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युवक की मौत पर हाईवे पर शव रखकर लगाया जाम
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Fri, 16 Feb 2018 07:46 PM IST
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थाना भीरा क्षेत्र के गांव रमुवापुर निवासी करन सिंह की गुरुवार को बस से कुचलकर हुई मौत से गुस्साए लोगों ने शुक्रवार की सुबह हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया और बस यूनियन के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए लोगों को बमुश्किल समझा बुझाकर शांत कराया। तब जाकर कहीं डेढ़ घंटे बाद जाम खुल सका।
शुक्रवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे ग्रामीण करन सिंह का शव ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पडरिया तुला पहुंचे और बस यूनियन आफिस के सामने रख दिया। इससे वहां मौजूद यूनियन कर्मचारी भाग खड़े हुए। लोगों ने हाईवे पर जाम लगाकर यूनियन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इससे हाईवे के दोनों तरफ आवागमन बाधित हो गया। वाहनों की लंबी लाइनें लग र्गइं। प्राइवेट बसें काफी पहले ही रुक कर दूसरे रास्ते से निकलने लगीं। जाम की सूचना पर एसओ संदीप सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब जाकर लोग शांत हुए। लोगों का कहना था कि बस यूनियन मृतक के परिवार वालों को मुआवजा दे। साथ ही यह तय करें कि यह तेज रफ्तार बसें आखिर अपनी गति कब कम करेंगी। भीरा पलिया बस यूनियन के खिलाफ मृतक करण सिंह की मौत के बाद गुस्सा फूटना कोई अचंभा नहीं था।
पांच फरवरी को बिजुआ में पास के सौना गांव निवासी कक्षा दस के छात्र अवनीश यादव की तेज रफ्तार प्राइवेट बस की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। यही कारण था और लोग इसी बात पर खासे गुस्सा थे। गुरुवार की रात पोस्टमार्टम के बाद जब करण सिंह का शव गांव लाया गया तो उनकी बेटियां, बेटे और पत्नी के साथ पूरा गांव गमजदा हो गया। परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल था। करन सिंह की कच्ची गृहस्थी को देखकर लोग यूनियन के नियम को कोस रहे थे।
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शुक्रवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे ग्रामीण करन सिंह का शव ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पडरिया तुला पहुंचे और बस यूनियन आफिस के सामने रख दिया। इससे वहां मौजूद यूनियन कर्मचारी भाग खड़े हुए। लोगों ने हाईवे पर जाम लगाकर यूनियन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इससे हाईवे के दोनों तरफ आवागमन बाधित हो गया। वाहनों की लंबी लाइनें लग र्गइं। प्राइवेट बसें काफी पहले ही रुक कर दूसरे रास्ते से निकलने लगीं। जाम की सूचना पर एसओ संदीप सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब जाकर लोग शांत हुए। लोगों का कहना था कि बस यूनियन मृतक के परिवार वालों को मुआवजा दे। साथ ही यह तय करें कि यह तेज रफ्तार बसें आखिर अपनी गति कब कम करेंगी। भीरा पलिया बस यूनियन के खिलाफ मृतक करण सिंह की मौत के बाद गुस्सा फूटना कोई अचंभा नहीं था।
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पांच फरवरी को बिजुआ में पास के सौना गांव निवासी कक्षा दस के छात्र अवनीश यादव की तेज रफ्तार प्राइवेट बस की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। यही कारण था और लोग इसी बात पर खासे गुस्सा थे। गुरुवार की रात पोस्टमार्टम के बाद जब करण सिंह का शव गांव लाया गया तो उनकी बेटियां, बेटे और पत्नी के साथ पूरा गांव गमजदा हो गया। परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल था। करन सिंह की कच्ची गृहस्थी को देखकर लोग यूनियन के नियम को कोस रहे थे।
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