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डेढ़ दशक से चल रही है भगवत- केसर की जंग
बरेली।
Updated Wed, 15 Feb 2017 12:38 AM IST
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There is one and a half decades of war Bgwat- saffron
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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पूर्व मंत्री भगवतसरन गंगवार और पूर्व एमएलसी केसर सिंह गंगवार के बीच राजनीतिक वर्चस्व की जंग डेढ़ दशक पहले शुरू हुई थी। 12 साल पहले जिला पंचायत चुनाव में केसर सिंह के सामने भगवतसरन गंगवार के बेटे अतुल गंगवार चुनाव लड़ रहे थे। उस समय भी मतगणना के दौरान केसर और भगवत में धक्का मुक्की हो गई थी। ढाई दशक पहले दोनों नेताओं ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत भाजपा से की थी।
भगवतसरन और केसर सिंह ने नब्बे के दशक में एक साथ भाजपा से राजनीतिक कैरियर शुरू किया था। उस समय दोनों गहरे राजनीतिक दोस्त थे। 1993 में केसर सिंह ने भगवतसरन को नवाबगंज से एमएलए का चुनाव भी लड़ाया था। 1995 से 2000 तक एक साथ रहे। वर्ष 2005 नवाबगंज क्षेत्र से जिला पंचायत का चुनाव लड़ रहे थे। उनके सामने तत्कालीन मंत्री भगवतसरन गंगवार के बेटे अतुल गंगवार थे। मतगणना के दौरान एजेंट से कहासुनी होने पर भगवतसरन से केसर की पहले कहासुनी हुई। बाद में ये झगड़ा धक्का मुक्की तक पहुंच गया था। हाल ही में पीडब्ल्यूडी से स्वीकृत निर्माण का शिलान्यास करने को लेकर भी भगवतसरन समर्थकों का भाजपाइयों से विवाद हो चुका है। भाजपाइयों ने भगवतसरन गंगवार का पुतला दहन करने की कोशिश की तो उनके समर्थक पुतला छीनकर ले गए। केसर सिंह बसपा में चले गए तो भी उनकी भगवतसरन गंगवार से नहीं बनी। पिछले साल केसर सिंह जब भाजपा में शामिल हुए उसी समय से दोनों के बीच झगड़े की आहट सुनाई देने लगी थी जिसका परिणाम विधानसभा चुनाव के मतदान से दो दिन पहले सामने आया।
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भगवतसरन और केसर सिंह ने नब्बे के दशक में एक साथ भाजपा से राजनीतिक कैरियर शुरू किया था। उस समय दोनों गहरे राजनीतिक दोस्त थे। 1993 में केसर सिंह ने भगवतसरन को नवाबगंज से एमएलए का चुनाव भी लड़ाया था। 1995 से 2000 तक एक साथ रहे। वर्ष 2005 नवाबगंज क्षेत्र से जिला पंचायत का चुनाव लड़ रहे थे। उनके सामने तत्कालीन मंत्री भगवतसरन गंगवार के बेटे अतुल गंगवार थे। मतगणना के दौरान एजेंट से कहासुनी होने पर भगवतसरन से केसर की पहले कहासुनी हुई। बाद में ये झगड़ा धक्का मुक्की तक पहुंच गया था। हाल ही में पीडब्ल्यूडी से स्वीकृत निर्माण का शिलान्यास करने को लेकर भी भगवतसरन समर्थकों का भाजपाइयों से विवाद हो चुका है। भाजपाइयों ने भगवतसरन गंगवार का पुतला दहन करने की कोशिश की तो उनके समर्थक पुतला छीनकर ले गए। केसर सिंह बसपा में चले गए तो भी उनकी भगवतसरन गंगवार से नहीं बनी। पिछले साल केसर सिंह जब भाजपा में शामिल हुए उसी समय से दोनों के बीच झगड़े की आहट सुनाई देने लगी थी जिसका परिणाम विधानसभा चुनाव के मतदान से दो दिन पहले सामने आया।
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