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आधी अधूरी सड़क का लोकार्पण कर गए सीएम
बरेली
Updated Mon, 19 Oct 2015 12:43 AM IST
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बरेली। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बरेली-बागेश्वर मार्ग का लोकार्पण कर दिया है। मगर, अभी फोरलेन सड़क की खामियां पूरी नहीं हुई हैं। जिस फोरलेन मार्ग से नैनीताल रोड का सफर आसान होने की बात कही जा रही है, वास्तव में वह अभी पूरी तरह आसान नहीं हो पाया है। बहेड़ी से पुलभट्टा तक सड़क ठीक नहीं बनी है। इस फोरलेन में भी बहुत काम बाकी बचा है।
आगरा की पीएनसी कंपनी ने बरेली से उत्तराखंड सीमा तक 54 किलोमीटर तक सड़क 540 करोड़ की लागत से फोरलेन बनाई है। एक तो सड़क की ऊंचाई रेलवे लाइन से बहुत ज्यादा रखी गई है। सड़क पर वाहन चलते समय ऐसा लगता है कि जैसे गाड़ियां किसी छत पर दौड़ रही हैं। जानकारों के मुताबिक ज्यादा ऊंचाई पर बनी सड़क से वाहनों के दुघर्टना का खतरा सामान्य तौर पर बनी फोरलेन के मुकाबले ज्यादा है। सड़क के किनारे दोनों ओर नाला बनाते समय करीब 20 फुट जगह छोड़ दी गई है जो कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को खुला निमंत्रण है। इस खामी से रेलवे लाइन और स्टेट हाइवे की जमीन पर अवैध कब्जे होना तय है। भोजीपुरा से आगे नाला भी पूरा नहीं बना है। इससे पानी निकासी नहीं हो पाएगी। यही नहीं, डिवाइडर की ऊंचाई भी एनएचएआई के हाइवे पर बने डिवाइडरों से कम रखी गई है। इससे भी दुघर्टनाएं बढ़ने का खतरा है। शहरी हिस्से में डिवाइडरों पर लाइट न होने से भी दुघर्टनाएं बढ़ने का खतरा बरकरार है।
सबसे खास बात ये कि फोरलेन के किनारे ले आउट बिल्कुल नहीं छोड़ा गया है। इससे वाहनों पर सामान लोडिंग और अनलोडिंग नहीं मिल पाएगी। कहीं-कहीं तो ले आउट के लिए जगह ही नहीं बची है। हाइवे पर गुजरने वाले नागरिकों को टेलीफोन और शौचालय की सुविधा प्रदान की दी जाती है। यहां पर ये भी नहीं है। टोल प्लाजा के शुल्क में शहरी हिस्से की एक सीमा तक आने जाने वालों को छूट देने पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उत्तराखंड से लेकर बहेड़ी के मरीज एसआरएमएस मुफ्त पहुंचेंगे लेकिन बरेली में रहने वालों को इलाज कराने के लिए शुल्क देना पड़ेगा। कुल मिलाकर पूरी कमियां दूर किए बिना फोरलेन का लोकार्पण करा दिया गया।
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आगरा की पीएनसी कंपनी ने बरेली से उत्तराखंड सीमा तक 54 किलोमीटर तक सड़क 540 करोड़ की लागत से फोरलेन बनाई है। एक तो सड़क की ऊंचाई रेलवे लाइन से बहुत ज्यादा रखी गई है। सड़क पर वाहन चलते समय ऐसा लगता है कि जैसे गाड़ियां किसी छत पर दौड़ रही हैं। जानकारों के मुताबिक ज्यादा ऊंचाई पर बनी सड़क से वाहनों के दुघर्टना का खतरा सामान्य तौर पर बनी फोरलेन के मुकाबले ज्यादा है। सड़क के किनारे दोनों ओर नाला बनाते समय करीब 20 फुट जगह छोड़ दी गई है जो कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को खुला निमंत्रण है। इस खामी से रेलवे लाइन और स्टेट हाइवे की जमीन पर अवैध कब्जे होना तय है। भोजीपुरा से आगे नाला भी पूरा नहीं बना है। इससे पानी निकासी नहीं हो पाएगी। यही नहीं, डिवाइडर की ऊंचाई भी एनएचएआई के हाइवे पर बने डिवाइडरों से कम रखी गई है। इससे भी दुघर्टनाएं बढ़ने का खतरा है। शहरी हिस्से में डिवाइडरों पर लाइट न होने से भी दुघर्टनाएं बढ़ने का खतरा बरकरार है।
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सबसे खास बात ये कि फोरलेन के किनारे ले आउट बिल्कुल नहीं छोड़ा गया है। इससे वाहनों पर सामान लोडिंग और अनलोडिंग नहीं मिल पाएगी। कहीं-कहीं तो ले आउट के लिए जगह ही नहीं बची है। हाइवे पर गुजरने वाले नागरिकों को टेलीफोन और शौचालय की सुविधा प्रदान की दी जाती है। यहां पर ये भी नहीं है। टोल प्लाजा के शुल्क में शहरी हिस्से की एक सीमा तक आने जाने वालों को छूट देने पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उत्तराखंड से लेकर बहेड़ी के मरीज एसआरएमएस मुफ्त पहुंचेंगे लेकिन बरेली में रहने वालों को इलाज कराने के लिए शुल्क देना पड़ेगा। कुल मिलाकर पूरी कमियां दूर किए बिना फोरलेन का लोकार्पण करा दिया गया।
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