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आंखें बंद करने से तो नहीं टलेगी ये आफत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 21 Mar 2018 06:44 PM IST
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MJP Rohilkhand university
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महात्मा ज्योतिबाफुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं ज्योतिबाफुले की पत्नी और नारीवादी क्रांतिकारी सावित्रीबाई फुले के बारे में कितना जानती हैं, कहना मुश्किल है। पर इन छात्राओं से बात करके लगा कि धरना देने और विरोध करने की ताकत का उन्हें पता लग चुका है। आठ मार्च को पूरा संसार महिला दिवस मना रहा था, तब इन छात्राओं ने हॉस्टल के घटिया भोजन को लेकर रात में धरना देकर पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन को हिला दिया। अपनी सुरक्षा को लेकर हर किसी से एहतियात भरी बातें सुनने की आदी ये लड़कियां केंद्रीय पुस्तकालय में हुई छेड़छाड़ के बाद सतर्क तो हैं पर प्रशासन से सवाल भी उठातीं हैं कि क्या शाम ढले हॉस्टल में बंद कर देने से वे सुरक्षित हो जाएंगी?
बीटेक की कई छात्राएं इलाहाबाद, लखनऊ और दूसरे शहरों से यहां पढ़ने आई हैं। हॉस्टल में रहते हुए वे क्लास के बाद कांप्टीशन के लिए कोचिंग करना चाहती थीं पर शाम 6:30 बजे तक ही एंट्री होने के कारण वे पूरे सेशन कोचिंग नहीं पढ़ सकीं। एमबीए की एक छात्रा बोली कि ब्वॉयज हॉस्टल में तो लड़के दस बजे तक आते हैं, हम तो जायज समय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, पहले आउटिंग टाइम 5:30 था, वार्डन ने सिर्फ एक घंटा बढ़ाया है। बीफार्मा की छात्रा ने कहा विश्वविद्यालय में कहीं सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, सुरक्षा संसाधनों की कमी है, उस पर वीसी कब ध्यान देंगे?
धरने से फर्क तो पड़ा पर अब फिर उसी ढर्रे पर
बरेली। विरोध करने का फैसला किस स्थिति में किया? के सवाल पर लड़कियां बोलीं हम बेस्वाद और घटिया खाना खाकर परेशान हो गए थे, सबने फैसला किया कि भूखे रहकर वे विरोध करेंगी। एक ने बताया कि अंतर पड़ा, कुछ दिन खाने की क्वालिटी ठीक हो गई पर अब फिर वही हाल है। घटिया तेल इस्तेमाल होने के कारण सब्जी में महक आने की शिकायत भी छात्राओं ने की। गर्मी शुरू होने पर पूरे-पूरे दिन बिजली कटौती से हॉस्टल में परेशान रहने वाली छात्राओं ने अपने-अपने घरों से बैटरी वाले पंखे मंगाना शुरू कर दिया है। हॉस्टल में निर्माण होने और आसपास की हरियाली के कारण मच्छरों की समस्या से छात्राएं परेशान हैं। साथ ही सुबह पानी की कमी, पानी के निकास की समस्या से ये छात्राएं परेशान हैं।
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बीटेक की कई छात्राएं इलाहाबाद, लखनऊ और दूसरे शहरों से यहां पढ़ने आई हैं। हॉस्टल में रहते हुए वे क्लास के बाद कांप्टीशन के लिए कोचिंग करना चाहती थीं पर शाम 6:30 बजे तक ही एंट्री होने के कारण वे पूरे सेशन कोचिंग नहीं पढ़ सकीं। एमबीए की एक छात्रा बोली कि ब्वॉयज हॉस्टल में तो लड़के दस बजे तक आते हैं, हम तो जायज समय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, पहले आउटिंग टाइम 5:30 था, वार्डन ने सिर्फ एक घंटा बढ़ाया है। बीफार्मा की छात्रा ने कहा विश्वविद्यालय में कहीं सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, सुरक्षा संसाधनों की कमी है, उस पर वीसी कब ध्यान देंगे?
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धरने से फर्क तो पड़ा पर अब फिर उसी ढर्रे पर
बरेली। विरोध करने का फैसला किस स्थिति में किया? के सवाल पर लड़कियां बोलीं हम बेस्वाद और घटिया खाना खाकर परेशान हो गए थे, सबने फैसला किया कि भूखे रहकर वे विरोध करेंगी। एक ने बताया कि अंतर पड़ा, कुछ दिन खाने की क्वालिटी ठीक हो गई पर अब फिर वही हाल है। घटिया तेल इस्तेमाल होने के कारण सब्जी में महक आने की शिकायत भी छात्राओं ने की। गर्मी शुरू होने पर पूरे-पूरे दिन बिजली कटौती से हॉस्टल में परेशान रहने वाली छात्राओं ने अपने-अपने घरों से बैटरी वाले पंखे मंगाना शुरू कर दिया है। हॉस्टल में निर्माण होने और आसपास की हरियाली के कारण मच्छरों की समस्या से छात्राएं परेशान हैं। साथ ही सुबह पानी की कमी, पानी के निकास की समस्या से ये छात्राएं परेशान हैं।
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