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कोरोना वायरस अब बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक
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बरेली। कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों में भी संक्रमण की दर बढ़ी है। संक्रमितों में करीब बीस फीसद तादाद बच्चों की है। चूंकि बढ़ते संक्रमण के बीच कोरोना लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है और इसके साथ उसकी मारक क्षमता भी बढ़ रही है लिहाजा इस दौर में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है।
आईएमए के सचिव एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल श्रीवास्तव के मुताबिक बच्चों में कोविड के लक्षण बड़ों के मुकाबले थोड़ा अलग होते हैं। उनमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार, भूख न लगना, सर्दी, खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द जैसे लक्षण मुख्य तौर पर दिखते हैं। नवजात से लेकर 18 साल की उम्र तक के बच्चों में ये लक्षण हो सकते हैं। ऐसे बच्चों की फौरन कोविड जांच करानी चाहिए। अधिकांश माता-पिता कोविड के लक्षण होने पर भी बच्चों की जांच कराने पर बच रहे हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। बच्चों की जांच कराने के साथ ज्यादा सतर्कता बरतना भी जरूरी है।
बच्चा संक्रमित हो तो मास्क लगाकर कराए स्तनपान
बहुत छोटे बच्चे भी यदि कोविड के शिकार हो जाए तो उन बच्चों को 10 दिन के लिए अलग कर देना चाहिए जो मां से अलग रह सकते हों। यदि बच्चा मां का दूध पीता है तो मां को मास्क लगाकर उसे दूध पिलाना चाहिए। मां के संक्रमित होने पर आमतौर पर बच्चे भी संक्रमित हो जाते हैं।
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बच्चों को न दें फेविपिराविर जैसी एंटी वायरल दवा
डॉ. अतुल ने बताया कि लक्षण होने पर तुरंत आरटीपीसीआर या एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए। रिपोर्ट पॉजिटिव हो दवा शुरू करें। बच्चों को फेविपिराविर जैसी एंटी वायरल दवाएं नहीं देनी चाहिए। वजन के अनुसार एंजिथ्रोमाइसिन और आइवरमेक्टिन के साथ जिंक, विटामिन सी और विटामिन डी देनी चाहिए। जरूरत हो तो सर्दी की भी दवा दी जा सकती है। बच्चों में गंभीर संक्रमण कम होता है इसलिए उन्हें भर्ती करने की जरूरत कम पड़ती है। बहुत कम बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम होता है जो जानलेवा हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से परामर्श कर संक्रमण पर नजर रखने के साथ खून की जांच कराते रहें। दवाएं भी डॉक्टर से पूछकर देनी चाहिए।
इसलिए दूसरी और तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक
डॉ. अतुल ने बताया कि कोरोना का दूसरा स्ट्रेन अधिक शक्तिशाली और घातक है। वयस्कों के साथ बच्चे भी इससे तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। इसके भयावह लक्षण देखे जा रहे हैं। यह स्ट्रेन इम्युनिटी और एंटीबॉडीज से बचकर शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है। डबल कोविड वेरिएंट बच्चों के लिए भी खतरनाक है। यह इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाने के साथ रिसेप्टर्स के साथ तेजी से शरीर में फैल रहा है।
ऐसे करें बचाव
- बच्चों को बाहर खेलने न भेजें।
- बाहर जाना जरूरी हो तो ट्रिपल लेयर मास्क का प्रयोग करें।
- हाथों को साफ कराते रहें।
- शारीरिक दूरी के नियम का सख्ती से पालन करें।
ख्याल रहे... सुपर स्प्रेडर हो सकते हैं बच्चे
सवाल: बच्चे को बुखार-डायरिया हो तो भी जांच करानी चाहिए?
जवाब: बच्चे में पांच दिन बुखार, छाती में संक्रमण, पेट में ऐंठन, आंखों में लालिमा, जोड़ों में दर्द, डायरिया जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं। उसकी कोरोना की जांच कराएं।
सवाल: बच्चों को कोरोना संक्रमण से कैसे बचाएं?
जवाब: बच्चों के साथ बुजुर्गों पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्हें घर से बाहर न जाने दें। बाहर से कोई आए तो उसके सीधे संपर्क में जाने से बचाएं। बच्चों में 40 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने, मास्क लगाने और दो गज की दूरी का पालन करने की आदत डालें। उन्हें घर का पका ताजा पौष्टिक भोजन दें। ठंडा पानी, आइसक्रीम और ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन न करने दें।
सवाल: क्या बच्चे कोरोना के सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं?
जवाब: जी हां, बिल्कुल। कई अध्ययन के मुताबिक बच्चों से परिवार के सदस्य भी संक्रमित हो सकते हैं। बच्चे सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं और घर के वयस्क भी उनसे संक्रमित हो सकते हैं। बच्चों से घर के बुजुर्ग सदस्यों को अधिक खतरा है।
सवाल: बच्चे के कोरोना पॉजिटिव होने पर क्या करना चाहिए?
