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एनएचएआई ने जमीन तो ले ली, मगर किसानों का करोड़ों का मुआवजा फंसा दिया
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बरेली। एनएचएआई ने हाईवे के चौड़ीकरण के लिए किसानों से भूमि का अधिग्रहण तो किया लेकिन करोड़ों रुपये का भुगतान अब तक फंसा रखा है। ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो रहा है। इसमें बरेली-सीतापुर, मुरादाबाद-बरेली और बरेली-पीलीभीत हाईवे के चौड़ीकरण के लिए ली गई भूमि अधिग्रहण के मामले शामिल हैं। पिछले दिनों इन मामलों को लेकर लोक निर्माण विभाग के सचिव ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट भी मांगी थी लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
एनएच-24 बरेली-मुरादाबाद हाईवे के चौड़ीकरण के लिए 24 ग्रामों में 70 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण एनएचएआई ने किया था। मुरादाबाद परियोजना कार्यालय के अधिकारियों ने पहले 19 गांवों में भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव उपलब्ध कराया था। इसे जिला प्रशासन को ट्रंासफर कराते हुए उसका ब्योरा अभिलेखों में भी दर्ज कराया जा चुका है। अब 24 गांवों में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होनी है। इसके लिए एनएचएआई को 37.25 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा किसानों को देना था लेकिन अब तक 31 करोड़ ही किसानों को दिए जा सके हैं। इसमें भी 30.28 करोड़ का भुगतान किया गया है। बाकी का मुआवजा पाने के लिए किसान भटक रहे हैं। इसी तरह बरेली-सीतापुर हाईवे के चौड़ीकरण के लिए 13 ग्रामों में 48 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इस जमीन के अधिग्रहण के बदले 11.23 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को करना था लेकिन अब तक करीब 8.84 करोड़ रुपये ही दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवशेष 2.29 करोड़ का भुगतान फरीदपुर तहसील में कैंप लगाकर निरंतर किया जा रहा है। दिक्कत यह है कि जिस रेट पर पेमेंट हो रहे हैं, तमाम किसान उसे लेकर संतुष्ट ही नहीं है। इसलिए भी यह मामला अटका हुआ है। इधर, बरेली-पीलीभीत हाईवे के चौड़ीकरण के लिए एनएचएआई ने 12 गांवों में 16.925 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। इसमें बरेली में पड़ने वाले छह गांवों के ग्रामीणों को करीब नौ करोड़ का मुआवजा देना था लेकिन इसमें से 8.71 करोड़ का ही पेमेंट हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि बाकी किसानों को भी भुगतान की कार्रवाई चल रही है।
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एनएच-24 बरेली-मुरादाबाद हाईवे के चौड़ीकरण के लिए 24 ग्रामों में 70 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण एनएचएआई ने किया था। मुरादाबाद परियोजना कार्यालय के अधिकारियों ने पहले 19 गांवों में भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव उपलब्ध कराया था। इसे जिला प्रशासन को ट्रंासफर कराते हुए उसका ब्योरा अभिलेखों में भी दर्ज कराया जा चुका है। अब 24 गांवों में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होनी है। इसके लिए एनएचएआई को 37.25 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा किसानों को देना था लेकिन अब तक 31 करोड़ ही किसानों को दिए जा सके हैं। इसमें भी 30.28 करोड़ का भुगतान किया गया है। बाकी का मुआवजा पाने के लिए किसान भटक रहे हैं। इसी तरह बरेली-सीतापुर हाईवे के चौड़ीकरण के लिए 13 ग्रामों में 48 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इस जमीन के अधिग्रहण के बदले 11.23 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को करना था लेकिन अब तक करीब 8.84 करोड़ रुपये ही दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवशेष 2.29 करोड़ का भुगतान फरीदपुर तहसील में कैंप लगाकर निरंतर किया जा रहा है। दिक्कत यह है कि जिस रेट पर पेमेंट हो रहे हैं, तमाम किसान उसे लेकर संतुष्ट ही नहीं है। इसलिए भी यह मामला अटका हुआ है। इधर, बरेली-पीलीभीत हाईवे के चौड़ीकरण के लिए एनएचएआई ने 12 गांवों में 16.925 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। इसमें बरेली में पड़ने वाले छह गांवों के ग्रामीणों को करीब नौ करोड़ का मुआवजा देना था लेकिन इसमें से 8.71 करोड़ का ही पेमेंट हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि बाकी किसानों को भी भुगतान की कार्रवाई चल रही है।
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