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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह- बूढ़ी ‘कन्याओं’ का ब्याह कराने में एडीओ और वीडीओ भी नपेंगे
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बीडीओ की अधूरी जांच रिपोर्ट खारिज, जिम्मेदारों को भी भी चिह्नित करने का निर्देश
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नवाबगंज में नाती-पोतों वाली महिलाओं का भी विवाह कराकर हड़पी गई थी रकम
बरेली। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत नवाबगंज में नाती-पोतों वाली उम्रदराज ‘कन्याओं’ का विवाह कराकर अनुदान की रकम हड़प लेने का मामला सामने आने के बाद जांच में लाभार्थियों को तो अपात्र बताकर रिकवरी की संस्तुति कर दी गई लेकिन जिन सरकारी कर्मचारियों ने यह गोलमाल कराया, उन्हें चिह्नित नहीं किया गया। समाज कल्याण अधिकारी ने जांच रिपोर्ट को अपूर्ण बताकर इस मामले में एडीओ और वीडीओ की भी भूमिका स्पष्ट करने को कहा। वीडीओ को प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए एडीओ समाज कल्याण से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
बुधवार को अमर उजाला ने सामूहिक विवाह योजना में हुए फर्जीवाड़ा में अपात्रों के विवाह में जिम्मेदारों पर कार्रवाई न करने पर ‘अपात्रों को नोटिस जारी... चहेतों को बचा रहे अफसर’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। फजीहत होते देख अब अफसरों ने अपात्रों के साथ जिम्मेदारों की भी भूमिका को संदिग्ध मानते हुए एक बार फिर जांच कर साक्ष्य समेत रिपोर्ट मांगी है। समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित ने बताया कि नवाबगंज में 14 नवंबर को सामूहिक विवाह के तहत 53 जोड़ों का विवाह हुआ। विवाह संपन्न होने के बाद फाजिलपुर के ही रहने वाले भगवान ने योजना का लाभ लेने के लिए ‘कन्याओं’ के फर्जीवाड़ा की शिकायत की थी। मामले पर जांच एसडीएम नवाबगंज को सौंपी गई थी। बुधवार को जांच रिपोर्ट मिली लेकिन उसमें कन्याओं को अपात्र बताया गया और वीडीओ की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। लेकिन अपात्र अथवा वीडीओ की भूमिका को संदिग्ध साबित करने के लिए साक्ष्य संलग्न नहीं थे। ऐसे में कार्रवाई का कोई ठोस आधार न होने पर एक बार फिर जांच कर मय साक्ष्य समेत रिपोर्ट मंगाई गई है। करीब हफ्ते भर में रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद योजना को पलीता लगाने वाले अपात्र समेत जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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नवाबगंज में नाती-पोतों वाली महिलाओं का भी विवाह कराकर हड़पी गई थी रकम बरेली। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत नवाबगंज में नाती-पोतों वाली उम्रदराज ‘कन्याओं’ का विवाह कराकर अनुदान की रकम हड़प लेने का मामला सामने आने के बाद जांच में लाभार्थियों को तो अपात्र बताकर रिकवरी की संस्तुति कर दी गई लेकिन जिन सरकारी कर्मचारियों ने यह गोलमाल कराया, उन्हें चिह्नित नहीं किया गया। समाज कल्याण अधिकारी ने जांच रिपोर्ट को अपूर्ण बताकर इस मामले में एडीओ और वीडीओ की भी भूमिका स्पष्ट करने को कहा। वीडीओ को प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए एडीओ समाज कल्याण से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
बुधवार को अमर उजाला ने सामूहिक विवाह योजना में हुए फर्जीवाड़ा में अपात्रों के विवाह में जिम्मेदारों पर कार्रवाई न करने पर ‘अपात्रों को नोटिस जारी... चहेतों को बचा रहे अफसर’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। फजीहत होते देख अब अफसरों ने अपात्रों के साथ जिम्मेदारों की भी भूमिका को संदिग्ध मानते हुए एक बार फिर जांच कर साक्ष्य समेत रिपोर्ट मांगी है। समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित ने बताया कि नवाबगंज में 14 नवंबर को सामूहिक विवाह के तहत 53 जोड़ों का विवाह हुआ। विवाह संपन्न होने के बाद फाजिलपुर के ही रहने वाले भगवान ने योजना का लाभ लेने के लिए ‘कन्याओं’ के फर्जीवाड़ा की शिकायत की थी। मामले पर जांच एसडीएम नवाबगंज को सौंपी गई थी। बुधवार को जांच रिपोर्ट मिली लेकिन उसमें कन्याओं को अपात्र बताया गया और वीडीओ की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। लेकिन अपात्र अथवा वीडीओ की भूमिका को संदिग्ध साबित करने के लिए साक्ष्य संलग्न नहीं थे। ऐसे में कार्रवाई का कोई ठोस आधार न होने पर एक बार फिर जांच कर मय साक्ष्य समेत रिपोर्ट मंगाई गई है। करीब हफ्ते भर में रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद योजना को पलीता लगाने वाले अपात्र समेत जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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