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तीन साल में 100 से ज्यादा बच्चे लापता, लेकिन पुलिस की नजर में कोई गैंग नहीं चुरा रहा बच्चा

Tue, 19 Feb 2019 01:52 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Tue, 19 Feb 2019 01:52 AM IST
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तीन साल में 100 से ज्यादा बच्चे लापता, लेकिन पुलिस की नजर में कोई गैंग नहीं चुरा रहा बच्चा
बरेली। विजय जैसे शातिरों को नशेड़ी या पागल समझकर छोड़ने का खामियाजा मासूम बच्चे और उनके अभिभावक भुगतते हैं। पिछले तीन साल में करीब सौ बच्चे लापता हुए जिनमें से करीब तीस आज तक अपने घर नहीं लौटे हैं। लेकिन पुलिस के रिकार्ड में कोई बच्चा चोर गैंग नहीं है।
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पुलिस रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 2017 में कुल 56 बच्चे लापता हुए। इनमें से 36 बालक और 20 बच्चियां थीं। साल के अंत तक 42 बच्चे बरामद हो गए जबकि 14 का अभी पता नहीं लग सका है। 2018 में कुल 37 बच्चों के गायब होने का ब्योरा है। इनमें 25 लड़के और 12 बच्चियां थीं। इनमें से 28 बच्चे मिल गए जबकि नौ का सुराग नहीं मिल सका है। इस साल करीब पांच बच्चे लापता हैं जिनकी गुमशुदगी संबंधित थानों में दर्ज है। डीसीआरबी के पास इनमें से केवल तीन का ही ब्यौरा है। जिले की पुलिस के रिकार्ड में कोई बच्चा चोर गैंग दर्ज नहीं है।
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थानेदार-दरोगा के ट्रांसफर संग दफन हो जाते हैं बच्चा चोरी के मामले
विजय के पुराने मुकदमे का रिकार्ड खोजने में पसीने छूटे
बरेली। जिले में बच्चा चोरी के तमाम मामले होते हैं पर गिरोह तलाशना तो दूर पुलिस अपना रिकार्ड भी मेंटेन नहीं रख पाती। खुद विजय जिस मामले में जेल काटकर आया, उसका रिकार्ड बारादरी थाने और कोतवाली की पुलिस नहीं खोज पा रही। पिछली साल फरवरी में चार बच्चों को एक साथ चुराने के मामले में उसे पकड़ा गया था। उसके खिलाफ चार्जशीट लगी और सितंबर में उसकी जमानत हुई। तब से अब तक थाना प्रभारी से लेकर दरोगा तक बदल गए। सोमवार को बारादरी प्रभारी कृष्णवीर सिंह और विवेचक नसीम खां रिकार्ड पलटते रहे।
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बिना प्रभारी चल रही बाल तस्करी रोकने की इकाई
बाल तस्करी और देह व्यापार पर रोक लगाने के लिए हर जिला मुख्यालय पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट खोली गई थी। यहां एसएसपी कार्यालय में इसका दफ्तर है। कहने को यहां जीडी, मुंशी से लेकर थाने जैसी हर व्यवस्था है लेकिन उपलब्धि कोई नहीं है। बच्चों की गुमशुदगी के बरसों पुराने दो-तीन केस की विवेचना चल रही है। यूनिट खुद कोई अभियान नहीं चलाती और न ही कोई नया मामला दर्ज करती है। यहां केवल थानों से ट्रांसफर मामले आते हैं। यूनिट प्रभारी इशाक हुसैन का बदायूं ट्रांसफर हो गया है तो पहले से आरामतलब स्टाफ की और चांदी हो गई है। कोई छुट्टी पर है तो कोई ड्यूटी पर रहकर आराम फरमा रहा है।


‘विजय के खिलाफ रिपोर्ट लिखकर उसे जेल भेजा है। बारादरी पुलिस को निर्देश दिए हैं कि ठोस साक्ष्य जुटाकर चार्जशीट लगाए। बच्चा चोरी करने वाले किसी गिरोह की गतिविधि जिले में नहीं है। हां, समय-समय पर जो बच्चे लापता होते हैं उनकी रिपोर्ट लिखकर सजगता से उन्हें खोजा जाता है। हाल ही में खुद घर से गए कई बच्चे लौट आए। लापता बच्चों की तलाश की जा रही है।’
- मुनिराज जी. एसएसपी
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