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एफआईआर की नौबत आई तो डाकघर अफसर बोले- वापस ले लो अपना डेढ़ करोड़ रुपया
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जिला पंचायती राज विभाग के अफसरों की भूमिका पर सवाल, रुपया भेजा लेकिन एनएससी फार्म नहीं भरा
बरेली। डेढ़ साल से सफाईकर्मियों के एनएससी के डेढ़ करोड़ रुपये डाकघर में जमा रखने के मामले ने तूल पकड़ा तो अफसर अब बैकफुट पर आ गए हैं। डाकघर के अफसरों ने फाइल पर जमी धूल साफ कर जिला पंचायत राज विभाग को पत्र लिखा है। इसमें विभाग से एनएससी फार्म भरकर भेजने या फिर जमा रुपया वापस लेने को कहा है। साथ ही, सफाईकर्मियों से वार्ता कर उनका रुपया सुरक्षित होने की जानकारी दी।
शुक्रवार को अमर उजाला ने ‘मुख्य डाकघर में फंसे सफाईकर्मियों के डेढ़ करोड़.. दर्ज होगी एफआईआर’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की तो डाकघर में खलबली मच गई। अफसरों ने शुक्रवार की सुबह सफाईकर्मियों को फोन कर बुलाया और उनसे डेढ़ करोड़ रुपये के संबंध में जानकारी ली। उप्र पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष रामलाल कश्यप और अन्य ने क्रमवार समस्या बताई। कहा, पिछले डेढ़ साल से डाकघर में डेढ़ करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें से 24900 रुपये के हिसाब से 626 सफाईकर्मियों के एनएससी प्रमाण पत्र जारी किए जाने हैं, लेकिन कई बार अफसरों से शिकायत करने के बाद भी प्रमाण पत्र नहीं मिले। इस पर सीनियर पोस्ट मास्टर एसके त्रिवेदी ने फाइल निकलवाई, तो पता चला कि जिला पंचायत राज विभाग की ओर से रुपया तो डाकघर भेजा गया लेकिन एनएससी के फार्म आधे-अधूरे भरने की वजह से प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सका। हालांकि, मामले पर सीनियर पोस्ट मास्टर ने जिला पंचायत राज विभाग को पत्र लिखकर रुपया वापस लेने या फिर सभी आवेदन दुरुस्त कर भेजने को कहा है। ताकि नेशनल सेविंग स्कीम (एनएससी) के प्रमाण पत्र जारी हो सकें। इस दौरान संघ के जिला उपाध्यक्ष रनवीर सिंह पटेल, तेज प्रकाश लोधी और अन्य लोग मौजूद रहे।
सफाईकर्मियों को लगा 14 लाख का चूना
मामला सामने आने के बाद अब सफाईकर्मियों को एनएससी प्रमाणपत्र तो जारी हो जाएगा लेकिन डेढ़ साल तक डाकघर में जमा रहे डेढ़ करोड़ रुपये के ब्याज संबंधी सवाल का अफसर जवाब नहीं दे रहे हैं। बताया जाता है कि अगर सफाईकर्मियों को प्रमाण पत्र मिल जाते तो उन्हें नौ प्रतिशत ब्याज दर से प्रत्येक को करीब 2,228 रुपये और कुल जमा राशि पर 14 लाख रुपये का ब्याज मिलता। सफाई कर्मचारी संघ अब इस नुकसान की भरपाई की जिला पंचायती राज विभाग से मांग कर रहा है। आरोप है कि विभाग के अफसर रुपया जमा कर भूल गए, फार्म भी सही भरकर नहीं भेजे, इसलिए सफाई कर्मियों को नुकसान हुआ है।
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डाकघर में जमा डेेढ़ करोड़ रुपया वापस लेने के बजाय सफाई कर्मियों को एनएससी प्रमाण पत्र दिलाया जाएगा। डाकघर के अफसरों से बात हुई है, उनसे फार्म मांगे गए हैं। जल्द ही सारे फार्म दोबारा भरकर भेज दिए जाएंगे। डेढ़ साल बाद रकम जमा होने की वजह से सफाई कर्मियों को ब्याज संबंधी नुकसान जरूर होगा। - धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ
- डाकघर में जमा जिला पंचायती राज विभाग की रकम उन्हीं के सरकारी खाते में पड़ी रही। इस पर कोई ब्याज देना या डाकघर की ओर से रकम का उपयोग किया जाना संभव नहीं है। डेढ़ साल पहले सफाई कर्मियों के फार्म में तमाम खामियां थीं। अब प्रमाण पत्र जारी होगा तो नए सिरे से ब्याज संबंधी प्रक्रिया शुरू होगी। - एसके त्रिवेदी, सीनियर पोस्ट मास्टर
