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जिला उद्यान अधिकारी का रामपुर ट्रांसफर, भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई थी आवाज
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बरेली। प्रशासन के एक आला अफसर का साथ मिला तो भ्रष्टाचार के तमाम मामलों में घिरे उद्यान विभाग के उपनिदेशक ने आखिरकार बाजी पलट ही दी। लाभार्थियों का भुगतान उनके बजाय दूसरों के खातों में भेजने जैसे कई नियमविरुद्ध कामों का विरोध करने वाली जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पूजा को एक महीना गुजरने से पहले ही फिर रामपुर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके उलट भ्रष्टाचार के मामले में जेल जा चुके और इस अवधि का वेतन भी हासिल कर लेने के आरोपी उपनिदेशक को इनाम दिया गया है। उपनिदेशक रहने के साथ वह बरेली और शाहजहांपुर समेत दो जिलों में जिला उद्यान अधिकारी का भी काम संभालेंगे। भ्रष्टाचार के खात्मे का नारा देने वाली भाजपा सरकार में यह फैसला सवालों के घेरे में है।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पूजा का अपने ही उपनिदेशक मनोहर सिंह से काफी समय से टकराव चल रहा था। इसी टकराव की वजह से लोकसभा चुनाव से पहले डॉ. पूजा का ट्रांसफर रामपुर कर दिया गया था। लेकिन पिछले ही महीने डॉ. पूजा को फिर बरेली में तैनात कर दिया गया। उनके यहां चार्ज लेते ही फिर यह जंग शुरू हो गई। चार्ज लेने के कुछ ही दिन बाद डॉ. पूजा को सीडीओ की ओर से नोटिस देकर पूछा गया कि उन्होंने चार्ज लेने से पहले डीएम को योगदान आख्या क्यों नहीं दी। इसके बाद कई और आरोपों में उनके खिलाफ विभागीय पत्र शासन को लिखे गए। उनके खिलाफ जांच समिति भी बना दी गई। सफाई देने के बाद भी लगातार निशाने पर रही डॉ. पूजा ने पिछले दिनों सीडीओ को एक पत्र लिखकर उपनिदेशक का सारा कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया था। इस पत्र में प्रशासन की कार्रवाई पर भी तमाम सवाल उठाए थे, मगर फिर भी मंगलवार को शासन ने उनका फिर रामपुर तबादला कर दिया गया। उधर, मुख्यालय ने बरेली और शाहजहांपुर में जिला उद्यान अधिकारी पद पर कोई तैनाती नहीं की है। उपनिदेशक के साथ दोनों जिलों में यह पद भी मनोहर सिंह ही संभालेंगे।
ईमानदार हूं और महिला.. इसलिए मेरा उत्पीड़न
मैं तनाव में, मेरे साथ कुछ हुआ तो उत्पीड़न करने वाले होंगे जिम्मेदार
सीडीओ को लिखे पत्र में डॉ. पूजा ने साफ लिखा कि वह ईमानदारी से काम करने पर अड़ी रहीं और महिला हैं इसीलिए उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। यहां तक कि तमाम बार उच्चाधिकारियों को उन्होंने वस्तुस्थिति से अवगत कराया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं की गई। ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है ताकि मनोहर सिंह को मनमाने ढंग से काम करने का मौका मिल जाए। महिला होने के कारण ही उनकी बात सुने बगैर ही उनका ट्रांसफर करा दिया गया लेकिन उनकी ओर से तमाम बार लिखने के बावजूद भ्रष्टाचार के मामलों में मनोहर सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। उनका पक्ष सुने बगैर ही बगैर किसी आधार के उनका वेतन भी रोक दिया गया है। इस वजह से वह बेहद तनाव में हैं। उनके परिवार पर असर पड़ रहा है। अगर उनके या उनके परिवार के साथ कुछ हुआ तो उत्पीड़न करने वाले अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे।
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इतना भ्रष्टाचार.. फिर भी मिला उपहार
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पूजा की ओर से सीडीओ को लिखे पत्र में उपनिदेशक पर जो आरोप लगाते हुए साक्ष्य दिए गए हैं, वह काफी गंभीर है। भ्रष्टाचार के यह साक्ष्य नीचे से ऊपर तक के सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठा रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की उपनिदेशक के खिलाफ बरेली और मेरठ दो मंडलों में जांच जारी है फिर भी वह बरेली में अपनी तैनाती कराने में सफल रहे।
1- पीएमकेएसवाई के तहत माया देवी सागर नाम की लाभार्थी के अनुदान का करीब 29 हजार किसी अज्ञात खाते में भेज दिया। निदेशालय ने दोबारा बिल भुगतान न करने का आदेश दिया मगर फिर भी भुगतान कर दिया गया।
2- दैनिक श्रमिकों के विनियमितिकरण पर शासन की रोक होने के बावजूद इसके लिए दबाव। उच्चाधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखे पर नहीं आया कोई जवाब।
3- मंडल में प्रधान चौधरी पदों पर कनिष्ठ महिला कर्मचारियों की तैनाती। दो वरिष्ठ कर्मचारियों की ज्येष्ठता सूची में गड़बड़। इस संबंध में भी लिखा पर कुछ नहीं हुआ।
4- शाहजहांपुर में डीएचओ पद पर तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार के मामले में 31 अक्टूबर 2015 को जेल गए, जेल में रहने की भी अवधि का वेतन लिया। निलंबित भी नहीं हुए। उल्टे पदोन्नति और करा ली।
