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छह महीने बीतेे, मतलब भूल जाओ विसरा रिपोर्ट
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विसरा सुरक्षित रहने की अवधि छह महीने, फिर होने लगता है खराब
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कई मुकदमों में चार्जशीट या एफआर के लिए विसरा रिपोर्ट का इंतजार
बरेली। अब भले ही विसरा रखने की व्यवस्था में सुधार आया हो लेकिन कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें छह महीने बीतने के बाद भी विसरा रिपोर्ट नहीं आई है। कहा जा रहा है कि विसरा रिपोर्ट की जांच रिपोर्ट छह महीने में न आने का मतलब इन्हें भुला देना है क्योंकि विसरा सिर्फ छह महीने ही सुरक्षित रखा जा सकता है।
किसी व्यक्ति की मौत के बाद रासायनिक परीक्षण के लिए मृतक के लीवर, किडनी, आंत समेत अन्य अंग निकाल लिए जाते हैं। जहर या ऐसी ही किसी अन्य वजह इसके परीक्षण से पता कर ली जाती हैं। इसे नमक के पानी और केमिकल में संरक्षित करके लैब भेजा जाता है। जानकारों के मुताबिक विसरा छह महीने तक सही स्थिति में रहता है। इसके बाद जांच होने पर रिपोर्ट में कुछ समस्या आ सकती है। वैसे केमिकल काफी समय तक इसे सुरक्षित रख सकता है। कई बार जार लीक होने या गिरने पर जब केमिकल बह जाता है तो विसरा भी नष्ट हो जाता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि जो महीने छह महीने से ज्यादा पुराने हो गए हैं और उनकी विसरा रिपोर्ट अटकी है तो अब उसका राज खुलना भी मुश्किल है।
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इन मामलों की अटकी है रिपोर्ट
नवाबगंज के गांव बरौर निवासी तब्बसीन पत्नी हाफिज मोहम्मद अयूब की मौत 16 फरवरी को हो गई थी। कुछ दिन बाद मायके वालों ने शिकायत की तो डीएम के आदेश पर कब्र से शव निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट न होने पर विसरा जांच को भेजा गया लेकिन अब तक इसकी रिपोर्ट नहीं मिली है। ऐसा ही मामला हाफिजगंज के बढ़ेपुरा गांव का है। वहां के युवक का शव भी कब्र से निकलवाया गया। इसकी विसरा जांच भी लटकी हुई है। 12 जनवरी को परेवा सादात गांव के ओमकार की सांप काटने से मौत हुई थी। मगर संदेह के चलते विसरा भेजा गया था, जिसकी अब तक रिपोर्ट नहीं आई है।
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कई मुकदमों में चार्जशीट या एफआर के लिए विसरा रिपोर्ट का इंतजार बरेली। अब भले ही विसरा रखने की व्यवस्था में सुधार आया हो लेकिन कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें छह महीने बीतने के बाद भी विसरा रिपोर्ट नहीं आई है। कहा जा रहा है कि विसरा रिपोर्ट की जांच रिपोर्ट छह महीने में न आने का मतलब इन्हें भुला देना है क्योंकि विसरा सिर्फ छह महीने ही सुरक्षित रखा जा सकता है।
किसी व्यक्ति की मौत के बाद रासायनिक परीक्षण के लिए मृतक के लीवर, किडनी, आंत समेत अन्य अंग निकाल लिए जाते हैं। जहर या ऐसी ही किसी अन्य वजह इसके परीक्षण से पता कर ली जाती हैं। इसे नमक के पानी और केमिकल में संरक्षित करके लैब भेजा जाता है। जानकारों के मुताबिक विसरा छह महीने तक सही स्थिति में रहता है। इसके बाद जांच होने पर रिपोर्ट में कुछ समस्या आ सकती है। वैसे केमिकल काफी समय तक इसे सुरक्षित रख सकता है। कई बार जार लीक होने या गिरने पर जब केमिकल बह जाता है तो विसरा भी नष्ट हो जाता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि जो महीने छह महीने से ज्यादा पुराने हो गए हैं और उनकी विसरा रिपोर्ट अटकी है तो अब उसका राज खुलना भी मुश्किल है।
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