{"_id":"597263994f1c1bf16e8b4816","slug":"due-to-the-lethargy-of-officers","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसरों की सुस्ती से भड़का आंवला में बवाल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
अफसरों की सुस्ती से भड़का आंवला में बवाल
बरेली
Updated Sat, 22 Jul 2017 01:57 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आंवला तहसील के गांव खैलम में कांवड़ यात्रा के रास्ते को लेकर अगर अफसर जल्द संज्ञान ले लेते तो शायद इतना बवाल नहीं होता। दोपहर एक बजे से तीन बजे तक विवाद चलता रहा, लेकिन कोई उच्चाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे तीन बजे तक काफी भीड़ एकत्र हो गई और बवाल होने लगा। फिर शाम को पहुंचे अफसर समझौता कराने की कवायद में जुट गए, लेकिन तब तक हालात बेहद खराब होने पर पथराव हो गया।
आंवला तहसील के गांव खैलम में कांवड़ यात्रा के रास्ते को लेकर दोपहर एक बजे से ही विवाद हो रहा था। दूसरे समुदाय के लोग पहले तो नया रास्ता बताते हुए इस तरफ से यात्रा निकालने पर राजी ही नहीं हुए। फिर कुछ समझाने पर बिना डीजे बजाए यात्रा निकलने की बात हुई, लेकिन इसको भी नजरअंदाज किया गया तो मामला तूल पकड़ने लगा। वहीं यात्रा निकालने वाले पक्ष ने एक बजे से तीन बजे तक काफी भीड़ जुटा ली। जिससे मामला तूल पकड़ता गया, लेकिन उच्चाधिकारियों ने इस ओर कोई संज्ञान नहीं लिया। साढ़े पांच बजे एसपी देहात ख्याति गर्ग और एडीएम प्रशासन एसपी सिंह मौके पर पहुंचे। दूसरे पक्ष को ठीक से राजी किए बिना ही कांवड़ियों के जत्थे को निकलवाने लगे तो लोग और भड़क गए और पथराव शुरू हो गया। एसडीएम को भी लोगों ने घेर लिया और धक्का-मुक्की की। किसी तरह आईटीबीपी के जवानों ने सुरक्षित कांवड़ियों को गांव से बाहर निकाला। अगर तत्काल मामला निपटा लिया गया होता तो न तो इतनी भीड़ जुटती और न ही पथराव की नौबत आती। जिलाधिकारी राघवेेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आ गया था। एसडीएम पर हमले की बात भी सामने आई लेकिन हमला नहीं हुआ था। अब सबकुछ शांत हो गया है।
विज्ञापन
आंवला तहसील के गांव खैलम में कांवड़ यात्रा के रास्ते को लेकर दोपहर एक बजे से ही विवाद हो रहा था। दूसरे समुदाय के लोग पहले तो नया रास्ता बताते हुए इस तरफ से यात्रा निकालने पर राजी ही नहीं हुए। फिर कुछ समझाने पर बिना डीजे बजाए यात्रा निकलने की बात हुई, लेकिन इसको भी नजरअंदाज किया गया तो मामला तूल पकड़ने लगा। वहीं यात्रा निकालने वाले पक्ष ने एक बजे से तीन बजे तक काफी भीड़ जुटा ली। जिससे मामला तूल पकड़ता गया, लेकिन उच्चाधिकारियों ने इस ओर कोई संज्ञान नहीं लिया। साढ़े पांच बजे एसपी देहात ख्याति गर्ग और एडीएम प्रशासन एसपी सिंह मौके पर पहुंचे। दूसरे पक्ष को ठीक से राजी किए बिना ही कांवड़ियों के जत्थे को निकलवाने लगे तो लोग और भड़क गए और पथराव शुरू हो गया। एसडीएम को भी लोगों ने घेर लिया और धक्का-मुक्की की। किसी तरह आईटीबीपी के जवानों ने सुरक्षित कांवड़ियों को गांव से बाहर निकाला। अगर तत्काल मामला निपटा लिया गया होता तो न तो इतनी भीड़ जुटती और न ही पथराव की नौबत आती। जिलाधिकारी राघवेेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आ गया था। एसडीएम पर हमले की बात भी सामने आई लेकिन हमला नहीं हुआ था। अब सबकुछ शांत हो गया है।
विज्ञापन