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सिस्टम की गड़बड़ी ने ले ली दरोगा सिपाही की जान
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फतेहगंज पश्चिमी (बरेली)। सिस्टम की गड़बड़ी की वजह से दरोगा और सिपाही को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया। हाइवे के कट तक पहुंचने के लिए रामपुर हाईवे पर उल्टी दिशा में वाहन चलाना मजबूरी है। सही दिशा से जाने पर पचास मीटर की यह दूरी एक किमी से ज्यादा हो जाती है। वहीं रात में रामपुर दिशा से तेज रफ्तार में आने वाले वाहनों के ड्राइवर थाने की ओर से आने वाले वाहनों को नहीं देख पाते। यही वजह दरोगा और सिपाही की मौत की वजह बनी। पहले भी यहां हादसे होते रहे हैं।
रजनीश की बाइक से दोनों लोग हाईवे की उल्टी दिशा में लिंक मार्ग पर चलते हुए हाईवे पर पहुंचे थे। यहां से कट क्रास करके इन्हें बरेली रोड के ढाबे पर जाना था। इस बीच रामपुर दिशा से आई कार ने फतेहगंज पश्चिमी को बाईपास कर रहे हाईवे पर उनकी बाइक को उड़ा दिया। थाने में बैठे ड्राइवर ने भी अधिकारियों को यही बताया कि वह अचानक सामने आई बाइक को देख नहीं सका और कार करीब 120 की स्पीड से थी जो कंट्रोल नहीं हो सकी। जब तक कार में इमरजेंसी ब्रेक लगाए, देर हो चुकी थी। यहां बता दें कि थाने तक फरियादियों का आना-जाना अक्सर दिन में होता है और रात में पुलिस गाड़ी से आवाजाही करते वक्त एहतियात बरतती है। इसके बावजूद यहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। मोड़ से राधाकृष्ण मंदिर तक का एरिया एक्सीडेंट जोन बना हुआ है जिस पर लोगों की पहले भी मौत हो चुकी है।
कांस्टेबल से भर्ती होकर बने थे दरोगा
दरोगा राजवीर सिंह यादव किसान परिवार के बेटे थे जो वर्ष 1989 में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद कई जिलों में तैनाती रही। वर्ष 2016 में उन्हें दरोगा पद पर प्रमोशन मिल गया। मार्च में वह शाहजहांपुर से बरेली पुलिस लाइन में ट्रांसफर पर आए थे। तभी यहां तैनाती मिल गई। राजवीर के साथी दरोगा रजनीश कुमार यहां किला थाने की मलूकपुर चौकी के प्रभारी हैं। रजनीश कुमार भी अपने पड़ोसी और साथ में भर्ती हुए राजवीर की मौत की खबर सुनकर जिला अस्पताल आ गए। बताया कि राजवीर की एक बेटी और दो बेटे हैं। धामपुर में मकान बना है जहां उनकी पत्नी रहती हैं। दोनों के शव लेकर आए थाना प्रभारी राजकुमार तिवारी ने बताया कि दीवान रजनीश की तैनाती करीब दो साल से इसी थाने में थी। एक ही हलके से संबंधित होने के साथ ही दोनों बैरक में पास ही रहते थे। इसलिए अक्सर खाना खाने भी साथ जाते थे।
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जोरदार आवाज के बाद लग गई भीड़
हादसे के दौरान जोरदार आवाज हुई। बाइक तो चकनाचूर हो ही गई, कार के आगे का बंपर भी गायब हो गया। थोड़ी ही देर में मौके पर भारी भीड़ लग गई। सूचना पर एसपी देहात और सीओ पहुंच गए। देर रात एसएसपी मुनिराज जी भी मौके पर पहुंचे। काफी खोजने के बाद भी रजनीश का मोबाइल नहीं मिला।
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रजनीश की बाइक से दोनों लोग हाईवे की उल्टी दिशा में लिंक मार्ग पर चलते हुए हाईवे पर पहुंचे थे। यहां से कट क्रास करके इन्हें बरेली रोड के ढाबे पर जाना था। इस बीच रामपुर दिशा से आई कार ने फतेहगंज पश्चिमी को बाईपास कर रहे हाईवे पर उनकी बाइक को उड़ा दिया। थाने में बैठे ड्राइवर ने भी अधिकारियों को यही बताया कि वह अचानक सामने आई बाइक को देख नहीं सका और कार करीब 120 की स्पीड से थी जो कंट्रोल नहीं हो सकी। जब तक कार में इमरजेंसी ब्रेक लगाए, देर हो चुकी थी। यहां बता दें कि थाने तक फरियादियों का आना-जाना अक्सर दिन में होता है और रात में पुलिस गाड़ी से आवाजाही करते वक्त एहतियात बरतती है। इसके बावजूद यहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। मोड़ से राधाकृष्ण मंदिर तक का एरिया एक्सीडेंट जोन बना हुआ है जिस पर लोगों की पहले भी मौत हो चुकी है।
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कांस्टेबल से भर्ती होकर बने थे दरोगा
दरोगा राजवीर सिंह यादव किसान परिवार के बेटे थे जो वर्ष 1989 में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद कई जिलों में तैनाती रही। वर्ष 2016 में उन्हें दरोगा पद पर प्रमोशन मिल गया। मार्च में वह शाहजहांपुर से बरेली पुलिस लाइन में ट्रांसफर पर आए थे। तभी यहां तैनाती मिल गई। राजवीर के साथी दरोगा रजनीश कुमार यहां किला थाने की मलूकपुर चौकी के प्रभारी हैं। रजनीश कुमार भी अपने पड़ोसी और साथ में भर्ती हुए राजवीर की मौत की खबर सुनकर जिला अस्पताल आ गए। बताया कि राजवीर की एक बेटी और दो बेटे हैं। धामपुर में मकान बना है जहां उनकी पत्नी रहती हैं। दोनों के शव लेकर आए थाना प्रभारी राजकुमार तिवारी ने बताया कि दीवान रजनीश की तैनाती करीब दो साल से इसी थाने में थी। एक ही हलके से संबंधित होने के साथ ही दोनों बैरक में पास ही रहते थे। इसलिए अक्सर खाना खाने भी साथ जाते थे।
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जोरदार आवाज के बाद लग गई भीड़
हादसे के दौरान जोरदार आवाज हुई। बाइक तो चकनाचूर हो ही गई, कार के आगे का बंपर भी गायब हो गया। थोड़ी ही देर में मौके पर भारी भीड़ लग गई। सूचना पर एसपी देहात और सीओ पहुंच गए। देर रात एसएसपी मुनिराज जी भी मौके पर पहुंचे। काफी खोजने के बाद भी रजनीश का मोबाइल नहीं मिला।