासन दूसरे जिले में खदेड़ दे रहा है। उन्होंने इस मामले में शासन को रिपोर्ट भी भेजी। दूसरे प्रांतों के करीब 170 मजदूरों को सोमवार तड़के रामपुर की ओर से मीरगंज की सीमा में प्रवेश करते वक्त रोका गया। मजदूरों का आरोप था कि पुलिस ने उन्हें फिर से रामपुर जिले की सीमा में खदेड़ दिया। तब से वे सीमावर्ती गांव लभारी के खेत में पड़े थे। भूख प्यास और पुलिस की सख्ती से बेहाल लोगों ने शाम छह बजे नेशनल हाईवे-24 पर जाम लगा दिया। सूचना पर मीरगंज (बरेली) और मिलक (रामपुर) के एसडीएम तथा सीओ पहुंच गए। मजदूरों ने पुलिस पर ज्यादती करने और एक सिपाही पर मारपीट का भी आरोप लगाया। दो घंटे बाद उन्हें मनाया जा सका। बाद में मिलक एसडीएम ज्योति गौतम और सीओ धर्म सिंह मार्छाल सभी मजदूरों को बसों से साथ ले गए। उन्होंने मीरगंज प्रशासन पर मजदूरों की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि वह इन्हें शेल्टर होम में रखकर सुविधाएं देंगे।
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बरेली और रामपुर के अफसरों में हुई तकरार, अंतत: रामपुर प्रशासन बसों से ले गया मजदूरों को मीरगंज। दो जिलों के बीच फुटबॉल बने करीब 170 प्रवासी मजदूरों को भूखे-प्यासे एक खेत में 36 घंटे से ज्यादा समय तक पड़े रहना पड़ा तो उनका सब्र जवाब दे गया। गुस्साए मजदूरों ने मंगलवार रात रामपुर सीमा पर दिल्ली हाईवे जाम कर दिया और करीब दो घंटे तक जमकर हंगामा किया। जाम खुलवाने में दोनों जिलों के तहसील स्तरीय अफसरों के हाथ पैर फूल गए। इस बीच बरेली जंक्शन से मजदूरों को लेकर जा रहीं रोडवेज की करीब बीस बसें भी जाम में फंस गईं। बाद में मिलक के अधिकारी बसों से मजदूरों को ले गए। उनके परीक्षण, देखरेख और घर भिजवाने का वादा किया गया।
एडीजी पहले ही इस बात पर नाराजगी जता चुके थे कि पैदल और दूसरे साधनों से आ रहे प्रवासी मजदूरों को एक जिले का पुलिस प्रशासन दूसरे जिले में खदेड़ दे रहा है। उन्होंने इस मामले में शासन को रिपोर्ट भी भेजी। दूसरे प्रांतों के करीब 170 मजदूरों को सोमवार तड़के रामपुर की ओर से मीरगंज की सीमा में प्रवेश करते वक्त रोका गया। मजदूरों का आरोप था कि पुलिस ने उन्हें फिर से रामपुर जिले की सीमा में खदेड़ दिया। तब से वे सीमावर्ती गांव लभारी के खेत में पड़े थे। भूख प्यास और पुलिस की सख्ती से बेहाल लोगों ने शाम छह बजे नेशनल हाईवे-24 पर जाम लगा दिया। सूचना पर मीरगंज (बरेली) और मिलक (रामपुर) के एसडीएम तथा सीओ पहुंच गए। मजदूरों ने पुलिस पर ज्यादती करने और एक सिपाही पर मारपीट का भी आरोप लगाया। दो घंटे बाद उन्हें मनाया जा सका। बाद में मिलक एसडीएम ज्योति गौतम और सीओ धर्म सिंह मार्छाल सभी मजदूरों को बसों से साथ ले गए। उन्होंने मीरगंज प्रशासन पर मजदूरों की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि वह इन्हें शेल्टर होम में रखकर सुविधाएं देंगे।
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