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दस्तावेजों में हेराफेरी कर रेल संपत्ति चोरी करने वाला ठेकेदार गिरफ्तार
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बरेली। रेल संपत्ति और सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाला ठेकेदार को आरपीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। वह काम पूरा होने के बाद भी बिना टेंडर रेलवे स्टोर से सामान जारी करा लेता था। आरोपी 20 लाख रुपये की रेलवे संपत्ति की चोरी के मामले में संलिप्त पाया गया है।
सिटी आरपीएफ इंस्पेक्टर नरेश कुमार मीना ने बताया कि सिग्नल निर्माण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर 20 लाख रुपये कीमत की रेल संपत्ति चोरी करने के मामले रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसमें मुख्य रूप से सिग्नल निर्माण का कार्य करने वाले गोरखपुर के गीता वाटिका निवासी ठेकेदार अमरेंद्र कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया। जांच के दौरान अमरेंद्र सिंह के खिलाफ तमाम साक्ष्य मिले। इनमें उसके द्वारा दस्तावेजों में हेराफेरी कर रेल संपत्ति चोरी करने की पुष्टि हुई। लिहाजा उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह रेलवे के अनुबंध के आधार पर सिग्नल वर्क करता है। काम पूरा हो जाने के बाद वह टेंडर को क्लोज न कर काम पूर्ण होने के बाद भी हेराफेरी करके स्टोर को डिमांड नोट भेजता था। इसके बाद स्टोर से सामान अपने पक्ष में जारी करा लेता था। वहीं स्टोर से सामान ले जाने वाले वाहन का नंबर भी गलत लिखवाता था। आरोपी ठेकेदार को आरपीएफ ने जेल भेजा दिया है।
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अन्य रेल कर्मियों के संलिप्त होने का भी अंदेशा - जांच अधिकारी नरेश कुमार मीना ने बताया कि इस मामले में कई आरोपी अभी वांछित है। कुछ और रेल कर्मियों के इसमें संलिप्त होने की भी आशंका है। जांच टीम का कहना है कि बिना रेल कर्मियों की मिलीभगत के स्टोर से लाखों रुपये की संपत्ति चोरी करना संभव नहीं है। रेलकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
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सिटी आरपीएफ इंस्पेक्टर नरेश कुमार मीना ने बताया कि सिग्नल निर्माण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर 20 लाख रुपये कीमत की रेल संपत्ति चोरी करने के मामले रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसमें मुख्य रूप से सिग्नल निर्माण का कार्य करने वाले गोरखपुर के गीता वाटिका निवासी ठेकेदार अमरेंद्र कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया। जांच के दौरान अमरेंद्र सिंह के खिलाफ तमाम साक्ष्य मिले। इनमें उसके द्वारा दस्तावेजों में हेराफेरी कर रेल संपत्ति चोरी करने की पुष्टि हुई। लिहाजा उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
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आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह रेलवे के अनुबंध के आधार पर सिग्नल वर्क करता है। काम पूरा हो जाने के बाद वह टेंडर को क्लोज न कर काम पूर्ण होने के बाद भी हेराफेरी करके स्टोर को डिमांड नोट भेजता था। इसके बाद स्टोर से सामान अपने पक्ष में जारी करा लेता था। वहीं स्टोर से सामान ले जाने वाले वाहन का नंबर भी गलत लिखवाता था। आरोपी ठेकेदार को आरपीएफ ने जेल भेजा दिया है।
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अन्य रेल कर्मियों के संलिप्त होने का भी अंदेशा - जांच अधिकारी नरेश कुमार मीना ने बताया कि इस मामले में कई आरोपी अभी वांछित है। कुछ और रेल कर्मियों के इसमें संलिप्त होने की भी आशंका है। जांच टीम का कहना है कि बिना रेल कर्मियों की मिलीभगत के स्टोर से लाखों रुपये की संपत्ति चोरी करना संभव नहीं है। रेलकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है।