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दिव्यांग बेटी की शादी न होने के गम में फंदा लगाकर जान दे दी
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बिथरी चैनपुर। रामगंगा नगर कॉलोनी में एक व्यक्ति ने अपने घर में फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस के मुताबिक वह जरूरत से ज्यादा नशा करता था। मृतक के परिवार के लोगों का कहना है कि दिव्यांग बेटी की शादी न होने का गम सता रहा था, अवसाद की वजह से जान दी है।
बिथरी चैनपुर क्षेत्र के रामगंगा नगर कॉलोनी निवासी 45 वर्षीय रमेश चंद्र एक प्राइवेट होटल में वेटर थे। दस साल पहले उनकी पत्नी शाएबा ने गर्भावस्था के दौरान दम तोड़ दिया था। उनकी 17 वर्षीय बेटी और 15 वर्षीय बेटा है। तब से रमेश ही दोनों बच्चो को पाल रहे थे। रोज की तरह शुक्रवार रात वह दोनों को सुलाकर अंदर वाले कमरे में चले गए। कमरा अंदर से बंद कर लिया। वहां पंखे के सहारे चादर का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। सुबह जब काफी देर बाद भी कमरा नहीं खुला तो उनके छोटे भाई नन्हे ने कई आवाजें लगाई। खिड़की से झांककर देख तो रमेश का शव लटका देखकर उनके होश उड़ गए। किसी तरह दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतार लिया गया। पड़ोसियों ने पुलिस को जानकारी देकर बुला लिया। जांच पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसमें लटकने से ही मौत की पुष्टि हुई। नन्हे ने बताया कि उनकी भतीजी दिव्यांग है। उनके भाई इसी तनाव में रहते थे उसकी शादी कैसे होगी। शायद इसीलिए उन्होंने आत्महत्या कर ली। दोनों बच्चों की परवरिश का जिम्मा अब उनके कंधों पर आ गया है।
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बिथरी चैनपुर क्षेत्र के रामगंगा नगर कॉलोनी निवासी 45 वर्षीय रमेश चंद्र एक प्राइवेट होटल में वेटर थे। दस साल पहले उनकी पत्नी शाएबा ने गर्भावस्था के दौरान दम तोड़ दिया था। उनकी 17 वर्षीय बेटी और 15 वर्षीय बेटा है। तब से रमेश ही दोनों बच्चो को पाल रहे थे। रोज की तरह शुक्रवार रात वह दोनों को सुलाकर अंदर वाले कमरे में चले गए। कमरा अंदर से बंद कर लिया। वहां पंखे के सहारे चादर का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। सुबह जब काफी देर बाद भी कमरा नहीं खुला तो उनके छोटे भाई नन्हे ने कई आवाजें लगाई। खिड़की से झांककर देख तो रमेश का शव लटका देखकर उनके होश उड़ गए। किसी तरह दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतार लिया गया। पड़ोसियों ने पुलिस को जानकारी देकर बुला लिया। जांच पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसमें लटकने से ही मौत की पुष्टि हुई। नन्हे ने बताया कि उनकी भतीजी दिव्यांग है। उनके भाई इसी तनाव में रहते थे उसकी शादी कैसे होगी। शायद इसीलिए उन्होंने आत्महत्या कर ली। दोनों बच्चों की परवरिश का जिम्मा अब उनके कंधों पर आ गया है।
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