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बड़ी बहन से कम नंबर आए तो जहर खाकर कर ली खुदकुशी
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बरेली। ज्यादा नंबर लाने की होड़ में एक होनहार छात्रा अपनी जिंदगी ही हार बैठी। यूपी बोर्ड के हाईस्कूल के एग्जाम में बड़ी बहन के 87 प्रतिशत नंबर का रिकॉर्ड तोड़ने का पहले से एलान करने के बावजूद जब इसमें नाकाम रही तो दिल ऐसा टूटा कि सल्फास की गोलियां खा लीं। दम तोड़ने से पहले उसने अपने मम्मी-पापा से अपना दर्द बयान कर माफी भी मांगी। शहर की दुर्गानगर कॉलोनी में हुई इस घटना के बारे में पता लगा तो आसपड़ोस के लोग भी सकते में आ गए।
नंबरों के खेल में जिंदगी हारी अंजलि भुता के गांव मुड़िया जगरूप में रहने वाले नरेश गंगवार की बेटी थी जो काफी समय से शहर की दुर्गानगर कॉलोनी में रह रहे हैं। नरेश की बड़ी बेटी अंजलि बीटेक कर रही है। चार साल पहले उसने हाईस्कूल की परीक्षा में 87 फीसदी अंक पाए थे। अंजलि की छोटी बहन हिमांशी भी होनहार थी। 27 अप्रैल को हिमांशी का हाईस्कूल का रिजल्ट आया जिसमें उसे 82 फीसदी ही अंक मिले। रिजल्ट आने के बाद से हिमांशी गुमसुम हो गई। परिवार के लोगों ने उससे इस की वजह भी पूछी, लेकिन उसने किसी से अपने मन की बात साझा नहीं की।
घरवालों के मुताबिक बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे अंजलि अपने कमरे में पढ़ रही थी और छोटा भाई अक्षय घर के बाहर बनी स्टेशनरी शॉप पर था। इसी बीच हिमांशी ने बदहजमी की बात कहकर मां लज्जा को नींबू लाने भेज दिया और घर पर गेहूं की बोरियों में रखी सल्फास निकालकर खा ली। कुछ मिनट बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, लेकिन घरवाले कुछ समझ नहीं पाए। नरेश ने हिमांशी को अस्पताल में भर्ती कराया मगर रात दो बजे उसने दम तोड़ दिया।
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पापा बहुत मेहनत की फिर भी नंबर कम रह गए
अस्पताल में दम तोड़ने से पहले हिमांशी ने डॉक्टरों के सामने ही पिता से अपना दर्द साझा किया। कांपती आवाज में बोली, उसने अपनी सहेलियों से कह रखा था कि वह हाईस्कूल में अंजलि दीदी से ज्यादा नंबर लाकर दिखाएगी। उसने बहुत मेहनत की लेकिन फिर भी पांच परसेंट नंबर कम रह गए। रिजल्ट आने के बाद से ही उसे आत्मग्लानि हो रही थी। किसी के सामने जाने का मन नहीं हो रहा था, इसीलिए उसने जहर खा लिया। उसने अपने मम्मी-पापा से माफ कर देने को भी कहा। इंस्पेक्टर बारादरी केवी सिंह ने बताया कि आत्महत्या का मामला है, शव पोस्टमार्टम के बाद परिवार को दे दिया गया है।
अहसास तक नहीं हुआ उसके मन में क्या
हिमांशी की मौत से बुरी तरह आहत चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके चावला के यहां काम करने वाले उसके पिता नरेश गंगवार ने बताया कि उन्होंने अपनी दोनों बेटियों को कभी बेटे से कम नहीं समझा। बड़ी बेटी ने पड़ोस के सूरजमुखी इंटर कॉलेज से पढ़ाई की थी तो छोटी हिमांशी को उसके कहने पर सूरजभान गर्ल्स इंटर कॉलेज राजेंद्र नगर में एडमिशन दिलाया था। हाईस्कूल का रिजल्ट आने के बाद से हिमांशी कुछ चुपचाप थी पर उसने किसी को बताया कुछ नहीं था। किसी ने उसे बड़ी बहन से कम नंबर लाने पर टोका भी नहीं था। पता नहीं क्यों वह इतनी सी बात पर खुदकुशी का इरादा कर बैठी।
