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बवाल के डर से सहमी पुलिस, अंत्येष्टि तक ली टोह
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बरेली। दो एनकाउंटर के बाद जाम या बवाल की आशंका से पुलिस बुरी तरह सहमी रही। पुलिस ने बरेली से संभल तक लोकेशन लेने के साथ ही अंत्येष्टि तक पूरी निगरानी की। रात भर गांवों में पुलिस के साथ पीएसी ने भी कैंप किया।
संभल के असमोली थाने के गांव एचवाड़ा निवासी कपिल चौधरी और उसके पड़ोसी गांव चितावली के मूल निवासी व गाजियाबाद में रहकर ड्राइवरी कर रहे अशोक वाल्मीकि की बरेली पुलिस के साथ सोमवार दोपहर हुई कथित मुठभेड़ में मौत हो गई। मंगलवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। देर शाम तक प्रक्रिया पूरी की गई। करीब छह बजे कपिल तो करीब सात बजे अशोक का शव उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया। कपिल के भाई सुरेंद्र के मुताबिक पुलिस ने जानबूझकर शव देर से और अलग समय पर सौंपे। पुलिस को डर था कि कहीं एनकाउंटर से गुस्साए परिवार वाले सड़क पर शव रखकर जाम न लगा दें या कोई और मुसीबत न पैदा कर दें। रास्ते भर पुलिस उनकी एंबुलेंस के ड्राइवर को कॉल करके लोकेशन पूछती रही। रास्ते के शहरों में चौराहों पर रोककर पुलिस ने टोह ली। रात में गांव पहुंचे तो दो गाड़ियों में पुलिस और दो गाड़ियों में पीएसी गांव में तैनात मिली। हालांकि पुलिसवाले उनके घर से काफी दूर ही रहे। उनके मिलने वालों को असमोली थाना प्रभारी लगातार कॉल करके टोह लेते रहे और कहा गया कि कई हंगामा या कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। सुबह तिगरी घाट पर कपिल की तो चितावली में अशोक की अंत्येष्टि की गई। पुलिस दूर से निगरानी करती रही। अशोक के पिता छोटे ने कहा कि वह हंगामा या बखेड़ा बिल्कुल नहीं करेंगे। कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। पहले सरकार से मांग करेंगे, बाद में आयोग और कोर्ट का सहारा लेंगे।
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संभल के असमोली थाने के गांव एचवाड़ा निवासी कपिल चौधरी और उसके पड़ोसी गांव चितावली के मूल निवासी व गाजियाबाद में रहकर ड्राइवरी कर रहे अशोक वाल्मीकि की बरेली पुलिस के साथ सोमवार दोपहर हुई कथित मुठभेड़ में मौत हो गई। मंगलवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। देर शाम तक प्रक्रिया पूरी की गई। करीब छह बजे कपिल तो करीब सात बजे अशोक का शव उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया। कपिल के भाई सुरेंद्र के मुताबिक पुलिस ने जानबूझकर शव देर से और अलग समय पर सौंपे। पुलिस को डर था कि कहीं एनकाउंटर से गुस्साए परिवार वाले सड़क पर शव रखकर जाम न लगा दें या कोई और मुसीबत न पैदा कर दें। रास्ते भर पुलिस उनकी एंबुलेंस के ड्राइवर को कॉल करके लोकेशन पूछती रही। रास्ते के शहरों में चौराहों पर रोककर पुलिस ने टोह ली। रात में गांव पहुंचे तो दो गाड़ियों में पुलिस और दो गाड़ियों में पीएसी गांव में तैनात मिली। हालांकि पुलिसवाले उनके घर से काफी दूर ही रहे। उनके मिलने वालों को असमोली थाना प्रभारी लगातार कॉल करके टोह लेते रहे और कहा गया कि कई हंगामा या कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। सुबह तिगरी घाट पर कपिल की तो चितावली में अशोक की अंत्येष्टि की गई। पुलिस दूर से निगरानी करती रही। अशोक के पिता छोटे ने कहा कि वह हंगामा या बखेड़ा बिल्कुल नहीं करेंगे। कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। पहले सरकार से मांग करेंगे, बाद में आयोग और कोर्ट का सहारा लेंगे।
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