5- बुलंदशहर में पहली तैनाती के दौरान ही सतर्कता जांच हुई और फिर बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा। फिलहाल मामला मेरठ की अदालत में विचाराधीन है।
शाहजहांपुर के डीएचओ भी हटाए गए
मुख्यालय ने ट्रांसफर सीजन के बाद कई और ट्रांसफर किए हैं। शाहजहांपुर के डीएचओ जयराम वर्मा को राजकीय उद्यान में अधीक्षक बनाया है। यहां से महेश श्रीवास्तव को उन्नाव और राजेंद्र कुमार यादव को बस्ती में तैनात किया गया है।
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पूजा का अपने ही उपनिदेशक मनोहर सिंह से काफी समय से टकराव चल रहा था। इसी टकराव की वजह से लोकसभा चुनाव से पहले डॉ. पूजा का ट्रांसफर रामपुर कर दिया गया था। लेकिन पिछले ही महीने डॉ. पूजा को फिर बरेली में तैनात कर दिया गया। उनके यहां चार्ज लेते ही फिर यह जंग शुरू हो गई। चार्ज लेने के कुछ ही दिन बाद डॉ. पूजा को सीडीओ की ओर से नोटिस देकर पूछा गया कि उन्होंने चार्ज लेने से पहले डीएम को योगदान आख्या क्यों नहीं दी। इसके बाद कई और आरोपों में उनके खिलाफ विभागीय पत्र शासन को लिखे गए। उनके खिलाफ जांच समिति भी बना दी गई। सफाई देने के बाद भी लगातार निशाने पर रही डॉ. पूजा ने पिछले दिनों सीडीओ को एक पत्र लिखकर उपनिदेशक का सारा कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया था। इस पत्र में प्रशासन की कार्रवाई पर भी तमाम सवाल उठाए थे, मगर फिर भी मंगलवार को शासन ने उनका फिर रामपुर तबादला कर दिया गया। उधर, मुख्यालय ने बरेली और शाहजहांपुर में जिला उद्यान अधिकारी पद पर कोई तैनाती नहीं की है। उपनिदेशक के साथ दोनों जिलों में यह पद भी मनोहर सिंह ही संभालेंगे।
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ईमानदार हूं और महिला.. इसलिए मेरा उत्पीड़न
मैं तनाव में, मेरे साथ कुछ हुआ तो उत्पीड़न करने वाले होंगे जिम्मेदार
सीडीओ को लिखे पत्र में डॉ. पूजा ने साफ लिखा कि वह ईमानदारी से काम करने पर अड़ी रहीं और महिला हैं इसीलिए उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। यहां तक कि तमाम बार उच्चाधिकारियों को उन्होंने वस्तुस्थिति से अवगत कराया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं की गई। ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है ताकि मनोहर सिंह को मनमाने ढंग से काम करने का मौका मिल जाए। महिला होने के कारण ही उनकी बात सुने बगैर ही उनका ट्रांसफर करा दिया गया लेकिन उनकी ओर से तमाम बार लिखने के बावजूद भ्रष्टाचार के मामलों में मनोहर सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। उनका पक्ष सुने बगैर ही बगैर किसी आधार के उनका वेतन भी रोक दिया गया है। इस वजह से वह बेहद तनाव में हैं। उनके परिवार पर असर पड़ रहा है। अगर उनके या उनके परिवार के साथ कुछ हुआ तो उत्पीड़न करने वाले अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे।
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इतना भ्रष्टाचार.. फिर भी मिला उपहार
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पूजा की ओर से सीडीओ को लिखे पत्र में उपनिदेशक पर जो आरोप लगाते हुए साक्ष्य दिए गए हैं, वह काफी गंभीर है। भ्रष्टाचार के यह साक्ष्य नीचे से ऊपर तक के सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठा रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की उपनिदेशक के खिलाफ बरेली और मेरठ दो मंडलों में जांच जारी है फिर भी वह बरेली में अपनी तैनाती कराने में सफल रहे।
1- पीएमकेएसवाई के तहत माया देवी सागर नाम की लाभार्थी के अनुदान का करीब 29 हजार किसी अज्ञात खाते में भेज दिया। निदेशालय ने दोबारा बिल भुगतान न करने का आदेश दिया मगर फिर भी भुगतान कर दिया गया।
2- दैनिक श्रमिकों के विनियमितिकरण पर शासन की रोक होने के बावजूद इसके लिए दबाव। उच्चाधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखे पर नहीं आया कोई जवाब।
3- मंडल में प्रधान चौधरी पदों पर कनिष्ठ महिला कर्मचारियों की तैनाती। दो वरिष्ठ कर्मचारियों की ज्येष्ठता सूची में गड़बड़। इस संबंध में भी लिखा पर कुछ नहीं हुआ।
4- शाहजहांपुर में डीएचओ पद पर तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार के मामले में 31 अक्टूबर 2015 को जेल गए, जेल में रहने की भी अवधि का वेतन लिया। निलंबित भी नहीं हुए। उल्टे पदोन्नति और करा ली।
5- बुलंदशहर में पहली तैनाती के दौरान ही सतर्कता जांच हुई और फिर बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा। फिलहाल मामला मेरठ की अदालत में विचाराधीन है।
शाहजहांपुर के डीएचओ भी हटाए गए
मुख्यालय ने ट्रांसफर सीजन के बाद कई और ट्रांसफर किए हैं। शाहजहांपुर के डीएचओ जयराम वर्मा को राजकीय उद्यान में अधीक्षक बनाया है। यहां से महेश श्रीवास्तव को उन्नाव और राजेंद्र कुमार यादव को बस्ती में तैनात किया गया है।