फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Drunken shattered his own world by Chandra

नशे में धुत चंद्रप्रकाश ने खुद उजाड़ दी अपनी दुनिया

Sun, 19 Feb 2017 01:24 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Sun, 19 Feb 2017 01:24 AM IST
विज्ञापन
 Drunken shattered his own world by Chandra
बंदी रक्षक अपनी पत्‍नी के साथ - फोटो : Drunken shattered his own world by Chandra
बंदी रक्षक चंद्रप्रकाश की शराब की आदत ने उनके बच्चों को यतीम बना दिया। नशा उसपर इतना हावी था कि वह क्रिकेट का बल्ला पत्नी पर तबतक बरसाता गया जबतक वह मरणासन्न होकर गिर नहीं गई। बच्चों ने शोर मचाया तो नशे में झूमते हुए खुद छत से कूद गया। अब 15 साल का बेटा और 12 साल की बेटी बेसहारा हो गए हैं। बंदी रक्षक चंद्रप्रकाश का तो शाम को ही पोस्टमार्टम हो गया। पत्नी अर्चना देवी उर्फ विद्यावती का डीएम के आदेश पर रात को पोस्टमार्टम कराने के बाद परिवार वाले दोनों के शवों को इटावा ले गए।
विज्ञापन

बंदी रक्षक चंद्रप्रकाश का करीब 15 साल का बेटा मयंक वुडरो स्कूल में कक्षा ग्यारह का छात्र है। उसकी बारह साल की बहन मान्या भी इसी स्कूल में पढ़ती है। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि पल भर में मम्मी-पापा दोनों  उनसे जुदा हो जाएंगे। मम्मी पर हमला होने के बाद मयंक ने पहला फोन अपने बडे़ मामा जेपी भारती को किया। वह कन्नौज जिले में कृषि विभाग में डिप्टी डायरेक्टर हैं। उन्होंने अपने छोटे भाई सत्यप्रकाश गौतम को सूचना देकर घटना की जानकारी दी। मयंक ने फोन उठते ही कहा प्लीज मामा जल्दी आ जाओ.. पापा ने मम्मी को मार डाला है। उनके सिर और मुंह से खून बह रहा है। 
विज्ञापन

आए दिन होता था विवादमयंक ने बताया कि शराब पीकर आए दिन पापा और मम्मी में विवाद हो जाता था। उन्हें क्या पता था कि दादा का मोबाइल रिचार्ज न होने को लेकर पापा मम्मी की हत्या करने के बाद खुद भी आत्महत्या कर लेंगे। वह तो अक्सर जरा की गलती को इश्यू बनाकर नशे में बहस करने लगते थे। इसे लेकर घर में क्लेश रहता था। वह तो बहन से साथ बैठकर पढ़ाई कर रहा था, लेकिन पापा ने अचानक क्रिकेट का बल्ला उठाकर मम्मी पर हमला कर दिया। मान्या और वह तो मम्मी को खून से लथपथ देखकर रोने बिलखने लगे। इसी बीच पता लगा कि पापा भी छत से कूदक र बेहोश हैं। उन्हें गंभीर चोटें लगी हैं। मयंक के मुताबिक करीब 35 फिट ऊंची तीन मंजिला बिल्डिंग में उनका क्वार्टर दूसरी मंजिल पर है। पापा नशे में सीढ़ियों से चढ़कर तीसरी मंजिल की छत से नीचे कूद गए। वह जिस स्थान पर कूदे वहां नीचे रेत था। इसलिए ऐसी चोट नहीं लगी, जिससे खून बहता। उनके शरीर में गुम चोटें आई थीं। एक हाथ और कंधा टूट गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


कई बार भाईयों ने पंचायत करके मसला निपटाया
-जिला औरया के  थाना फफूड़ के ग्राम लड़ैयापुर गांव की रहने वाली अर्चना उर्फ विद्यावती की शादी 1997 में बंदी रक्षक चंद्रप्रकाश के साथ हुई थी। अर्चना के भाई फायर मैन सत्यपाल गौतम ने बताया कि  सरकारी नौकरी की वजह से उन्होंने शादी की थी, लेकिन चंद्रप्रकाश ने शराब पीकर आए दिन उसे परेशान करते थे। ज्यादा पीकर आने के बाद उन्हें बात करने के लिए एक आदमी चाहिए था। अर्चना को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सुबह उठना पड़ता था, इसलिए वह जल्द सो जाती थी। वह उसे सोते से उठा लेते थे। चंद्रप्रकाश करीब आठ साल से सेंट्रल जेल बरेली में तैनात हैं। डेढ़ साल पहले उन्होंने अर्चना को बेरहमी से पीटकर घर से निकाल दिया था। तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने मसले को निपटाया था। अर्चना ने कई बार उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह मानते ही नहीं थे। विरोध करने पर मारपीट करने लगते थे।
बच्चों को नहीं था पापा के खूंखार इरादे की भनक
-चंद्रप्रकाश के बच्चों को उनके खूंखार इरादे की जरा भी भनक नहीं थी। वह अपने कमरे में बैठे पढ़ते रहे। मम्मी की चीख की आवाज सुनने पर कमरे से निकलकर आए तो बहुत देर हो चुकी थी। खून से मयंक के क्रिकेट खेलने का बल्ला बेड के नीचे पड़ा था और अर्चना अचेत पड़ी थी। मंयक का कहना है कि उसे जरा भी भनक होती तो वह पापा से बल्ला छीन लेता। 
बुआ, चाचा और मामा आ गए
-बंदी रक्षक और उनकी पत्नी की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार के लोग बरेली पहुंच गए। चंद्रप्रकाश के चचेरे भाई प्रवीण कुमार शाहजहांपुर के एसपी देहात के गनर हैं। शाहजहांपुर के थाना निगोही में चंद्रप्रकाश के भतीजे नौकरी करते हैं। दोनों सबसे पहले अस्पताल पहुंचे। चंद्रप्रकाश की बहन शशि भी इटावा से आ गई। अर्चना के भाई सत्यप्रकाश गौतम भी आ गए। 
परीक्षा छोड़कर गांव जाएंगे बच्चे
-मयंक को अपने माता-पिता की चिता को मुखाग्नि देने के लिए गांव जाना है। इसलिए दोनों भाई बहन मामा और बुआ के साथ गांव जा रहे हैं। मामा ने बताया कि 23 फरवरी से मयंक की परीक्षा शुरू हो रही है। अभी तो हम लोग दोनों भाई बहन को साथ लेकर जा रहे है। आगे देखते हैं। प्रार्थना पत्र देकर प्रधानाचार्य से बात की जाएगी।  

दंपति की मौत से कॉलोनी में शोक
-सेंट्रल जेल की आवासीय कॉलोनी में बंदीरक्षक और उनकी पत्नी की मौत से कोहराम मचा हुआ है। रात को ही जिसने सुना वह मौके की तरफ दौड़ गया। कॉलोनी की महिलाओं का एन-ब्लाक के सामने हुजूम लगा रहा। चंद्रपाल की बहन को रोते-बिलखते सभी के आंसू निकल आए।  
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed