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अपनी जान बचाने को मां ने बेच दिया कलेजे का टुकड़ा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:49 AM IST
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बदायूं निवासी महिला ने अपने इलाज के रुपये न होने पर आशा के जरिये नवजात का सौदा कर दिया। बच्चा दे भी दिया गया लेकिन रुपयों को लेकर बात बिगड़ी तो बच्चा चोरी का आरोप लगा दिया। मामला पुलिस में पहुंचा और बच्चा वापस दिलाकर समझौता करा दिया गया। मगर इसके बाद महिला फिर पलट गई और दोबारा बच्चा उसी व्यक्ति को देने के लिए तैयार है।
बदायूं निवासी महिला का पति से अलगाव हुआ तो चार साल पहले वह दूसरे युवक के साथ पत्नी की तरह रहने लगी। कुछ दिन बदायूं में रहने के बाद वे लोग प्रेमनगर में बांके की छावनी में आकर किराए पर रहने लगे। करीब पांच महीने पहले दूसरा पति भी उसे छोड़कर गायब हो गई, मगर महिला उस समय गर्भवती थी। इसी प्रसव का समय आया तो पड़ोस की आशा उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंची, वहां सीजेरियन ऑपरेशन को कहा गया। इस पर महिला और आशा से बातचीत हो गई। महिला ने कहा कि दूसरा पति चला गया है तो वह बच्चा किसी को दे देगी लेकिन उसका इलाज करा दिया जाए। इसके बाद आशा ने महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया, वहां 11 जून को महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। तय शर्त के मुताबिक आशा ने वह बच्चा सैदपुर हाकिंस के एक किराना व्यापारी को दे दिया और किराना व्यापारी ने महिला के इलाज का पूरा खर्च उठाया। बच्चे के नामकरण में भी महिला शामिल हुई। इसके बाद एक बार बच्चा बीमार हुआ तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और वहां जरूरत पड़ने पर महिला ने बच्चे को दूध पिलाया और खून भी दिया। मगर इसके बाद महिला कुछ रुपयों की मांग करने लगी। इसको लेकर बात बिगड़ गई। इस पर महिला ने बच्चा चोरी करके बेचने की शिकायत कर दी। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने शुक्रवार को ही दोनों पक्षों को बुलाया और बच्चा महिला को वापस दिला दिया। मगर अब महिला फिर से किराना व्यापारी को देना चाहती है। महिला का कहना है कि किराना व्यापारी ने उसकी जान बचाई है।
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बदायूं निवासी महिला का पति से अलगाव हुआ तो चार साल पहले वह दूसरे युवक के साथ पत्नी की तरह रहने लगी। कुछ दिन बदायूं में रहने के बाद वे लोग प्रेमनगर में बांके की छावनी में आकर किराए पर रहने लगे। करीब पांच महीने पहले दूसरा पति भी उसे छोड़कर गायब हो गई, मगर महिला उस समय गर्भवती थी। इसी प्रसव का समय आया तो पड़ोस की आशा उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंची, वहां सीजेरियन ऑपरेशन को कहा गया। इस पर महिला और आशा से बातचीत हो गई। महिला ने कहा कि दूसरा पति चला गया है तो वह बच्चा किसी को दे देगी लेकिन उसका इलाज करा दिया जाए। इसके बाद आशा ने महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया, वहां 11 जून को महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। तय शर्त के मुताबिक आशा ने वह बच्चा सैदपुर हाकिंस के एक किराना व्यापारी को दे दिया और किराना व्यापारी ने महिला के इलाज का पूरा खर्च उठाया। बच्चे के नामकरण में भी महिला शामिल हुई। इसके बाद एक बार बच्चा बीमार हुआ तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और वहां जरूरत पड़ने पर महिला ने बच्चे को दूध पिलाया और खून भी दिया। मगर इसके बाद महिला कुछ रुपयों की मांग करने लगी। इसको लेकर बात बिगड़ गई। इस पर महिला ने बच्चा चोरी करके बेचने की शिकायत कर दी। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने शुक्रवार को ही दोनों पक्षों को बुलाया और बच्चा महिला को वापस दिला दिया। मगर अब महिला फिर से किराना व्यापारी को देना चाहती है। महिला का कहना है कि किराना व्यापारी ने उसकी जान बचाई है।
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