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राम बरात में बवाल का मामला- बवाल वाली जगह पर जुटे लोग, समझौते की कवायद
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बरेली। राम बरात के दौरान मुर्गे वाली गली में हुए बवाल को लेकर समझौते को कवायद शुरू हुई है। शनिवार को गली में दोनों समुदाय के लोगों की बैठक हुई और साथ मिलकर रहने की बात कही। तय हुआ कि पुलिस से मिलकर मामला खत्म करने को कहेंगे लेकिन थाना पुलिस बैठक की जानकारी पर ही भड़क गई।
तंजीम उलमा ए इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के समक्ष दोनों समुदायों के लोगों ने मुर्गे वाली गली में बैठकर 20 मार्च की घटना पर रोष जताया। कहा, यह घटना कुछ बाहरी असामाजिक तत्वों की कारस्तानी से हुई। स्थानीय लोगों का कोई मतलब नहीं था। सभी मिलकर रहते हैं और कभी आपस में विवाद नहीं हुआ। दोनों ही पक्ष चाहते हैं कि मामला खत्म हो। पुलिस अधिकारियों से मिलकर समझौतानामा दिया जाएगा। इसमें मुस्लिम पक्ष की ओर से समाजसेवी शाहिद खां, यूसुफ, मुन्ना, समीन, इरफान और हिंदू पक्ष से संगम सक्सेना, राकेश राणा, रोशनलाल, जयप्रकाश राजपूत, ओमबाबू, राजीव कन्नौजिया आदि मौजूद थे। इसके बाद मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि जनता ने समझौता कर लिया है, अब आगे पुलिस को फैसला लेना है।
भड़की पुलिस..
बैठक के अंतिम समय में बारादरी थाने के कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और पुलिस को सूचना दिए बिना विवादित स्थल पर एकत्र होने को लेकर नाराजगी जताई। कहा, दोबारा बवाल या हंगामा हो जाता तो क्या होता? मगर बाद में लोगों का सकारात्मक रुख देखकर पुलिस मौके से चली गई। वहीं, एसएसआई वेदप्रकाश गुप्ता का कहना है कि रिपोर्ट के बाद एक आरोपी को जेल भेज दिया गया तो बाहर-बाहर किए जा रहे समझौते की क्या तुक है। पुलिस के पास समझौते की कोई सूचना नहीं है।
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तंजीम उलमा ए इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के समक्ष दोनों समुदायों के लोगों ने मुर्गे वाली गली में बैठकर 20 मार्च की घटना पर रोष जताया। कहा, यह घटना कुछ बाहरी असामाजिक तत्वों की कारस्तानी से हुई। स्थानीय लोगों का कोई मतलब नहीं था। सभी मिलकर रहते हैं और कभी आपस में विवाद नहीं हुआ। दोनों ही पक्ष चाहते हैं कि मामला खत्म हो। पुलिस अधिकारियों से मिलकर समझौतानामा दिया जाएगा। इसमें मुस्लिम पक्ष की ओर से समाजसेवी शाहिद खां, यूसुफ, मुन्ना, समीन, इरफान और हिंदू पक्ष से संगम सक्सेना, राकेश राणा, रोशनलाल, जयप्रकाश राजपूत, ओमबाबू, राजीव कन्नौजिया आदि मौजूद थे। इसके बाद मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि जनता ने समझौता कर लिया है, अब आगे पुलिस को फैसला लेना है।
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भड़की पुलिस..
बैठक के अंतिम समय में बारादरी थाने के कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और पुलिस को सूचना दिए बिना विवादित स्थल पर एकत्र होने को लेकर नाराजगी जताई। कहा, दोबारा बवाल या हंगामा हो जाता तो क्या होता? मगर बाद में लोगों का सकारात्मक रुख देखकर पुलिस मौके से चली गई। वहीं, एसएसआई वेदप्रकाश गुप्ता का कहना है कि रिपोर्ट के बाद एक आरोपी को जेल भेज दिया गया तो बाहर-बाहर किए जा रहे समझौते की क्या तुक है। पुलिस के पास समझौते की कोई सूचना नहीं है।
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