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Noida News: बच्ची की हत्या के आरोपी का शव लेने से परिजनों ने किया इंकार
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फोटो
-पुलिस के मनाने पर भाई को सौंपा शव, सेक्टर-94 के अंतिम निवास में हुआ अंतिम संस्कार
-आरोपी के साथी तौसीफ की तलाश जारी, पुलिस उसके ठिकानों पर दे रही दबिश दोनों की दोस्ती जेल में हुई थी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के आरोपी बलराज उर्फ बल्ला के शव का रविवार को सेक्टर-94 में पोस्टमॉर्टम कराया गया। घटना के बाद आरोपी के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। हालांकि पुलिस ने परिजनों को समझाया और आरोपी के भाई अशोक को शव सौंपा। बाद में सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस मामले में आरोपी को पनाह देने और घटना में उसकी मदद करने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि जिस मकान में बच्ची की हत्या की गई, वह आरोपी के साथी तौसीफ का है। तौसीफ और बलराज की दोस्ती जेल में हुई थी। घटना के बाद से तौसीफ फरार है। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
करीब छह से सात महीने पहले घोड़ा चोरी के एक मामले में आरोपी बलराज जेल गया था। इस दौरान तौसीफ के पिता ने उसकी जमानत कराई थी। इसके बाद दोनों की नजदीकियां और बढ़ गईं। करीब तीन माह पहले से बलराज हल्दौनी मोड़ स्थित तौसीफ के घर आने-जाने लगा था। वह कई-कई दिन वहां रुकता था और तौसीफ की डेयरी पर काम भी करता था।तौसीफ पर भी लूट, चोरी और छेड़खानी समेत कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस उसके आपराधिक इतिहास के साथ-साथ बलराज से उसके संबंध और घटना में उसकी संभावित भूमिका की जांच कर रही है।
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हत्या के पुराने मामलों में भी आरोपी रहा बलराज : बलराज का आपराधिक इतिहास पुराना है। वर्ष 2006 में गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में एक व्यक्ति की हत्या के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि शराब पिलाने के बाद उसने नशे की हालत में व्यक्ति की गला दबाकर हत्या कर दी थी। गाजियाबाद जिला अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई थी। डासना जेल में करीब आठ वर्ष रहने के बाद वह बाहर आया था। जेल से रिहा होने के बाद उसने ग्रेटर नोएडा को अपना ठिकाना बना लिया। मूल रूप से बुलंदशहर का रहने वाला बलराज बाद में सूरजपुर थाना क्षेत्र के तिलपता में रहने लगा। वह मजदूरी कर अपना गुजारा करता था। परिजनों से दूरी और नशे की लत के कारण उसका परिवार से संपर्क भी कम हो गया था।
बुजुर्ग महिला और बच्चे की निर्मम तरीके से की थी हत्या : वर्ष 2017 में सूरजपुर थाना क्षेत्र में एक 70 वर्षीय महिला की हत्या का मामला सामने आया था। महिला के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसी वर्ष 16 अक्तूबर को बाजार में सब्जी खरीदने आए एक बच्चे के लापता होने का मामला सामने आया। बाद में बच्चे का शव खेत से बरामद हुआ। पुलिस ने जांच के बाद बलराज को गिरफ्तार किया था। इन मामलों में जेल और 2024 में जमानत के बाद वह दोबारा मजदूरी करने लगा था। ग्रामीणों के अनुसार बलराज बचपन से ही गलत संगत में पड़ गया था। बाद में उसे शराब और अन्य नशीले पदार्थों की लत लग गई। उसकी हरकतों से परेशान होकर उसे गांव से अलग-थलग कर दिया गया था।
परिवार ने भी बना ली थी दूरी : आरोपी के पिता का दूध का कारोबार था। उसके तीन भाई थे। पारिवारिक विवादों और बलराज के व्यवहार के कारण उसके भाई भी उससे दूरी बनाने लगे थे। आरोपी के एक भाई की शादी हुई थी, जबकि अन्य भाई भी बाद में गांव छोड़कर चले गए। बलराज के पिता की वर्ष 1990 और मां की वर्ष 1999 में मौत हो गई थी। गांव छोड़ने से पहले बलराज ने पैतृक मकान गांव के ही एक व्यक्ति को बेच दिया था। वर्तमान में वह मकान खंडहर में तब्दील हो चुका है।
बच्ची आरोपी को कहती थी अंकल : मासूम बच्ची के परिजनों के मुताबिक, बच्ची आरोपी बलराज को पहचानती थी और उसे अंकल कहकर बुलाती थी। वह रोज उसे देखकर नमस्ते करती थी। बताया गया कि बलराज बच्ची के पड़ोस में किराये पर रहता था। इसी वजह से बच्ची और उसके बीच परिचय था।
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-पुलिस के मनाने पर भाई को सौंपा शव, सेक्टर-94 के अंतिम निवास में हुआ अंतिम संस्कार
-आरोपी के साथी तौसीफ की तलाश जारी, पुलिस उसके ठिकानों पर दे रही दबिश दोनों की दोस्ती जेल में हुई थी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के आरोपी बलराज उर्फ बल्ला के शव का रविवार को सेक्टर-94 में पोस्टमॉर्टम कराया गया। घटना के बाद आरोपी के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। हालांकि पुलिस ने परिजनों को समझाया और आरोपी के भाई अशोक को शव सौंपा। बाद में सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस मामले में आरोपी को पनाह देने और घटना में उसकी मदद करने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि जिस मकान में बच्ची की हत्या की गई, वह आरोपी के साथी तौसीफ का है। तौसीफ और बलराज की दोस्ती जेल में हुई थी। घटना के बाद से तौसीफ फरार है। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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करीब छह से सात महीने पहले घोड़ा चोरी के एक मामले में आरोपी बलराज जेल गया था। इस दौरान तौसीफ के पिता ने उसकी जमानत कराई थी। इसके बाद दोनों की नजदीकियां और बढ़ गईं। करीब तीन माह पहले से बलराज हल्दौनी मोड़ स्थित तौसीफ के घर आने-जाने लगा था। वह कई-कई दिन वहां रुकता था और तौसीफ की डेयरी पर काम भी करता था।तौसीफ पर भी लूट, चोरी और छेड़खानी समेत कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस उसके आपराधिक इतिहास के साथ-साथ बलराज से उसके संबंध और घटना में उसकी संभावित भूमिका की जांच कर रही है।
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हत्या के पुराने मामलों में भी आरोपी रहा बलराज : बलराज का आपराधिक इतिहास पुराना है। वर्ष 2006 में गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में एक व्यक्ति की हत्या के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि शराब पिलाने के बाद उसने नशे की हालत में व्यक्ति की गला दबाकर हत्या कर दी थी। गाजियाबाद जिला अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई थी। डासना जेल में करीब आठ वर्ष रहने के बाद वह बाहर आया था। जेल से रिहा होने के बाद उसने ग्रेटर नोएडा को अपना ठिकाना बना लिया। मूल रूप से बुलंदशहर का रहने वाला बलराज बाद में सूरजपुर थाना क्षेत्र के तिलपता में रहने लगा। वह मजदूरी कर अपना गुजारा करता था। परिजनों से दूरी और नशे की लत के कारण उसका परिवार से संपर्क भी कम हो गया था।
बुजुर्ग महिला और बच्चे की निर्मम तरीके से की थी हत्या : वर्ष 2017 में सूरजपुर थाना क्षेत्र में एक 70 वर्षीय महिला की हत्या का मामला सामने आया था। महिला के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसी वर्ष 16 अक्तूबर को बाजार में सब्जी खरीदने आए एक बच्चे के लापता होने का मामला सामने आया। बाद में बच्चे का शव खेत से बरामद हुआ। पुलिस ने जांच के बाद बलराज को गिरफ्तार किया था। इन मामलों में जेल और 2024 में जमानत के बाद वह दोबारा मजदूरी करने लगा था। ग्रामीणों के अनुसार बलराज बचपन से ही गलत संगत में पड़ गया था। बाद में उसे शराब और अन्य नशीले पदार्थों की लत लग गई। उसकी हरकतों से परेशान होकर उसे गांव से अलग-थलग कर दिया गया था।
परिवार ने भी बना ली थी दूरी : आरोपी के पिता का दूध का कारोबार था। उसके तीन भाई थे। पारिवारिक विवादों और बलराज के व्यवहार के कारण उसके भाई भी उससे दूरी बनाने लगे थे। आरोपी के एक भाई की शादी हुई थी, जबकि अन्य भाई भी बाद में गांव छोड़कर चले गए। बलराज के पिता की वर्ष 1990 और मां की वर्ष 1999 में मौत हो गई थी। गांव छोड़ने से पहले बलराज ने पैतृक मकान गांव के ही एक व्यक्ति को बेच दिया था। वर्तमान में वह मकान खंडहर में तब्दील हो चुका है।
बच्ची आरोपी को कहती थी अंकल : मासूम बच्ची के परिजनों के मुताबिक, बच्ची आरोपी बलराज को पहचानती थी और उसे अंकल कहकर बुलाती थी। वह रोज उसे देखकर नमस्ते करती थी। बताया गया कि बलराज बच्ची के पड़ोस में किराये पर रहता था। इसी वजह से बच्ची और उसके बीच परिचय था।