{"_id":"5d9cecf98ebc3e939e470e32","slug":"civic-amenities-bareilly-news-bly3793104142","type":"story","status":"publish","title_hn":"त्योहारों में बैंक बंद और उस पर एटीएम में नोट खत्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
त्योहारों में बैंक बंद और उस पर एटीएम में नोट खत्म
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। त्योहारों के बीच एक तो बैंक बंद पड़े हैं, ऊपर से तीन दिन की लगातार छुट्टी ने शहर के ज्यादातर एटीएम भी खाली हो गए हैं। बैंकों के बंद होने की वजह से एटीएम के लिए करेंसी चेस्ट से नोटों की सप्लाई भी नहीं हो पा रही है। छुट्टी के दो दिन तो जैसे-तैसे गुजर गए लेकिन दशहरा का तीसरा दिन शहर के लोगों पर ज्यादा भारी गुजरा। एटीएम से कैश न निकल पाने की वजह से लोग इधर-उधर भटकते रहे। त्योहारों के दौर में कारोबार पर भी इसका असर पड़ा।
विकास भवन के सामने बैंक आफ बड़ौदा के किसी भी एटीएम में मंगलवार को कैश उपलब्ध नहीं था। तमाम लोग एटीएम पर लगा ‘नो कैश’ का बोर्ड देखकर मायूस होकर लौट गए। स्टेडियम रोड पर सिंडिकेट बैंक और एसबीआई समेत कई दूसरी बैंकों के एटीएम भी खाली पड़े हुए थे। इसके अलावा राजेंद्रनगर, सेटेलाइट, सिविल लाइंस, रोडवेज, जिला अस्पताल रोड समेत कई और इलाकों में पीएनबी, यूनाइटेड बैंक, एसबीआई और दूसरी बैंकों के एटीएम में भी लोगों को कैश नहीं मिला। इस वजह से मंगलवार का पूरा दिन नोटों का संकट झेलते हुए गुजरा। सूत्रों ने बताया कि छुट्टी होने से पहले तमाम बैंकों ने अपने एटीएम फुल नहीं किए थे। एटीएम में कैश की सप्लाई करने वाली एजेंसियों के कर्मचारियों ने भी लापरवाही भी दिखाई। इसी वजह से आम लोगों ने तो दिक्कत झेली ही, कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ा।
एटीएम में दो हजार के नोट लोड न करने से बढ़ी परेशानी
ब्लैक मनी के तौर पर दो हजार के नोटों की जमाखोरी के संकेत
ब्लैक मनी के तौर पर जमाखोरी किए जाने की वजह से साल भर में ही दो हजार के नोटों की अच्छी-खासी कमी हो गई है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि बैंकों से दो हजार की जितनी करेंसी जा रही है, उसके मुकाबले उसकी वापसी 30 से 40 फीसदी भी नहीं हो पा रही। दो हजार के नोट डंप होने से वित्त मंत्रालय के साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की भी चिंता बढ़ रही है। ऐसे में एटीएम में दो हजार के नोट लोड करने में कटौती की जा रही है। हालांकि इसका साइड एफेक्ट यह भी है कि एटीएम में छोटे नोट डाले जाने की वजह से ज्यादा करेंसी नहीं लोड हो पा रही है। दो हजार के नोटों से जहां 30 से 40 लाख तक कैश एटीएम में लोड हो रहा था, वहीं अब सौ, दौ सौ और पांच सौ नोटों से यह कैश 20 से 25 लाख तक ही लोड हो पा रहा है। इससे एटीएम जल्द खाली हो रहे हैं। दूसरी परेशानी यह भी है कि पहले 15 से 20 हजार रुपये तक कैश एक बार में निकल पा रहा था, अब छोटे नोटों की वजह से पांच-सात हजार से ज्यादा कैश एक बार में नहीं निकल रहा। ग्राहकों को ज्यादा बार निकासी करने से अतिरिक्त निकासी पर अलग फीस भी भुगतनी पड़ रही है।
विज्ञापन
प्लास्टिक करेंसी से भी परहेज
कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा देने के बावजूद तमाम दुकानदार, डायग्नोस्टिक सेंटर, अस्पताल वाले भी एटीएम कार्ड से पेमेंट नहीं ले रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने पर उन्हें उसका पूरा पेमेंट कागजों पर दिखाना होता है। इसलिए टैक्स चोरी के लिए नकद भुगतान पर जोर दिया जा रहा है।
यह सही है जमाखोरी रोकने के लिए दो हजार के नोट पर शिकंजा कसना जरूरी है मगर यह भी जरूरी है कि सरकार इसकी सप्लाई में संतुलन दिखाए ताकि आम पब्लिक को इसका दुष्प्रभाव न झेलना पड़े। - मोहित टंडन, चार्टर्ड अकाउंटेंट