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नंबरों के खेल में जिंदगी हारी अंजलि भुता के गांव मुड़िया जगरूप में रहने वाले नरेश गंगवार की बेटी थी जो काफी समय से शहर की दुर्गानगर कॉलोनी में रह रहे हैं। नरेश की बड़ी बेटी अंजलि बीटेक कर रही है। चार साल पहले उसने हाईस्कूल की परीक्षा में 87 फीसदी अंक पाए थे। अंजलि की छोटी बहन हिमांशी भी होनहार थी। 27 अप्रैल को हिमांशी का हाईस्कूल का रिजल्ट आया जिसमें उसे 82 फीसदी ही अंक मिले। रिजल्ट आने के बाद से हिमांशी गुमसुम हो गई। परिवार के लोगों ने उससे इस की वजह भी पूछी, लेकिन उसने किसी से अपने मन की बात साझा नहीं की।
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घरवालों के मुताबिक बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे अंजलि अपने कमरे में पढ़ रही थी और छोटा भाई अक्षय घर के बाहर बनी स्टेशनरी शॉप पर था। इसी बीच हिमांशी ने बदहजमी की बात कहकर मां लज्जा को नींबू लाने भेज दिया और घर पर गेहूं की बोरियों में रखी सल्फास निकालकर खा ली। कुछ मिनट बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, लेकिन घरवाले कुछ समझ नहीं पाए। नरेश ने हिमांशी को अस्पताल में भर्ती कराया मगर रात दो बजे उसने दम तोड़ दिया।
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पापा बहुत मेहनत की फिर भी नंबर कम रह गए
अस्पताल में दम तोड़ने से पहले हिमांशी ने डॉक्टरों के सामने ही पिता से अपना दर्द साझा किया। कांपती आवाज में बोली, उसने अपनी सहेलियों से कह रखा था कि वह हाईस्कूल में अंजलि दीदी से ज्यादा नंबर लाकर दिखाएगी। उसने बहुत मेहनत की लेकिन फिर भी पांच परसेंट नंबर कम रह गए। रिजल्ट आने के बाद से ही उसे आत्मग्लानि हो रही थी। किसी के सामने जाने का मन नहीं हो रहा था, इसीलिए उसने जहर खा लिया। उसने अपने मम्मी-पापा से माफ कर देने को भी कहा। इंस्पेक्टर बारादरी केवी सिंह ने बताया कि आत्महत्या का मामला है, शव पोस्टमार्टम के बाद परिवार को दे दिया गया है।
अहसास तक नहीं हुआ उसके मन में क्या
हिमांशी की मौत से बुरी तरह आहत चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके चावला के यहां काम करने वाले उसके पिता नरेश गंगवार ने बताया कि उन्होंने अपनी दोनों बेटियों को कभी बेटे से कम नहीं समझा। बड़ी बेटी ने पड़ोस के सूरजमुखी इंटर कॉलेज से पढ़ाई की थी तो छोटी हिमांशी को उसके कहने पर सूरजभान गर्ल्स इंटर कॉलेज राजेंद्र नगर में एडमिशन दिलाया था। हाईस्कूल का रिजल्ट आने के बाद से हिमांशी कुछ चुपचाप थी पर उसने किसी को बताया कुछ नहीं था। किसी ने उसे बड़ी बहन से कम नंबर लाने पर टोका भी नहीं था। पता नहीं क्यों वह इतनी सी बात पर खुदकुशी का इरादा कर बैठी।