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फिर वही सवाल, समर्थन मूल्य छोड़, बाजार में धान क्यों बेच रहे किसान
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बरेली। समर्थन मूल्य पर धान की खरीद शुरू हुए सवा महीने के बाद भी हमेशा की तरह फिर वही सवाल खड़ा हो गया है कि किसान समर्थन मूल्य छोड़कर औने-पौने दामों में आढ़तों पर अपना धान क्यों बेच रहे हैं। धान खरीद की समीक्षा में सामने आया है कि अब तक जिले के 79 केंद्रों पर सिर्फ तीन हजार किसान ही पहुंचे हैं और सिर्फ 15 फीसदी खरीद का लक्ष्य ही पूरा हो पाया है। एफसीआई, कर्मचारी कल्याण निगम सहित कई एजेंसियों की स्थिति बेहद खराब मिली है। एडीएम प्रशासन ने उनके प्रबंधकों को खरीद की स्थिति में सुधार लाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
धान खरीद की सरकारी व्यवस्था में यह परंपरागत तथ्य है कि किसान अपना धान राइस मिलर्स और आढ़तियों को बेचते हैं और फिर व्यापारियों से धान खरीदकर सरकारी लक्ष्य पूरा किया जाता है। इस बार भी ऐसे ही हालात बन रहे हैं। जिले में इस बार खाद्य विभाग समेत नौ सरकारी एजेंसियों के 79 केंद्रों को 156500 क्विंटल धान की खरीद करनी है। एक अक्तूबर से सरकारी सेंटरों के शुरू होने के बावजूद अब तक सिर्फ 15 प्रतिशत ही धान खरीदा जा सका है। इसमें सबसे कम एफसीआई ने 2.21 प्रतिशत खरीद की है जबकि कर्मचारी कल्याण निगम ने 5.56 प्रतिशत, यूपीएसएस ने 11.96 प्रतिशत, यूपी एग्रो ने 15 प्रतिशत धान की खरीद की है। एडीएम प्रशासन वीके सिंह ने समीक्षा की तो सामने आया कि सरकारी केंद्रों पर अब तक लगभग तीन हजार किसान ही धान बेचने पहुंचे हैं। इस बारे में सरकारी एजेंसियों के प्रबंधकों से जवाब मांगा गया था। इसमें बजट और वारदाना सहित दूसरी दिक्कतों को वजह बताया है। एडीएम (प्रशासन) ने बताया कि धान खरीद में सुधार न होने पर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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धान खरीद की सरकारी व्यवस्था में यह परंपरागत तथ्य है कि किसान अपना धान राइस मिलर्स और आढ़तियों को बेचते हैं और फिर व्यापारियों से धान खरीदकर सरकारी लक्ष्य पूरा किया जाता है। इस बार भी ऐसे ही हालात बन रहे हैं। जिले में इस बार खाद्य विभाग समेत नौ सरकारी एजेंसियों के 79 केंद्रों को 156500 क्विंटल धान की खरीद करनी है। एक अक्तूबर से सरकारी सेंटरों के शुरू होने के बावजूद अब तक सिर्फ 15 प्रतिशत ही धान खरीदा जा सका है। इसमें सबसे कम एफसीआई ने 2.21 प्रतिशत खरीद की है जबकि कर्मचारी कल्याण निगम ने 5.56 प्रतिशत, यूपीएसएस ने 11.96 प्रतिशत, यूपी एग्रो ने 15 प्रतिशत धान की खरीद की है। एडीएम प्रशासन वीके सिंह ने समीक्षा की तो सामने आया कि सरकारी केंद्रों पर अब तक लगभग तीन हजार किसान ही धान बेचने पहुंचे हैं। इस बारे में सरकारी एजेंसियों के प्रबंधकों से जवाब मांगा गया था। इसमें बजट और वारदाना सहित दूसरी दिक्कतों को वजह बताया है। एडीएम (प्रशासन) ने बताया कि धान खरीद में सुधार न होने पर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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