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पैसे नहीं .. पके हुए चावल दे दो
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बरेली। आजकल हर कोई पैसे के पीछे दौड़ लगा रहा है। मगर उसे पैसे नहीं, पेट की आग बुझाने को रोटी या पके हुए चावल चाहिए। सड़क किनारे तन्हाई में बैठी यह वृद्धा कौन है, किसी को नहीं मालूम?
मैले कुचैले कपड़े पहने करीब 70 वर्षीय महिला पिछले दो सप्ताह से रिठौरा कस्बे से कुछ दूर एक इंजीनियरिंग कॉलेज के पास रोड किनारे बैठी है। गुरुवार शाम पीलीभीत से लौट रहीं प्रेमनगर निवासी समाजसेवी अनीता ने बुजुर्ग महिला को इस हालत में देखकर कार रुकवा ली। उन्होंने मदद के लिहाज से रुपये देने चाहे। इस पर बुजुर्ग महिला ने कहा- रुपये नहीं चाहिए, पके हुए चावल दे दो। एक व्यक्ति ने अपने घर से चावल लाकर दिए तो महिला ने खा लिए। अनीता के मुताबिक बुजुर्ग महिला अपना, नाम पता नहीं बता पा रही है। ज्यादा दबाव डालने पर बोली- उसने लठियाकर निकाल दिया। मैं नहीं जाऊंगी।
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मैले कुचैले कपड़े पहने करीब 70 वर्षीय महिला पिछले दो सप्ताह से रिठौरा कस्बे से कुछ दूर एक इंजीनियरिंग कॉलेज के पास रोड किनारे बैठी है। गुरुवार शाम पीलीभीत से लौट रहीं प्रेमनगर निवासी समाजसेवी अनीता ने बुजुर्ग महिला को इस हालत में देखकर कार रुकवा ली। उन्होंने मदद के लिहाज से रुपये देने चाहे। इस पर बुजुर्ग महिला ने कहा- रुपये नहीं चाहिए, पके हुए चावल दे दो। एक व्यक्ति ने अपने घर से चावल लाकर दिए तो महिला ने खा लिए। अनीता के मुताबिक बुजुर्ग महिला अपना, नाम पता नहीं बता पा रही है। ज्यादा दबाव डालने पर बोली- उसने लठियाकर निकाल दिया। मैं नहीं जाऊंगी।
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