दो हजार नोटों के डंप होने का बड़ा कारण रिश्वतखोरी भी है। इस कालेधन को छिपाने के लिए दो हजार के नोटों को बड़े पैमाने पर इकट्ठा किया जा रहा है। केंद्र सरकार इस पर फिर कोई कड़ा एक्शन उठाए।
- अंकित मिश्रा, अधिवक्ता इनकम टैक्स
सरकार कैशलेस को बढ़ावा तो दे रही है लेकिन अभी उतनी सुविधाएं नहीं है। इसलिए अभी भी कैश लेनदेन पर लोगों को ज्यादा विश्वास है। दो हजार नोट में कमी करने में ग्राहक और कारोबारी दोनों को परेशानी हो रही है। - राजेंद्र गुप्ता, व्यापारी
विज्ञापन
विकास भवन के सामने बैंक आफ बड़ौदा के किसी भी एटीएम में मंगलवार को कैश उपलब्ध नहीं था। तमाम लोग एटीएम पर लगा ‘नो कैश’ का बोर्ड देखकर मायूस होकर लौट गए। स्टेडियम रोड पर सिंडिकेट बैंक और एसबीआई समेत कई दूसरी बैंकों के एटीएम भी खाली पड़े हुए थे। इसके अलावा राजेंद्रनगर, सेटेलाइट, सिविल लाइंस, रोडवेज, जिला अस्पताल रोड समेत कई और इलाकों में पीएनबी, यूनाइटेड बैंक, एसबीआई और दूसरी बैंकों के एटीएम में भी लोगों को कैश नहीं मिला। इस वजह से मंगलवार का पूरा दिन नोटों का संकट झेलते हुए गुजरा। सूत्रों ने बताया कि छुट्टी होने से पहले तमाम बैंकों ने अपने एटीएम फुल नहीं किए थे। एटीएम में कैश की सप्लाई करने वाली एजेंसियों के कर्मचारियों ने भी लापरवाही भी दिखाई। इसी वजह से आम लोगों ने तो दिक्कत झेली ही, कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ा।
विज्ञापन
एटीएम में दो हजार के नोट लोड न करने से बढ़ी परेशानी
ब्लैक मनी के तौर पर दो हजार के नोटों की जमाखोरी के संकेत
ब्लैक मनी के तौर पर जमाखोरी किए जाने की वजह से साल भर में ही दो हजार के नोटों की अच्छी-खासी कमी हो गई है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि बैंकों से दो हजार की जितनी करेंसी जा रही है, उसके मुकाबले उसकी वापसी 30 से 40 फीसदी भी नहीं हो पा रही। दो हजार के नोट डंप होने से वित्त मंत्रालय के साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की भी चिंता बढ़ रही है। ऐसे में एटीएम में दो हजार के नोट लोड करने में कटौती की जा रही है। हालांकि इसका साइड एफेक्ट यह भी है कि एटीएम में छोटे नोट डाले जाने की वजह से ज्यादा करेंसी नहीं लोड हो पा रही है। दो हजार के नोटों से जहां 30 से 40 लाख तक कैश एटीएम में लोड हो रहा था, वहीं अब सौ, दौ सौ और पांच सौ नोटों से यह कैश 20 से 25 लाख तक ही लोड हो पा रहा है। इससे एटीएम जल्द खाली हो रहे हैं। दूसरी परेशानी यह भी है कि पहले 15 से 20 हजार रुपये तक कैश एक बार में निकल पा रहा था, अब छोटे नोटों की वजह से पांच-सात हजार से ज्यादा कैश एक बार में नहीं निकल रहा। ग्राहकों को ज्यादा बार निकासी करने से अतिरिक्त निकासी पर अलग फीस भी भुगतनी पड़ रही है।
विज्ञापन
प्लास्टिक करेंसी से भी परहेज
कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा देने के बावजूद तमाम दुकानदार, डायग्नोस्टिक सेंटर, अस्पताल वाले भी एटीएम कार्ड से पेमेंट नहीं ले रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने पर उन्हें उसका पूरा पेमेंट कागजों पर दिखाना होता है। इसलिए टैक्स चोरी के लिए नकद भुगतान पर जोर दिया जा रहा है।
यह सही है जमाखोरी रोकने के लिए दो हजार के नोट पर शिकंजा कसना जरूरी है मगर यह भी जरूरी है कि सरकार इसकी सप्लाई में संतुलन दिखाए ताकि आम पब्लिक को इसका दुष्प्रभाव न झेलना पड़े। - मोहित टंडन, चार्टर्ड अकाउंटेंट
दो हजार नोटों के डंप होने का बड़ा कारण रिश्वतखोरी भी है। इस कालेधन को छिपाने के लिए दो हजार के नोटों को बड़े पैमाने पर इकट्ठा किया जा रहा है। केंद्र सरकार इस पर फिर कोई कड़ा एक्शन उठाए।
- अंकित मिश्रा, अधिवक्ता इनकम टैक्स
सरकार कैशलेस को बढ़ावा तो दे रही है लेकिन अभी उतनी सुविधाएं नहीं है। इसलिए अभी भी कैश लेनदेन पर लोगों को ज्यादा विश्वास है। दो हजार नोट में कमी करने में ग्राहक और कारोबारी दोनों को परेशानी हो रही है। - राजेंद्र गुप्ता, व्यापारी