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Bareilly News: एनओसी के फेर में अटका बस टर्मिनल और कांप्लेक्स का निर्माण
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बरेली। सेटेलाइट अड्डे पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर बस टर्मिनल और शॉपिंग कांप्लेक्स बनाने की मंजूरी मिलने और फर्म चयन के बाद अब वन विभाग की एनओसी के फेर में काम अटका हुआ है। अपर प्रबंध निदेशक रामधारी वर्मा ने बस टर्मिनल और शॉपिंग कांप्लेक्स विकसित करने के लिए स्थानीय प्रबंधन को वन विभाग से एनओसी लेने के निर्देश दिए हैं।
रोडवेज मुख्यालय ने पिछले सप्ताह जिन 11 बस अड्डों के कायाकल्प को मंजूरी के साथ आशय प्रपत्र जारी किया है उनमें सेटेलाइट बस अड्डे का नाम भी है। सेटेलाइट अड्डे को बस टर्मिनल और शॉपिंग कांप्लेक्स में विकसित करने के लिए कवायद 2019 में शुरू हुई थी, लेकिन निवेशकों के आगे न आने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। मार्च-अप्रैल में फिर से बिड प्रक्रिया हुई थी। इनमें निजी कंपनियां आगे आईं।
योजना के तहत सेटेलाइट बस अड्डे को लीज पर दिया जाएगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर यहां 20,164 स्क्वायर मीटर एरिया में 137 करोड़ की लागत से बस टर्मिनल और शॉपिंग कांप्लेक्स बनाया जाएगा। शॉपिंग कांप्लेक्स की छत के नीचे बस अड्डा रहेगा। ऊपर का इस्तेमाल व्यावसायिक रूप से किया जाएगा। यहां माॅल, रेस्टोरेंट, पार्किंग, दफ्तर, बैंक आदि सुविधाएं मिलेंगी।
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रोडवेज मुख्यालय से वन विभाग की एनओसी प्राप्त करने और प्रस्तावित क्षेत्रफल में आने वाले वृक्षों के कटान की कार्रवाई का आदेश मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। वर्तमान में सेटेलाइट पर सर्कुलेटिंग एरिया का क्षेत्रफल कम है। ऐसे में बस टर्मिनल के लिए कुछ हिस्सा वर्कशॉप की भूमि का भी लिया जाएगा। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर मानचित्र तैयार किया जा रहा है। संवाद
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सेटेलाइट अड्डे पर बस टर्मिनल और शॉपिंग कांप्लेक्स बनाने के लिए पेड़ों के कटान और वन विभाग से एनओसी प्राप्त करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। स्थानीय स्तर पर इसके लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मुख्यालय से नया मानचित्र मिलने का इंतजार है। पीपीपी मॉडल पर बस अड्डे के कायाकल्प का काम जल्द शुरू हो जाएगा। - दीपक चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक
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रोडवेज मुख्यालय ने पिछले सप्ताह जिन 11 बस अड्डों के कायाकल्प को मंजूरी के साथ आशय प्रपत्र जारी किया है उनमें सेटेलाइट बस अड्डे का नाम भी है। सेटेलाइट अड्डे को बस टर्मिनल और शॉपिंग कांप्लेक्स में विकसित करने के लिए कवायद 2019 में शुरू हुई थी, लेकिन निवेशकों के आगे न आने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। मार्च-अप्रैल में फिर से बिड प्रक्रिया हुई थी। इनमें निजी कंपनियां आगे आईं।
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योजना के तहत सेटेलाइट बस अड्डे को लीज पर दिया जाएगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर यहां 20,164 स्क्वायर मीटर एरिया में 137 करोड़ की लागत से बस टर्मिनल और शॉपिंग कांप्लेक्स बनाया जाएगा। शॉपिंग कांप्लेक्स की छत के नीचे बस अड्डा रहेगा। ऊपर का इस्तेमाल व्यावसायिक रूप से किया जाएगा। यहां माॅल, रेस्टोरेंट, पार्किंग, दफ्तर, बैंक आदि सुविधाएं मिलेंगी।
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रोडवेज मुख्यालय से वन विभाग की एनओसी प्राप्त करने और प्रस्तावित क्षेत्रफल में आने वाले वृक्षों के कटान की कार्रवाई का आदेश मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। वर्तमान में सेटेलाइट पर सर्कुलेटिंग एरिया का क्षेत्रफल कम है। ऐसे में बस टर्मिनल के लिए कुछ हिस्सा वर्कशॉप की भूमि का भी लिया जाएगा। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर मानचित्र तैयार किया जा रहा है। संवाद
सेटेलाइट अड्डे पर बस टर्मिनल और शॉपिंग कांप्लेक्स बनाने के लिए पेड़ों के कटान और वन विभाग से एनओसी प्राप्त करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। स्थानीय स्तर पर इसके लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मुख्यालय से नया मानचित्र मिलने का इंतजार है। पीपीपी मॉडल पर बस अड्डे के कायाकल्प का काम जल्द शुरू हो जाएगा। - दीपक चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक