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Bareilly News: वैक्सीन परीक्षण में चूजों की नहीं जाएगी जान, सेल कल्चर से गुणवत्ता परखेंगे वैज्ञानिक

Wed, 30 Apr 2025 02:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Apr 2025 02:48 AM IST
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Chicks will not die in vaccine testing, scientists will test the quality through cell culture
बरेली। जानलेवा इनफेक्शियस बर्सल डिजीज (आईबीडी) के प्रति सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए प्रयोगशाला में तैयार इम्यून कॉम्पलेक्स वैक्सीन के परीक्षण में चूजों का जीवन दांव पर होता है। उनको बेहिसाब दर्द से गुजरना पड़ता है। इससे निजात दिलाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के जैविक मानकीकरण विभाग के वैज्ञानिकों ने चिकन डेंड्राइटिक सेल कल्चर आधारित वैकल्पिक मॉडल तैयार करने में सफलता हासिल की है। लिहाजा, अब वैक्सीन की गुणवत्ता परखने के लिए चूजों को चैलेंज डोज देना जरूरी नहीं होगा।
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जैविक मानकीकरण विभाग की वैज्ञानिक डॉ. शाइमा के लतीफ के मुताबिक पशु-पक्षियों को रोगमुक्त बनाने के लिए देश समेत विदेशों में तैयार हो रही वैक्सीन की जांच आईवीआरआई जैविक मानकीकरण विभाग करता है। आईबीडी के प्रति सुरक्षा कवच के लिए बनाई गई वैक्सीन की जांच के लिए चूजे को अंडे से बाहर निकलने के करीब दो सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता था। वैक्सीन देने के बाद करीब दस दिन एंटीबॉडी बनने में लगते हैं। इस दौरान भी चूजे के आईबीडी से संक्रमित होने की आशंका रहती है। संक्रमण के बाद वैक्सीन का प्रभाव नहीं होता।
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लिहाजा, देश की कुछे एक फार्मा कंपनियों ने इम्यून कॉम्पलेक्स वैक्सीन बनानी शुरू की। जो अंडे के एंब्रियो यानी भ्रूणावस्था में या अंडे से तुरंत निकले चूजे को लगती है। ताकि शुरुआत में ही आईबीडी रोग के प्रति सुरक्षा कवच मिल सके। इसमें भी वैक्सीन परीक्षण के दौरान चूजाें की जान दांव पर होती है। इससे निजात के लिए करीब दो वर्ष तक चले शोध और क्रमवार ट्रायल के बाद सेल कल्चर आधारित वैकल्पिक मॉडल तैयार किया। ताकि अंडे भी सुरक्षित रहें और चूजों को भी जान न गंवानी पड़े।
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वर्ष 2022 में वैज्ञानिकों ने शुरू किया था शोधकार्य
सेल कल्चर वैकल्पिक टेस्टिंग मॉडल बनाने के लिए जैविक मानकीकरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रणव धर के नेतृत्व में वैज्ञानिक डॉ. श्यामा के लतीफ के साथ वैज्ञानिक डॉ. विक्रमादित्य उपमन्यु, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. के धामा और शोधार्थियों ने शोध शुरू किया। वर्ष 2024 में सेल कल्चर आधारित वैकल्पिक टेस्टिंग मॉडल तैयार कर लिया गया। ट्रायल सफल रहा। अब आईवीआरआई के वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने में जुटे हैं।


कुक्कुट में बेहद घातक और संक्रामक है आईबीडी
वैज्ञानिकों के मुताबिक आईबीडी से संक्रमित चूजों व मुर्गियों में अवसाद, दस्त, सांस लेने में परेशानी, बर्सल क्षति, बी कोशिकाओं की कमी हो जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से घटती है और उनकी मौत हो जाती है। जिससे पोल्ट्री किसानों को बेहद नुकसान होता है। आईबीडी इम्यून कॉम्पलेक्स वैक्सीन से भ्रूणावस्था में ही जब एंटीबॉडी बनने की शुरुआत हो जाएगी, तो उनके सुरक्षित होने की संभावना ज्यादा होगी। ब्यूरो
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