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पदोन्नत हुए जेई फिर बरेली जोन में तैनात, शिकायत हुई तो वापस किए
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जेई पोस्टिंग में हुए घोटाले से बरेली जोन कार्यालय संदेह के घेरे में
जोन में दस साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पदोन्नत जेई उसी जोन में नहीं किए जाने थे तैनात
बरेली। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम कार्यालय ने दो माह पहले पदोन्नत हुए जेई पोस्टिंग में घोटाला कर दिया है। निदेशक कार्मिक स्तर पर हुई गड़बड़ी मिलने पर बरेली से दो जेई वापस कर दिए गए हैं। इसमें बरेली जोन कार्यालय संदेह के घेेरे में आ गया है। सूत्रों के मुताबिक जोन में दस साल का कार्यकाल पूरा करने वाले जेई पदोन्नति पर उसी जोन में तैनात नहीं किए जाने थे।
यहां बता दें कि दो माह पहले प्रदेश भर में अवर अभियंता (जेई) पदोन्नत हुए थे। इसके बाद उन्हें उपखंड अधिकारी के पद पर तैनाती मिलनी थी। बरेली जोन से तीन जेई पदोन्नत हुए, पदोन्नति के बाद उन्हें मध्यांचल निगम आवंटित हो गया। मनमाफिक पोस्टिंग के लिए निदेशक कार्मिक कार्यालय में खेल शुरू हुआ और जोन में दस साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पदोन्नत जेई फिर उसी जोन में तैनात कर दिए गए।
नवीन शंखधार ठेकेदार ने भी अपने खास एसडीओ को बरेली लाने की कोशिश की तो अफसरों ने कह दिया कि दस साल का कार्यकाल पूरे करने वाले पदोन्नत जेई को उसी जोन में पोस्ट नहीं किया जा सकता है। इस पर ठेकेदार ने बरेली जोन में आए हीरालाल गुप्ता और जगदीश सिंह का नाम बता दिया। जांच हुई तो पता चला कि दोनों कर्मी जोन में अपना दस साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, तब कैसे बरेली जोन में तैनाती हुई?
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यह मामला जब मध्यांचल के एमडी संजय गोयल तक पहुंचा तो उन्होंने निदेशक कार्मिक को तलब किया। कलई खुलते ही निदेशक कार्मिक ने तुरंत संशोधित आदेश जारी कर दोनों कर्मियाें की तैनाती रद्द कर उन्हें वापस बुला लिया। इस प्रकरण से बरेली जोन कार्यालय भी संदेह के घेरे में आ गया है। यहां बता दें कि जोन कार्यालय इससे पहले भी विवादित कर्मियों को मनमाफिक पोस्टिंग देने के लिए चर्चित रहा है।
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जोन में दस साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पदोन्नत जेई उसी जोन में नहीं किए जाने थे तैनात
बरेली। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम कार्यालय ने दो माह पहले पदोन्नत हुए जेई पोस्टिंग में घोटाला कर दिया है। निदेशक कार्मिक स्तर पर हुई गड़बड़ी मिलने पर बरेली से दो जेई वापस कर दिए गए हैं। इसमें बरेली जोन कार्यालय संदेह के घेेरे में आ गया है। सूत्रों के मुताबिक जोन में दस साल का कार्यकाल पूरा करने वाले जेई पदोन्नति पर उसी जोन में तैनात नहीं किए जाने थे।
यहां बता दें कि दो माह पहले प्रदेश भर में अवर अभियंता (जेई) पदोन्नत हुए थे। इसके बाद उन्हें उपखंड अधिकारी के पद पर तैनाती मिलनी थी। बरेली जोन से तीन जेई पदोन्नत हुए, पदोन्नति के बाद उन्हें मध्यांचल निगम आवंटित हो गया। मनमाफिक पोस्टिंग के लिए निदेशक कार्मिक कार्यालय में खेल शुरू हुआ और जोन में दस साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पदोन्नत जेई फिर उसी जोन में तैनात कर दिए गए।
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नवीन शंखधार ठेकेदार ने भी अपने खास एसडीओ को बरेली लाने की कोशिश की तो अफसरों ने कह दिया कि दस साल का कार्यकाल पूरे करने वाले पदोन्नत जेई को उसी जोन में पोस्ट नहीं किया जा सकता है। इस पर ठेकेदार ने बरेली जोन में आए हीरालाल गुप्ता और जगदीश सिंह का नाम बता दिया। जांच हुई तो पता चला कि दोनों कर्मी जोन में अपना दस साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, तब कैसे बरेली जोन में तैनाती हुई?
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यह मामला जब मध्यांचल के एमडी संजय गोयल तक पहुंचा तो उन्होंने निदेशक कार्मिक को तलब किया। कलई खुलते ही निदेशक कार्मिक ने तुरंत संशोधित आदेश जारी कर दोनों कर्मियाें की तैनाती रद्द कर उन्हें वापस बुला लिया। इस प्रकरण से बरेली जोन कार्यालय भी संदेह के घेरे में आ गया है। यहां बता दें कि जोन कार्यालय इससे पहले भी विवादित कर्मियों को मनमाफिक पोस्टिंग देने के लिए चर्चित रहा है।