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आठ को हाईकोर्ट में अहलादपुर मुठभेड़ का देगी जवाब बरेली पुलिस

Sat, 03 Aug 2019 02:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2019 02:28 AM IST
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crime
बरेली। गुडवर्क की स्क्रिप्ट लिखते समय बरेली पुलिस इतनी जल्दबाजी करती है कि कहानी में झोल रह ही जाता है। कुछ ऐसा ही साल के शुरू में अहलादपुर मुठभेड़ मामले में हुआ था। पुलिस ने सराफ का सोना लूटने वाले कथित बदमाशों में से दो को मार गिराने का दावा किया था। इनमें एक पुराना अपराधी था और दूसरे का कोई खास रिकार्ड नहीं था। इस कथित मुठभेड़ को लेकर तब पुलिस की खासी फजीहत हुई। परिवार ने पुलिस ने खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाल रखी है जिसमें आठ अगस्त को पुलिस से जवाब तलब किया गया है।
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वाकया सात जनवरी का था। सराफ प्रदीप अग्रवाल का मुनीम ऑटो में पंद्रह लाख रुपये लेकर जा रहा था। कोहाड़ापीर के पास बदमाश उसे गोली मारकर रुपयों भरा बैग लूट ले गए। सुबह करीब पौने छह बजे हुई इस लूट की घटना के बाद दोपहर करीब ढाई बजे पुलिस की इज्जत नगर थाना क्षेत्र के अहलादपुर में बदमाशों से कथित मुठभेड़ हुई। इसमें दो लोगों की मौत हो गई। दोनों संभल जिले के मूल निवासी थे। इनमें एक कपिल किसी जमाने में बड़ा बदमाश रहा था तो उसका दोस्त अशोक गाजियाबाद के इंदिरा पुरम में रहकर कई साल से ड्राइविंग कर रहा था। काफी खोजने के बाद अशोक के खिलाफ 20 साल पहले आर्म्स एक्ट का मामला मुरादाबाद में दर्ज मिला।
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घटना को लेकर दोनों मृतकों के परिवार ने सवाल उठाए थे। पुलिस पर दोनों को घर से लेकर आने और सुनियोजित तरीके से हत्या करने का आरोप लगाया था। खुलासे की कहानी में तमाम झोल भी थे जिनका पुलिस के पास जवाब नहीं था। सुबह घटना के बाद पीआरवी ने भागते बदमाशों की लोकेशन ट्रेस की थी। इन बदमाशों को इतने घंटे बाद मारे जाने पर सवाल उठा था। पुलिस के पास राइफलें थीं पर खेत में छुपे बदमाशों को रिवाल्वर से गोली मारने की पुष्टि हुई थी। बदमाशों को कई गोलियां मारी गई थीं जबकि पुलिसकर्मियों को मामूली खरोंच ही आई थीं। कपिल के भाई सुरेंद्र और अशोक के पिता छोटेलाल ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों से शिकायतें कीं जिनका नतीजा नहीं निकला। बाद में ये लोग कोर्ट चले गए। मजिस्ट्रेट जांच में पुलिस को क्लीनचिट मिल चुकी है, परिवार का कहना था कि मजिस्ट्रेट समकक्ष अधिकारी होने के चलते उन्हें इस जांच पर भरोसा ही नहीं था।
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