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तो क्या फर्जी तरीके से जारी हुए थे सैकड़ों शस्त्र लाइसेंस!

Sat, 10 Aug 2019 01:58 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2019 01:58 AM IST
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crime
बरेली। फर्जीवाड़ा कर अलग-अलग जगहों से शस्त्र लाइसेंस जारी होने पर लगाम कसने के लिए वर्ष 2015 में आदेश जारी हुए थे कि सभी लाइसेंसों को 18 डिजिट वाले यूनिक नंबर से लिंक कर उन्हें आनलाइन किया जाए, जबकि सैकड़ों शस्त्रधारक अब तक इसके लिए शस्त्र अभिलेखागार में आए ही नहीं हैं। हाल में गृह मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद जिला प्रशासन ने यूनिक नंबर से कनेक्ट न होने वाले करीब चार हजार लाइसेंसधारकों को चिह्नित किया है। आशंका है कि इन लोगों ने कहीं फर्जी ढंग से शस्त्र लाइसेंस तो नहीं बनवाए थे जो अब पकड़े जाने के डर से पेश नहीं हो रहे। बताया जा रहा है कि इसमें से ज्यादातर अपने पते पर रहते हुए नहीं मिले हैं।
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पहले मैनुअल सिस्टम होने की वजह से पहले कोई अगर दो जगहों पर शस्त्र लाइसेंस जारी करा लेता था तो इस मामले को पकड़ना आसान नहीं था। इसके अलावा किसी ने अगर दूसरे राज्य में फर्जी तरीके से लाइसेंस बनवा लिया है और वो यहां लाइसेंस ट्रांसफर की अपील करता था तो भी इस क्रास चेकिंग मुमकिन नहीं थे। अगर यहां वह अवैध लाइसेंस रिकार्ड में चढ़ गया तो उसे फर्जी साबित नहीं किया जा सकता था। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सभी शस्त्र लाइसेंस को यूनिक नंबर से जोड़ने की कवायद शुरू की थी। इसके बाद जिले में भी 47800 लाइसेंसों को इस नंबर से लिंक करने के साथ उसे सरकारी वेबसाइट एनडीएएल पर अपलोड किया गया। करीब चार साल बाद गृह मंत्रालय से मांगी गई रिपोर्ट के बाद यह सामने आया है कि अभी तक 3828 लाइसेंसों को यूनिक नंबर से जोड़ा नहीं गया है। यूनिक नंबर को आनलाइन करने के लिए सरकारी वेबसाइट भी इस साल 31 मार्च को बंद हो चुकी है। इन शस्त्र लाइसेंसधारकों को सूचीबद्घ किया गया है। इन्हें जल्द ही निरस्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
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एक बोर के दो शस्त्र खरीद के लिए होता है लाइसेंस में खेल
-12 बोर की सिंगल और डबल बैरल, 315 बोर राइफल और रिवाल्वर व पिस्टल के लिए तीन लाइसेंस बनवाए जा सकते हैं लेकिन एक ही बोर वाले दो हथियारों की खरीद नहीं हो सकती है। इस प्रतिबंध को देखते हुए लोग फर्जी तरीके से कई लाइसेंस बनवाकर एक ही बैरल के कई शस्त्र खरीद लेते हैं।
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विधानसभा में उठा सवाल..मृतकों के कितने लाइसेंस मालखाने में जमा हैं
-शस्त्र लाइसेंस के संबंध में विधानसभा में सवाल उठा था। इसके बाद अपर आयुक्त प्रशासन अरुण कुमार ने मंडल के सभी डीएम से कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। जिलों में कितने मृतकों के लाइसेंस मालखाने में जमा हैं। जनवरी 2010 से 30 जून 2019 तक कितने मृतक और वारिसन के शस्त्र लाइसेंस आवेदन लंबित है। जिलों में व्यापारियों को वर्ष 2010 से जून 2019 तक कितने लाइसेंस जारी हुए हैं।


यूनिक नंबर से न जुड़ने वाले शस्त्र लाइसेंसधारकों को चिह्नित किया गया है। इनके खिलाफ क्या एक्शन लिया जाना है, सरकार के गाइड लाइंस के बाद ही इस पर कोई निर्णय होगा। -मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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