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दहशत में सब, मुंह नहीं खोल रहा कोई
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बरेली। हॉस्टल में दरोगा रीना कुमारी की हत्या के बाद से पुलिस लाइन परिसर स्थित आवासों में रहने वाले पुलिस कर्मी और उनके परिवार वाले दहशत में हैं। मगर अफसरों के डर से कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है। हॉस्टल रहने वाले पुलिस कर्मियों के परिवार बुधवार को अपने आवासों में कैद रहे।
पुलिस लाइंस में चोरी, मारपीट और गाड़ियों में आग लगाने जैसी छोटी मोटी वारदातें होती रहती थीं। पुलिस लाइन स्थित हॉस्टल में दरोगा रीना की हत्या की खबर ने सबको दहला दिया। रीना ट्रांजिट हॉस्टल के जिस आवास में रहती थीं उसमें मंगलवार की रात ही ताला लगा दिया गया था। मंगलवार सुबह एडीजी के पहुंचने पर कुछ देर के लिए ताला खोला गया इसका बाद फिर बंद कर दिया गया। दिन में वहां आने जाने वालों पर नजर रखने के लिए एक सिपाही तैनात रहा। ट्रांजिट हॉस्टल परिसर में बुधवार को दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। केवल ड्यूटी आने जाने वाले पुलिस कर्मी बाहर निकले। हॉस्टल में रहने वाले पुलिस कर्मियों के आवासों के दरवाजे बंद रहे। बातचीत करने की कोशिश पर हर किसी एक लगभग एक जैसा जवाब था हमें कुछ नहीं मालूम। कुछ कहने का मतलब मुसीबत मोल लेना है। हॉस्टल से अलग पुलिस लाइन परिसर के एक आवास में रहने वाली महिला का कहना था कि इससे ज्यादा सुरक्षित जगह और कहां होगी? अब तो यहां भी मर्डर होने लगे। कुछ बोलो तो अफसरों की डांट सुनो।
एडीजी ने किया मौका मुआयना
एडीजी अविनाश चंद्र बुधवार सुबह करीब 10 बजे पुलिस लाइंस स्थित ट्रांजिट हॉस्टल पहुंचे। उन्होंने ताला खुलवाकर दरोगा रीना के आवास बारीकी से देखा। मौके पर मौजूद अफसरों से घटना के बारे में पूछताछ की। वहां आने जाने वालों पर नजर रखने को कहा। कुछ देर मौका मुआयना करने के बाद एडीजी रवाना हो गए।
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पुलिस लाइंस में चोरी, मारपीट और गाड़ियों में आग लगाने जैसी छोटी मोटी वारदातें होती रहती थीं। पुलिस लाइन स्थित हॉस्टल में दरोगा रीना की हत्या की खबर ने सबको दहला दिया। रीना ट्रांजिट हॉस्टल के जिस आवास में रहती थीं उसमें मंगलवार की रात ही ताला लगा दिया गया था। मंगलवार सुबह एडीजी के पहुंचने पर कुछ देर के लिए ताला खोला गया इसका बाद फिर बंद कर दिया गया। दिन में वहां आने जाने वालों पर नजर रखने के लिए एक सिपाही तैनात रहा। ट्रांजिट हॉस्टल परिसर में बुधवार को दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। केवल ड्यूटी आने जाने वाले पुलिस कर्मी बाहर निकले। हॉस्टल में रहने वाले पुलिस कर्मियों के आवासों के दरवाजे बंद रहे। बातचीत करने की कोशिश पर हर किसी एक लगभग एक जैसा जवाब था हमें कुछ नहीं मालूम। कुछ कहने का मतलब मुसीबत मोल लेना है। हॉस्टल से अलग पुलिस लाइन परिसर के एक आवास में रहने वाली महिला का कहना था कि इससे ज्यादा सुरक्षित जगह और कहां होगी? अब तो यहां भी मर्डर होने लगे। कुछ बोलो तो अफसरों की डांट सुनो।
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एडीजी ने किया मौका मुआयना
एडीजी अविनाश चंद्र बुधवार सुबह करीब 10 बजे पुलिस लाइंस स्थित ट्रांजिट हॉस्टल पहुंचे। उन्होंने ताला खुलवाकर दरोगा रीना के आवास बारीकी से देखा। मौके पर मौजूद अफसरों से घटना के बारे में पूछताछ की। वहां आने जाने वालों पर नजर रखने को कहा। कुछ देर मौका मुआयना करने के बाद एडीजी रवाना हो गए।
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