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जीआईसी में उर्स-ए-शराफती की नहीं मिली अनुमति
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बरेली। उर्स शराफती में हर साल बढ़ रही भीड़ को देखते हुए इस बार कार्यक्रम के लिए जीआईसी मैदान मांगा गया था। इसकी अनुमति न मिलने पर हजरत शाह शराफत मियां दरगाह के प्रबंधक हाजी मुमताज मियां काफी मायूस हैं। उनका कहना है कि जीआईसी में उर्स करने को लेकर प्रशासन ने नई परंपरा बताकर मना कर दिया है। अगर जगह को बदलना नई परंपरा है तो इस तरह तीन तलाक पर कानून बनाना भी वैसा ही है। तीन तलाक पर नई परंपरा क्यों बनाई गई।
दरगाह के प्रबंधक ने शाहबाद स्थित दरगाह के मेहमानखाने में प्रेसवार्ता के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि हुकूमत ने मौजूदा दौर में मुस्लिम महिलाओं की स्थिति को देखते हुए तीन तलाक को खत्म करना आज की जरूरत के हिसाब से महसूस किया, तो यहां भी वक्त की जरूरत को महसूस करते हुए जगह में बदलाव की जरूरत है। अगर हुकूमत को तीन तलाक पर मुस्लिमों से हमदर्दी है तो यहां भी हमदर्दी होनी चाहिए। क्योंकि दरगाह की गलियां संकरी हैं। पिछली साल बहुत अधिक भीड़ होने की वजह से एक जायरीन की दबकर मौत हो चुकी है। इसलिए वह चाहते थे कि उर्स के लिए प्रशासन खुली जगह मुहैया करा दे। उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से काम शहर में हो जाते हैं जो नई परंपरा के अंतर्गत आते हैं, उन पर रोक क्यों नहीं लगती। उन्होंने बताया कि जीआईसी मैदान इसलिए और भी चाहते थे कि उर्स के मौके पर गरीब बच्चियों का सामूहिक विवाह, पित्ते और गुर्दे के नि:शुल्क आपरेशन और ब्लड डोनेशन कैंप भी लगाने का इरादा था। इसके लिए यहां के एक बड़े नेता से सिफारिश भी कराई, फिर भी प्रशासन ने अनुमति नहीं दी।
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दरगाह के प्रबंधक ने शाहबाद स्थित दरगाह के मेहमानखाने में प्रेसवार्ता के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि हुकूमत ने मौजूदा दौर में मुस्लिम महिलाओं की स्थिति को देखते हुए तीन तलाक को खत्म करना आज की जरूरत के हिसाब से महसूस किया, तो यहां भी वक्त की जरूरत को महसूस करते हुए जगह में बदलाव की जरूरत है। अगर हुकूमत को तीन तलाक पर मुस्लिमों से हमदर्दी है तो यहां भी हमदर्दी होनी चाहिए। क्योंकि दरगाह की गलियां संकरी हैं। पिछली साल बहुत अधिक भीड़ होने की वजह से एक जायरीन की दबकर मौत हो चुकी है। इसलिए वह चाहते थे कि उर्स के लिए प्रशासन खुली जगह मुहैया करा दे। उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से काम शहर में हो जाते हैं जो नई परंपरा के अंतर्गत आते हैं, उन पर रोक क्यों नहीं लगती। उन्होंने बताया कि जीआईसी मैदान इसलिए और भी चाहते थे कि उर्स के मौके पर गरीब बच्चियों का सामूहिक विवाह, पित्ते और गुर्दे के नि:शुल्क आपरेशन और ब्लड डोनेशन कैंप भी लगाने का इरादा था। इसके लिए यहां के एक बड़े नेता से सिफारिश भी कराई, फिर भी प्रशासन ने अनुमति नहीं दी।
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