जवाब: तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और होम आइसोलेशन के दौरान उसे घर के सदस्यों से दूर रखें। माता या पिता में से कोई एक थोड़ी दूरी बनाकर बच्चे की देखभाल करें। पूरी सावधानी के साथ एन-95 मास्क का भी प्रयोग करें। बच्चे में यदि संक्रमण के दौरान एमआईएस-सी सिंड्रोम दिखे तो तुरंत उसे अस्पताल में भर्ती कराएं अन्यथा उसकी स्थिति खतरनाक हो सकती है।
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आईएमए के सचिव एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल श्रीवास्तव के मुताबिक बच्चों में कोविड के लक्षण बड़ों के मुकाबले थोड़ा अलग होते हैं। उनमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार, भूख न लगना, सर्दी, खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द जैसे लक्षण मुख्य तौर पर दिखते हैं। नवजात से लेकर 18 साल की उम्र तक के बच्चों में ये लक्षण हो सकते हैं। ऐसे बच्चों की फौरन कोविड जांच करानी चाहिए। अधिकांश माता-पिता कोविड के लक्षण होने पर भी बच्चों की जांच कराने पर बच रहे हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। बच्चों की जांच कराने के साथ ज्यादा सतर्कता बरतना भी जरूरी है।
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बच्चा संक्रमित हो तो मास्क लगाकर कराए स्तनपान
बहुत छोटे बच्चे भी यदि कोविड के शिकार हो जाए तो उन बच्चों को 10 दिन के लिए अलग कर देना चाहिए जो मां से अलग रह सकते हों। यदि बच्चा मां का दूध पीता है तो मां को मास्क लगाकर उसे दूध पिलाना चाहिए। मां के संक्रमित होने पर आमतौर पर बच्चे भी संक्रमित हो जाते हैं।
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बच्चों को न दें फेविपिराविर जैसी एंटी वायरल दवा
डॉ. अतुल ने बताया कि लक्षण होने पर तुरंत आरटीपीसीआर या एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए। रिपोर्ट पॉजिटिव हो दवा शुरू करें। बच्चों को फेविपिराविर जैसी एंटी वायरल दवाएं नहीं देनी चाहिए। वजन के अनुसार एंजिथ्रोमाइसिन और आइवरमेक्टिन के साथ जिंक, विटामिन सी और विटामिन डी देनी चाहिए। जरूरत हो तो सर्दी की भी दवा दी जा सकती है। बच्चों में गंभीर संक्रमण कम होता है इसलिए उन्हें भर्ती करने की जरूरत कम पड़ती है। बहुत कम बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम होता है जो जानलेवा हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से परामर्श कर संक्रमण पर नजर रखने के साथ खून की जांच कराते रहें। दवाएं भी डॉक्टर से पूछकर देनी चाहिए।
इसलिए दूसरी और तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक
डॉ. अतुल ने बताया कि कोरोना का दूसरा स्ट्रेन अधिक शक्तिशाली और घातक है। वयस्कों के साथ बच्चे भी इससे तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। इसके भयावह लक्षण देखे जा रहे हैं। यह स्ट्रेन इम्युनिटी और एंटीबॉडीज से बचकर शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है। डबल कोविड वेरिएंट बच्चों के लिए भी खतरनाक है। यह इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाने के साथ रिसेप्टर्स के साथ तेजी से शरीर में फैल रहा है।
ऐसे करें बचाव
- बच्चों को बाहर खेलने न भेजें।
- बाहर जाना जरूरी हो तो ट्रिपल लेयर मास्क का प्रयोग करें।
- हाथों को साफ कराते रहें।
- शारीरिक दूरी के नियम का सख्ती से पालन करें।
ख्याल रहे... सुपर स्प्रेडर हो सकते हैं बच्चे
सवाल: बच्चे को बुखार-डायरिया हो तो भी जांच करानी चाहिए?
जवाब: बच्चे में पांच दिन बुखार, छाती में संक्रमण, पेट में ऐंठन, आंखों में लालिमा, जोड़ों में दर्द, डायरिया जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं। उसकी कोरोना की जांच कराएं।
सवाल: बच्चों को कोरोना संक्रमण से कैसे बचाएं?
जवाब: बच्चों के साथ बुजुर्गों पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्हें घर से बाहर न जाने दें। बाहर से कोई आए तो उसके सीधे संपर्क में जाने से बचाएं। बच्चों में 40 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने, मास्क लगाने और दो गज की दूरी का पालन करने की आदत डालें। उन्हें घर का पका ताजा पौष्टिक भोजन दें। ठंडा पानी, आइसक्रीम और ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन न करने दें।
सवाल: क्या बच्चे कोरोना के सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं?
जवाब: जी हां, बिल्कुल। कई अध्ययन के मुताबिक बच्चों से परिवार के सदस्य भी संक्रमित हो सकते हैं। बच्चे सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं और घर के वयस्क भी उनसे संक्रमित हो सकते हैं। बच्चों से घर के बुजुर्ग सदस्यों को अधिक खतरा है।
सवाल: बच्चे के कोरोना पॉजिटिव होने पर क्या करना चाहिए?
जवाब: तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और होम आइसोलेशन के दौरान उसे घर के सदस्यों से दूर रखें। माता या पिता में से कोई एक थोड़ी दूरी बनाकर बच्चे की देखभाल करें। पूरी सावधानी के साथ एन-95 मास्क का भी प्रयोग करें। बच्चे में यदि संक्रमण के दौरान एमआईएस-सी सिंड्रोम दिखे तो तुरंत उसे अस्पताल में भर्ती कराएं अन्यथा उसकी स्थिति खतरनाक हो सकती है।