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बरेली। डेढ़ साल से सफाईकर्मियों के एनएससी के डेढ़ करोड़ रुपये डाकघर में जमा रखने के मामले ने तूल पकड़ा तो अफसर अब बैकफुट पर आ गए हैं। डाकघर के अफसरों ने फाइल पर जमी धूल साफ कर जिला पंचायत राज विभाग को पत्र लिखा है। इसमें विभाग से एनएससी फार्म भरकर भेजने या फिर जमा रुपया वापस लेने को कहा है। साथ ही, सफाईकर्मियों से वार्ता कर उनका रुपया सुरक्षित होने की जानकारी दी।
शुक्रवार को अमर उजाला ने ‘मुख्य डाकघर में फंसे सफाईकर्मियों के डेढ़ करोड़.. दर्ज होगी एफआईआर’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की तो डाकघर में खलबली मच गई। अफसरों ने शुक्रवार की सुबह सफाईकर्मियों को फोन कर बुलाया और उनसे डेढ़ करोड़ रुपये के संबंध में जानकारी ली। उप्र पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष रामलाल कश्यप और अन्य ने क्रमवार समस्या बताई। कहा, पिछले डेढ़ साल से डाकघर में डेढ़ करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें से 24900 रुपये के हिसाब से 626 सफाईकर्मियों के एनएससी प्रमाण पत्र जारी किए जाने हैं, लेकिन कई बार अफसरों से शिकायत करने के बाद भी प्रमाण पत्र नहीं मिले। इस पर सीनियर पोस्ट मास्टर एसके त्रिवेदी ने फाइल निकलवाई, तो पता चला कि जिला पंचायत राज विभाग की ओर से रुपया तो डाकघर भेजा गया लेकिन एनएससी के फार्म आधे-अधूरे भरने की वजह से प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सका। हालांकि, मामले पर सीनियर पोस्ट मास्टर ने जिला पंचायत राज विभाग को पत्र लिखकर रुपया वापस लेने या फिर सभी आवेदन दुरुस्त कर भेजने को कहा है। ताकि नेशनल सेविंग स्कीम (एनएससी) के प्रमाण पत्र जारी हो सकें। इस दौरान संघ के जिला उपाध्यक्ष रनवीर सिंह पटेल, तेज प्रकाश लोधी और अन्य लोग मौजूद रहे।
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सफाईकर्मियों को लगा 14 लाख का चूना
मामला सामने आने के बाद अब सफाईकर्मियों को एनएससी प्रमाणपत्र तो जारी हो जाएगा लेकिन डेढ़ साल तक डाकघर में जमा रहे डेढ़ करोड़ रुपये के ब्याज संबंधी सवाल का अफसर जवाब नहीं दे रहे हैं। बताया जाता है कि अगर सफाईकर्मियों को प्रमाण पत्र मिल जाते तो उन्हें नौ प्रतिशत ब्याज दर से प्रत्येक को करीब 2,228 रुपये और कुल जमा राशि पर 14 लाख रुपये का ब्याज मिलता। सफाई कर्मचारी संघ अब इस नुकसान की भरपाई की जिला पंचायती राज विभाग से मांग कर रहा है। आरोप है कि विभाग के अफसर रुपया जमा कर भूल गए, फार्म भी सही भरकर नहीं भेजे, इसलिए सफाई कर्मियों को नुकसान हुआ है।
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डाकघर में जमा डेेढ़ करोड़ रुपया वापस लेने के बजाय सफाई कर्मियों को एनएससी प्रमाण पत्र दिलाया जाएगा। डाकघर के अफसरों से बात हुई है, उनसे फार्म मांगे गए हैं। जल्द ही सारे फार्म दोबारा भरकर भेज दिए जाएंगे। डेढ़ साल बाद रकम जमा होने की वजह से सफाई कर्मियों को ब्याज संबंधी नुकसान जरूर होगा। - धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ
- डाकघर में जमा जिला पंचायती राज विभाग की रकम उन्हीं के सरकारी खाते में पड़ी रही। इस पर कोई ब्याज देना या डाकघर की ओर से रकम का उपयोग किया जाना संभव नहीं है। डेढ़ साल पहले सफाई कर्मियों के फार्म में तमाम खामियां थीं। अब प्रमाण पत्र जारी होगा तो नए सिरे से ब्याज संबंधी प्रक्रिया शुरू होगी। - एसके त्रिवेदी, सीनियर पोस्ट मास्टर