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सीएमओ की टीम को चकमा देकर भागा झोलाछाप डॉक्टर
बरेली
Updated Thu, 25 Feb 2016 02:18 AM IST
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बरेली। सीएमओ की टीम ने पीर बहोड़ा में झोलाछाप डॉक्टर की क्लीनिक पर छापा मारा। इकरार मोहम्मद उर्फ भईये बिना बोर्ड और बैनर के ही क्लीनिक चला रहा था। एसीएमओ के नेतृत्व में टीम पहुंची तो वह भाग गया। क्लीनिक सीज कर इज्जतनगर थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
पीर बहोड़ा में इकरार मोहम्मद उर्फ भइये क्लीनिक चलाता है। यह अधिकतर रात में ही खुलती है। परतापुर जीवन सहाय गांव के मिसरयार खां ने इस संबंध में शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि तीन अक्तूबर, 2015 को उन्हें बुखार था। वह इकरार के यहां पहुंचे तो उन्हें दवा दी गई। इसे खाने के बाद उन्हें चक्कर आए और शरीर पर लाल चकत्ते उभर आए। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल लाया गया। काफी इलाज के बाद वह ठीक हो पाए। डॉक्टराें ने बताया था कि गलत दवा दी गई है। इसकी शिकायत मिसरयार ने जनवरी में सीएमओ कार्यालय में की थी। क्लीनिक पर छापा मारा गया पर इकरार नहीं मिला। इसके बाद मंगलवार को फिर एसीएमओ डॉ. आलोक चंद्रा के नेतृत्व में टीम ने छापा मारा। इस बार भी इकरार भाग गया। टीम ने उसकी क्लीनिक सीज कर दी। बुधवार को उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा दी गई।
इस तरह चकमा देकर भागा झोलाछाप
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची तो इकरार क्लीनिक खोले था, लेकिन उसकी दुकान पर कोई बोर्ड नहीं था। एसीएमओ डॉ. आलोक चंद्रा समझ नहीं पाए कि इकरार कौन है। उन्होंने उसी से पूछ लिया, इकरार कौन है। उसने आगे की दुकान बता दी। टीम आगे बढ़ी तो इकरार क्लीनिक बंदकर भाग गया।
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इकरार के पास कोई डिग्री और पंजीकरण नहीं है। वह चकमा देकर भाग निकला। थाने में रिपोर्ट कराई गई है। उसे ढूंढा जा रहा है।’
डॉ. आलोक चंद्रा, एसीएमओ
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पीर बहोड़ा में इकरार मोहम्मद उर्फ भइये क्लीनिक चलाता है। यह अधिकतर रात में ही खुलती है। परतापुर जीवन सहाय गांव के मिसरयार खां ने इस संबंध में शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि तीन अक्तूबर, 2015 को उन्हें बुखार था। वह इकरार के यहां पहुंचे तो उन्हें दवा दी गई। इसे खाने के बाद उन्हें चक्कर आए और शरीर पर लाल चकत्ते उभर आए। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल लाया गया। काफी इलाज के बाद वह ठीक हो पाए। डॉक्टराें ने बताया था कि गलत दवा दी गई है। इसकी शिकायत मिसरयार ने जनवरी में सीएमओ कार्यालय में की थी। क्लीनिक पर छापा मारा गया पर इकरार नहीं मिला। इसके बाद मंगलवार को फिर एसीएमओ डॉ. आलोक चंद्रा के नेतृत्व में टीम ने छापा मारा। इस बार भी इकरार भाग गया। टीम ने उसकी क्लीनिक सीज कर दी। बुधवार को उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा दी गई।
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इस तरह चकमा देकर भागा झोलाछाप
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची तो इकरार क्लीनिक खोले था, लेकिन उसकी दुकान पर कोई बोर्ड नहीं था। एसीएमओ डॉ. आलोक चंद्रा समझ नहीं पाए कि इकरार कौन है। उन्होंने उसी से पूछ लिया, इकरार कौन है। उसने आगे की दुकान बता दी। टीम आगे बढ़ी तो इकरार क्लीनिक बंदकर भाग गया।
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इकरार के पास कोई डिग्री और पंजीकरण नहीं है। वह चकमा देकर भाग निकला। थाने में रिपोर्ट कराई गई है। उसे ढूंढा जा रहा है।’
डॉ. आलोक चंद्रा, एसीएमओ