फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Chinmayanand bari by court

फैसले से प्रसन्न, अभी कोई बात नहीं

Sat, 27 Mar 2021 01:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 27 Mar 2021 01:42 AM IST
विज्ञापन
Chinmayanand bari by court
स्वामी चिन्मयानंद। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
शाहजहांपुर। होली से पहले शुक्रवार को मुमुक्षु आश्रम में रौनक लौटी। स्वामी चिन्मयानंद को कोर्ट से बड़ी राहत मिली। उन्होंने ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। अन्य किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी। संभव है, वह आगे कुछ कहें।
विज्ञापन

स्वामी चिन्मयानंद और छात्रा प्रकरण का शुक्रवार को पटाक्षेप हो गया। कोर्ट ने चिन्मयानंद को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया। वहीं छात्रा और उसके साथियों को भी ब्लैकमेल करने व अन्य आरोपों से मुक्त कर दिया। दोनो ही पक्ष फैसले से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन

पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना यह घटनाक्रम 24 अगस्त 2019 से शुरू होकर 26 मार्च 2021 तक चर्चा में रहा। इस दौरान चिन्मयानंद को दो महीने 19 दिन तक जेल में भी रहना पड़ा। मामले में सीजेएम कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दखल रहा। वहीं छात्रा और उसके सहयोगी रहे संजय, दुर्गेश उर्फ विक्रम को भी लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के मुताबिक कोर्ट ने माना कि दोनों ही मामलों में पर्याप्त सुबूत नहीं हैं। छात्रा ने बयान दिया था कि उसने दबाव में आरोप लगाए थे। इसके बाद फैसला चिन्मयानंद के पक्ष में आने की उम्मीद थी। वहीं रंगदारी के मामले में अदालत को पर्याप्त सुबूत नहीं मिले। दोनों ही पक्षों के सुबूत न देने के कारण अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
सच की जीत हुई जीत
रंगदारी और सुबूत मिटाने के आरोपी रहे वर्तमान में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भाजपा नेता डीपीएस राठौर ने फैसले के बाद संतुष्टि जताते हुए कहा कि अदालत से न्याय की उम्मीद थी। आज न्याय की जीत हुई है। अदालत के फैसले ने साबित किया कि वह निर्दोष थे।
चिन्मयानंद के खिलाफ राजनीतिक साजिश हुई
चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने कहा कि न्याय की जीत हुई है। छात्रा के बयान के बाद साफ हो गया था कि उनके मुवक्किल चिन्मयानंद के खिलाफ राजनीतिक साजिश हुई थी। अदालत के फैसले से यह साबित हो गया।
ब्लैकमेल के आरोप से छात्रा और अन्य आरोपी भी बरी
फैसले के वक्त परिवार के साथ कोर्ट में मौजूद रही छात्रा
लखनऊ। दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली छात्रा और उसके तीन साथियों पर भी चिन्मयानंद उफ़ॱर कृष्णपाल सिंह को ब्लैकमेल करके पांच करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप लगा था। एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।
शुक्रवार को फैसला सुनाने के वक्त आरोपी छात्रा अपने परिवार के साथ मौजूद रही। कोर्ट ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। गौरतलब है कि 25 अगस्त 2019 को मामले की रिपोर्ट वादी और वकील ओम सिंह ने कोतवाली, शाहजहांपुर में दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया कि अज्ञात व्यक्ति ने फ ोन से पांच करोड़ की मांग करते हुए धमकी दी कि यदि रुपयों का इंतजाम नहीं किया तो वीडियो वायरल करके समाज में बदनाम कर देगा। वादी ने कहा कि एक साजिश के तहत कुछ लोग धन उगाही व चरित्र हनन का प्रयास कर रहे हैं और शिक्षण संस्थान को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना की और चार नवंबर 2019 को एलएलएम की छात्रा समेत संजय सिंह, विक्त्रस्म सिंह, सचिन सिंह और साजिश रचने के लिए डीपी सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में दोनो मामलों की सुनवाई लखनऊ हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले में निर्णय सुनाया।
ऐसे घटा घटनाक्रम
24 अगस्त 2019: स्वामी चिन्मयानंद के कॉलेज एसएस लॉ कॉलेज की छात्रा (23) ने फेसबुक पर अपना वीडियो डालकर चिन्मयानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाया।
25 अगस्त 2019- छात्रा के पिता ने स्वामी चिन्मयानंद व अन्य पर बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए तहरीर दी।
26 अगस्त 2019-चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने अज्ञात नंबर से पांच करोड़ की फिरौती मांगे जाने की रिपोर्ट चौक कोतवाली में दर्ज कराई। एसपी ने छात्रा की बरामदगी के लिए तीन टीमें गठित की।
27 अगस्त 2019- पुलिस ने चिन्मयानंद के खिलाफ छात्रा के अपहरण की एफआइआर दर्ज की।
30 अगस्त 2019- छात्रा को उप्र पुलिस ने राजस्थान के दौसा में मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के पास से बरामद किया।
2 सितंबर 2019- सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम के गठन का आदेश दिया।
3 सितंबर 2019-डीजीपी ने आईजी नवीन अरोड़ा के अधीन एसआइटी का गठन किया।
10 सितंबर 2019- चिन्मयानंद और एक लड़की के बीच मालिश का एक कथित वीडियो वायरल हुआ।
16 सितंबर 2019- छात्रा को कोर्ट लाया गया। धारा 164 से तहत छात्रा के कलमबंद बयान दर्ज किए गए।
20 सितंबर 2019- एसआईटी ने चिन्मयानंद को उनके आश्रम से गिरफ्तार किया और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। संजय, विक्रम और सचिन को चिन्मयानंद से ब्लैकमेलिंग में गिरफ्तार कर जेल भेजा।
25 सितंबर 2019-एसआइटी ने छात्रा को भी ब्लैकमेलिंग में जेल भेज दिया।
नवंबर में एसआईटी ने कोर्ट में अपनी चार्जशीट दाखिल की। इसमें वर्तमान में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष डीपीएस राठौर और पूर्व जिला महामंत्री अजीत सिंह को भी ब्लैकमेलिंग और साक्ष्य मिटाने का आरोपी बनाया।

छह नवंबर 2019-एसआईटी ने सीजेएम कोर्ट में दुष्कर्म व ब्लैकमेलिंग के मामले में चार्जशीट दाखिल की।
11 दिसंबर 2019- दुष्कर्म पीड़ित छात्रा को जमानत पर जेल से रिहा किया गया।
5 फरवरी 2020- हाईकोर्ट से जमानत के बाद चिन्मयानंद जेल से रिहा हुए।
नौ अक्तूबर 2020- एमपीएमएलए कोर्ट में छात्रा ने बयान दिए कि उसने दबाव में चिन्मयानंद पर आरोप लगाए थे।
26 मार्च 2021- दुष्कर्म के मामले में चिन्मयानंद को एमपीएमएलए कोर्ट ने दोषमुक्त किया। रंगदारी के आरोप से सचिन, दुर्गेश उर्फ विक्रम, संजय, छात्रा, डीपीएस राठौर, अजीत सिंह बरी किए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed