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सुन्नियों के अधिकारों का हनन है फतवे के खिलाफ रिपोर्ट
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:46 AM IST
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आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान की ओर से फतवा जारी करने के मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने पर खानवादा-ए-आला हजरत के सदस्यों ने शनिवार को एडीजी प्रेमप्रकाश से मिलकर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यह एफआईआर सुन्नी मुसलमानों के मौलिक अधिकारों का हनन है। आरोप लगाया कि फिरकापरस्त ताकतों के इशारे पर शरीयत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करके मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं भड़काई जा रही हैं।
आला हजरत खानदान के लोगों ने एडीजी से कहा कि काफी दिनों से तीन तलाक और इस्लाम के खिलाफ गलत बयानबाजी की जा रही है। कुरान और हदीस की रोशनी में फतवा देने वाले उलमा-ए-इकराम के खिलाफ अवैध ढंग से मुकदमे कायम किए जा रहे हैं। इससे सुन्नी मुसलमानों में आक्रोश फैल रहा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने एडीजी के सामने साफ किया कि जो फतवा दिया गया था, वह किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं था। यह हर उस मुसलमान के लिए था जो गलत बयानबाजी करता है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को उसके धर्म के अनुसार रहने और धार्मिक नियमों का पालन करने का अधिकार देता है। मगर इस तरह के झूठे मुकदमे लिखकर सुन्नी मुसलमानों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। एडीजी के पास पहुंचे लोगों में नबीरे आला हजरत मौलाना अफरोज रजा कादरी, अंजुम मियां, मौलाना तस्लीम रजा खां, उमर रजा खां, समनानी मियां, अदनान रजा कादरी, उस्मान रजा खां, नदीम कुरैशी आदि शामिल थे।
यह था मामला
पिछले दिनों थाना बारादरी में आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान की तहरीर पर उनके पति शीरान रजा खां, मो. खुर्शीद आलम रजवी और काजी अफजल रजवी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि शीरान ने मो. खुर्शीद के जरिये काजी अफजल रजवी से निदा खान के खिलाफ फतवा जारी कराया। इसमें निदा को इस्लाम से खारिज करने, जिंदा न रहने देने, मौत के बाद किसी भी मुसलमान को जनाजे में न जाने का हुक्म और किसी भी कब्रिस्तान में मृत शीर को दफन न करने का हुक्म जारी किया गया था। निदा ने कहा था कि इसके कारण बरेलवी सुन्नी मुसलमान उनके दुश्मन हो गए हैं।
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आला हजरत खानदान के लोगों ने एडीजी से कहा कि काफी दिनों से तीन तलाक और इस्लाम के खिलाफ गलत बयानबाजी की जा रही है। कुरान और हदीस की रोशनी में फतवा देने वाले उलमा-ए-इकराम के खिलाफ अवैध ढंग से मुकदमे कायम किए जा रहे हैं। इससे सुन्नी मुसलमानों में आक्रोश फैल रहा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने एडीजी के सामने साफ किया कि जो फतवा दिया गया था, वह किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं था। यह हर उस मुसलमान के लिए था जो गलत बयानबाजी करता है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को उसके धर्म के अनुसार रहने और धार्मिक नियमों का पालन करने का अधिकार देता है। मगर इस तरह के झूठे मुकदमे लिखकर सुन्नी मुसलमानों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। एडीजी के पास पहुंचे लोगों में नबीरे आला हजरत मौलाना अफरोज रजा कादरी, अंजुम मियां, मौलाना तस्लीम रजा खां, उमर रजा खां, समनानी मियां, अदनान रजा कादरी, उस्मान रजा खां, नदीम कुरैशी आदि शामिल थे।
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यह था मामला
पिछले दिनों थाना बारादरी में आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान की तहरीर पर उनके पति शीरान रजा खां, मो. खुर्शीद आलम रजवी और काजी अफजल रजवी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि शीरान ने मो. खुर्शीद के जरिये काजी अफजल रजवी से निदा खान के खिलाफ फतवा जारी कराया। इसमें निदा को इस्लाम से खारिज करने, जिंदा न रहने देने, मौत के बाद किसी भी मुसलमान को जनाजे में न जाने का हुक्म और किसी भी कब्रिस्तान में मृत शीर को दफन न करने का हुक्म जारी किया गया था। निदा ने कहा था कि इसके कारण बरेलवी सुन्नी मुसलमान उनके दुश्मन हो गए हैं।
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