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निवेशकों का पांच करोड़ समेटकर भागी फ्राड कंपनी
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बरेली। प्रेमनगर थाना क्षेत्र से साल भर पहले निवेशकों का करीब पांच करोड़ रुपया समेटकर भागी कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। 13 निवेशकों की तहरीर पर पुलिस ने डायरेक्टर समेत पांच के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
हाफिजगंज के गांव लाड़पुर निवासी यासीन मोहम्मद, मूलचंद, कामिल, बाबू, कृष्णपाल समेत तेरह लोगों ने प्रस्टीज इंफ्रा डेवलपर्स लिमिटेड और उसके परिवर्तित नाम वाली कंपनियों के खिलाफ यह रिपोर्ट कराई है। रिपोर्ट में लिखाया है कि वर्ष 2010 में प्रेमनगर के चौधरी कॉम्प्लेक्स के फर्स्ट फ्लोर पर कंपनी का ब्रांच ऑफिस खोला गया था। कंपनी के डायरेक्टर मुरादाबाद के रामगंगा विहार निवासी राजीव कुमार शर्मा, प्रतिष्ठा डेयरी रामपुर निवासी उनकी पत्नी वंदना शर्मा और इनके सहयोगी मुरादाबाद के ही निवासी पवन शर्मा, संजीव शर्मा व राजेंद्र कुमार आदि ने उन लोगों से संपर्क किया। बताया, कंपनी आरबीआई से पंजीकृत है और उनकी एक करोड़ सिक्योरिटी मनी भारत सरकार के पास जमा है। कंपनी एफडी, आरडी और प्लाटिंग में निवेश करती है। भरोसे में लेकर उन लोगों से 2010 से जनवरी 2018 तक अपना, परिवार और रिश्तेदारों का करीब पांच करोड़ रुपया निवेश करा दिया। अलग-अलग समय पर यह रुपया दोगुना या चार गुना करके देने का वादा था। मगर रुपये देनेे के समय कंपनी के अधिकारी बहाने बनाने लगे और फिर रातोंरात सामान समेटकर वे लोग फरार हो गए। निवेशकों के मुताबिक उस वक्त पुलिस ने उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी। वे लोग भी किसी न किसी जरिये से रकम वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे जो पूरी न हो सकी। इंस्पेक्टर प्रेमनगर ने बताया कि पुराना मामला है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर रिपोर्ट लिख ली गई है, बाकी जांच में स्पष्ट होगा।
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हाफिजगंज के गांव लाड़पुर निवासी यासीन मोहम्मद, मूलचंद, कामिल, बाबू, कृष्णपाल समेत तेरह लोगों ने प्रस्टीज इंफ्रा डेवलपर्स लिमिटेड और उसके परिवर्तित नाम वाली कंपनियों के खिलाफ यह रिपोर्ट कराई है। रिपोर्ट में लिखाया है कि वर्ष 2010 में प्रेमनगर के चौधरी कॉम्प्लेक्स के फर्स्ट फ्लोर पर कंपनी का ब्रांच ऑफिस खोला गया था। कंपनी के डायरेक्टर मुरादाबाद के रामगंगा विहार निवासी राजीव कुमार शर्मा, प्रतिष्ठा डेयरी रामपुर निवासी उनकी पत्नी वंदना शर्मा और इनके सहयोगी मुरादाबाद के ही निवासी पवन शर्मा, संजीव शर्मा व राजेंद्र कुमार आदि ने उन लोगों से संपर्क किया। बताया, कंपनी आरबीआई से पंजीकृत है और उनकी एक करोड़ सिक्योरिटी मनी भारत सरकार के पास जमा है। कंपनी एफडी, आरडी और प्लाटिंग में निवेश करती है। भरोसे में लेकर उन लोगों से 2010 से जनवरी 2018 तक अपना, परिवार और रिश्तेदारों का करीब पांच करोड़ रुपया निवेश करा दिया। अलग-अलग समय पर यह रुपया दोगुना या चार गुना करके देने का वादा था। मगर रुपये देनेे के समय कंपनी के अधिकारी बहाने बनाने लगे और फिर रातोंरात सामान समेटकर वे लोग फरार हो गए। निवेशकों के मुताबिक उस वक्त पुलिस ने उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी। वे लोग भी किसी न किसी जरिये से रकम वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे जो पूरी न हो सकी। इंस्पेक्टर प्रेमनगर ने बताया कि पुराना मामला है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर रिपोर्ट लिख ली गई है, बाकी जांच में स्पष्ट होगा।
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