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बरेली में दो बार बेची गई असम की युवती, नाम भी बदला
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बरेली/शेरगढ़। असम की एक युवती पांच दिन से शेरगढ़ थाना पुलिस की अभिरक्षा में थी। बुधवार को आई असम पुलिस ने उसको अपनी अभिरक्षा में लेकर एसडीएम बहेड़ी कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे साथ ले जाने के आदेश जारी कर दिए गए। एसएसपी दफ्तर आई युवती ने अपने गांव से यहां तक आने और दिक्कतों के बारे में बताया।
शेरगढ़ के मोहल्ला टांडा निवासी होमगार्ड का बेटा 35 दिन से एक असम की युवती को पत्नी की तरह रख रहा था। शुक्रवार शाम वह घर से निकल आई। शनिवार को कस्बे में भटकती युवती को पूर्व चेयरमैन मोहम्मद हनीफ ने शेरगढ़ थाने छोड़ दिया। इसके बाद उसने अपने घर जाने की जिद पकड़ ली। भाषाई दिक्कत के साथ ही जानकारी में पता लगा कि युवती असम के धुबरी जिले की निवासी है। एसएसपी ने धुबरी के एसएसपी से संपर्क किया। तब वहां से उसके परिवार से संपर्क साधा गया। पता लगा कि पहले ही गुमशुदगी दर्ज है। तब असम पुलिस के इंस्पेक्टर सिमरन डोका के नेतृत्व में उसे लेने टीम बरेली रवाना हो गई। असम पुलिस जाने से पहले एसएसपी शैलेश पांडेय से मिलने बरेली आई। युवती भी साथ में आई। घर जाने से पहले वह काफी खुश थी।
नशा देकर ले आए.. रोती थी तो पीटते थे
पत्रकारों से बातचीत में युवती ने बताया कि बताया कि माता-पिता बीमार रहते हैं। वह गुवाहाटी में मजदूरी करती थी। वहां एक परिचित शख्स ईद के दो दिन बाद उसे नशा देकर बरेली लाया और यहां एक व्यक्ति को बेच दिया। वह शायद बिथरी का निवासी था। कुछ दिन बाद उस व्यक्ति ने उसे होमगार्ड के बेटे को चालीस हजार में बेच दिया। ये सब जानकारियां उसे इन लोगों के साथ रहते हुए हुईं। बिना कोई धर्म परिवर्तन किए उसे ये लोग दूसरे नाम से पुकारने लगे। बताया कि होमगार्ड के घर उसे कोई खास दिक्कत नहीं थी पर घरवालों की याद आने पर जब रोती थी तो उसे पीटा जाता था। इसीलिए वह घर जाने को निकल आई और कुछ लोग उसे थाने ले आए।
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होमगार्ड के बेटे को पुलिस की क्लीनचिट
शेरगढ़ पुलिस ने कई दिन से होमगार्ड के बेटे को थाने में बैठा रखा था। पुलिस को इंतजार था कि युवती कोर्ट में कहीं उसके खिलाफ बयान न दे दे। युवती ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की तो पुलिस ने उसे छोड़ दिया। खरीद फरोख्त को लेकर भी उस पर कार्रवाई नहीं की गई। एसओ सुरेंद्र सिंह का कहना था कि होमगार्ड के बेटे के खिलाफ न तो युवती ने थाने में और न ही कोर्ट में बयान दिया और न ही शिकायत की। वह केवल अपने घर जाना चाहती थी। एसपी देहात डॉ. संसार सिंह का कहना था कि युवती की गुमशुदगी का मामला पहले से असम पुलिस के पास दर्ज है। वहां की पुलिस चाहेगी तो इसमें बाद में भी कार्रवाई कर सकती है। यहां कोई आरोप या शिकायत नहीं है।
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शेरगढ़ के मोहल्ला टांडा निवासी होमगार्ड का बेटा 35 दिन से एक असम की युवती को पत्नी की तरह रख रहा था। शुक्रवार शाम वह घर से निकल आई। शनिवार को कस्बे में भटकती युवती को पूर्व चेयरमैन मोहम्मद हनीफ ने शेरगढ़ थाने छोड़ दिया। इसके बाद उसने अपने घर जाने की जिद पकड़ ली। भाषाई दिक्कत के साथ ही जानकारी में पता लगा कि युवती असम के धुबरी जिले की निवासी है। एसएसपी ने धुबरी के एसएसपी से संपर्क किया। तब वहां से उसके परिवार से संपर्क साधा गया। पता लगा कि पहले ही गुमशुदगी दर्ज है। तब असम पुलिस के इंस्पेक्टर सिमरन डोका के नेतृत्व में उसे लेने टीम बरेली रवाना हो गई। असम पुलिस जाने से पहले एसएसपी शैलेश पांडेय से मिलने बरेली आई। युवती भी साथ में आई। घर जाने से पहले वह काफी खुश थी।
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नशा देकर ले आए.. रोती थी तो पीटते थे
पत्रकारों से बातचीत में युवती ने बताया कि बताया कि माता-पिता बीमार रहते हैं। वह गुवाहाटी में मजदूरी करती थी। वहां एक परिचित शख्स ईद के दो दिन बाद उसे नशा देकर बरेली लाया और यहां एक व्यक्ति को बेच दिया। वह शायद बिथरी का निवासी था। कुछ दिन बाद उस व्यक्ति ने उसे होमगार्ड के बेटे को चालीस हजार में बेच दिया। ये सब जानकारियां उसे इन लोगों के साथ रहते हुए हुईं। बिना कोई धर्म परिवर्तन किए उसे ये लोग दूसरे नाम से पुकारने लगे। बताया कि होमगार्ड के घर उसे कोई खास दिक्कत नहीं थी पर घरवालों की याद आने पर जब रोती थी तो उसे पीटा जाता था। इसीलिए वह घर जाने को निकल आई और कुछ लोग उसे थाने ले आए।
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होमगार्ड के बेटे को पुलिस की क्लीनचिट
शेरगढ़ पुलिस ने कई दिन से होमगार्ड के बेटे को थाने में बैठा रखा था। पुलिस को इंतजार था कि युवती कोर्ट में कहीं उसके खिलाफ बयान न दे दे। युवती ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की तो पुलिस ने उसे छोड़ दिया। खरीद फरोख्त को लेकर भी उस पर कार्रवाई नहीं की गई। एसओ सुरेंद्र सिंह का कहना था कि होमगार्ड के बेटे के खिलाफ न तो युवती ने थाने में और न ही कोर्ट में बयान दिया और न ही शिकायत की। वह केवल अपने घर जाना चाहती थी। एसपी देहात डॉ. संसार सिंह का कहना था कि युवती की गुमशुदगी का मामला पहले से असम पुलिस के पास दर्ज है। वहां की पुलिस चाहेगी तो इसमें बाद में भी कार्रवाई कर सकती है। यहां कोई आरोप या शिकायत नहीं है।