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Bareilly News: खतरा ः बच्चों पर निमोनिया और डायरिया का हमला, 24 भर्ती
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बरेली। बदलते मौसम में जरा सी अनदेखी बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। डायरिया, निमोनिया और तेज बुखार के चपेट में आए बच्चों से जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड फुल होने की कगार पर है। वार्ड में 24 बच्चे भर्ती है। डॉक्टर के मुताबिक, ओपीडी में बच्चे गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं। अभी चार निमोनिया, 16 डायरिया, चार तेज बुखार से पीड़ित बच्चे भर्ती हैं।
पिछले करीब एक माह से बच्चा वार्ड के 30 बेड के सापेक्ष पांच से सात बच्चे ही भर्ती हो रहे थे। इधर, सप्ताह भर से धूप के तेवर गर्म होने से दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा पहुंचने और रात के पारे में स्थिरता से सर्द-गर्म की स्थिति है।
दिन में गर्मी के चलते ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनाने में अनदेखी या घंटों धूप में रहने से गर्म कपड़ों के चलते बच्चे पसीने से तरबतर हो रहे हैं। वहीं, रात में सोते समय रजाई हटाने से ठंड की स्थिति है। जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम है, उनपर वायरस और बैक्टीरिया का हमला हो रहा है। इससे बच्चों की सेहत बिगड़ रही है।
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स्टाफ के मुताबिक अभिभावकों से पूछताछ में पता चला कि पांच से सात दिन तबीयत खराब रही और मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खिला रहे थे। हालत गंभीर हुई तो अस्पताल आए। इलाज से सुधार हो रहा है।
n बिगड़ती है पाचन क्षमता ः बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, बदलते मौसम में पाचन तंत्र भी बिगड़ता है। दूषित खानपान, पानी की कमी से डिहाइड्रेशन और डायरिया की आशंका रहती है। सर्द-गर्म होने पर सही इलाज न होने से ब्रोंकाइटिस यानी निमोनिया संदिग्ध लक्षण उभरते हैं। गले में बैक्टीरिया के संक्रमण से बच्चे दूध भी कम पीते हैं। अतिरिक्त आहार से कतराते हैं। लक्षण उभरने पर अभिभावकों की अनदेखी से हालत बिगड़ती जाती है।
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पिछले करीब एक माह से बच्चा वार्ड के 30 बेड के सापेक्ष पांच से सात बच्चे ही भर्ती हो रहे थे। इधर, सप्ताह भर से धूप के तेवर गर्म होने से दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा पहुंचने और रात के पारे में स्थिरता से सर्द-गर्म की स्थिति है।
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दिन में गर्मी के चलते ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनाने में अनदेखी या घंटों धूप में रहने से गर्म कपड़ों के चलते बच्चे पसीने से तरबतर हो रहे हैं। वहीं, रात में सोते समय रजाई हटाने से ठंड की स्थिति है। जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम है, उनपर वायरस और बैक्टीरिया का हमला हो रहा है। इससे बच्चों की सेहत बिगड़ रही है।
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स्टाफ के मुताबिक अभिभावकों से पूछताछ में पता चला कि पांच से सात दिन तबीयत खराब रही और मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खिला रहे थे। हालत गंभीर हुई तो अस्पताल आए। इलाज से सुधार हो रहा है।
n बिगड़ती है पाचन क्षमता ः बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, बदलते मौसम में पाचन तंत्र भी बिगड़ता है। दूषित खानपान, पानी की कमी से डिहाइड्रेशन और डायरिया की आशंका रहती है। सर्द-गर्म होने पर सही इलाज न होने से ब्रोंकाइटिस यानी निमोनिया संदिग्ध लक्षण उभरते हैं। गले में बैक्टीरिया के संक्रमण से बच्चे दूध भी कम पीते हैं। अतिरिक्त आहार से कतराते हैं। लक्षण उभरने पर अभिभावकों की अनदेखी से हालत बिगड़ती जाती है।