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जानलेवा हमले में दो भाइयों को उम्रकैद: कोर्ट ने कहा- दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करना चाहिए, सुनाया श्लोक

Sat, 22 Mar 2025 10:48 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 22 Mar 2025 10:48 AM IST
सार

बरेली में आईटीआई छात्र पर जानलेवा हमले के दोषी दो सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दोनों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया। दोषियों को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की। 

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court sentenced two brothers guilty of murderous attack to life imprisonment in Bareilly
जनपद न्यायालय,बरेली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने आईटीआई छात्र पर कातिलाना हमले के दोषी दो सगे भाइयों को उम्रकैद और तीन-तीन लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को दो-दो साल अतिरिक्त जेल में रहना पड़ेगा।

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भोजीपुर थाने के गांव घुर समसपुर निवासी जसवंत मौर्य ने नौ अप्रैल 2020 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसका कहना था कि शाम पांच बजे उसकी भाभी उर्मिला छत पर कपड़े डालने गई थीं। इसी दौरान गांव का मोर सिंह उनको गालियां देने लगा। जसवंत ने इसका विरोध किया। तभी मोर सिंह के भाई सुरेंद्र, नरोत्तम और अशोक भी आ गए। इन लोगों ने लाठी और रॉड से उस पर हमला कर दिया। इससे वह गंभीर घायल हो गया। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने मार्च 2022 में मोर सिंह और नरोत्तम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह और 14 साक्ष्य पेश किए गए। जसवंत ने बताया कि जब उस पर हमला हुआ था, तब वह आईटीआई कर रहा था। हमले में उसकी आंखों की रोशनी चली गई। जसवंत की भाभी ने भी यही बयान दिया। गवाहों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने मोर सिंह व नरोत्तम को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई है।

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कोर्ट की टिप्पणी : दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करना चाहिए
सजा सुनाने के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्मशास्त्रों में यह श्लोक बार-बार प्रयोग किया जाता है कि शठे शाठ्यम समाचरेत। अर्थत दुष्ट के साथ दुष्टता का ही व्यवहार करना चाहिए। आचार्य चाणक्य भी इस नीति से सहमति रखते थे। दोषियों ने निर्ममता से जसवंत को चोट पहुंचाई। उसका इलाज लंबे समय तक चला। उसकी आंखों की रोशनी चली गई। वह खुद खाना भी नहीं खा सकता। ठीक से बोल भी नहीं सकता। दोषियों ने उसको जीवनभर के लिए लाचार कर दिया। घटना के समय उसकी आयु 24 वर्ष थी। उसका अभी लंबा जीवन है। 

टेंपो खड़ा करने के विवाद में कातिलाना हमला करने वाले भाइयों को उम्रकैद
अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने टेंपो खड़ा करने को लेकर हुए विवाद में जानलेवा हमला करने वाले दो भाइयों को उम्रकैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अलीगंज थाने के गांव खैलम निवासी मोहम्मद उमर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पांच नवंबर 2011 को दोपहर तीन बजे उसके पिता दुलारे खां बाजार से सामान लेकर लौट रहे थे। 

रास्ते में साबिर, कासिम, इल्यास और तहसील उर्फ तस्लीम ने उनको घेर लिया। इल्यास और कासिम ने उनको पकड़ लिया। साबिर ने गर्दन पर चाकू से हमला कर दिया। इससे वह गंभीर घायल हो गए। घटना से पांच-छह दिन पहले तहसील टेंपो खरीद कर लाया था। टेंपो खड़ा करने को लेकर तहसील का उसके पिता से झगड़ा हो गया था। इसी रंजिश में उसके पिता पर हमला किया गया।

पुलिस ने विवेचना के बाद साबिर और तहसील के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। अभियोजन की ओर से छह गवाह और छह साक्ष्य पेश किए गए। कुछ गवाह अपने बयान से मुकर गए। इस पर कोर्ट ने कहा कि गवाह दबाव और लालच के कारण मुकर जाते हैं। आमतौर पर सामाजिक लोग आपराधिक घटनाओं में गवाही देने से बचते भी हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने साबिर और तहसील को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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