{"_id":"59fe22124f1c1b65548bb0dc","slug":"cadar-kaddavar-is-all-slow-tickets-become-insurance","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैडर-कद्दावर सब धीमा.. टिकट का हो गया ‘बीमा’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैडर-कद्दावर सब धीमा.. टिकट का हो गया ‘बीमा’
बरेली।
Updated Sun, 05 Nov 2017 01:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
भाजपा में मेयर टिकट की लड़ाई और दिलचस्प होती जा रही है। इस लड़ाई में ‘जीवन बीमा बनाम कैडर’ का ऐसा पेच फंसा हुआ है जो नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी टिकट का फैसला नहीं होने दे रहा है। दरअसल मेयर टिकट के एक दावेदार का पांच करोड़ का बीमा करने वाले भाजपा बृज क्षेत्र के एक बड़े पदाधिकारी की उनके पक्ष में तगड़ी पैरवी कैडर पर भारी पड़ रही है। यह पदाधिकारी खुद तो इस दावेदार की पैरवी कर ही रहे हैं, वह पार्टी में जिस पूर्व मुख्यमंत्री की परछाई माने जाते हैं, उनके बेटे से भी अपने चहेते दावेदार की पैरवी शुरू करा दी है। यही नहीं, चुनाव घोषित होने से ऐन पहले इस दावेदार ने भाजपा के दूसरे बड़े पदाधिकारियों को भी साधना शुरू कर दिया था। वे भी अब उसकी पैरवी कर रहे हैं। दूसरी ओर, कैडर और संघ के लोग इस दावेदार के विरोध में पूरा दम लगाए हुए हैं। इसी का नतीजा है कि भाजपा के मेयर टिकट की घोषणा नहीं हो पा रही है।
भाजपा में मेयर टिकट के लिए 37 दावेदारों ने आवेदन किया था, लेकिन शुरुआत से ही पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इनमें से छह-सात नामों को ही गंभीरता से लिया। इनमें एक शिक्षण संस्थान चलाने वाले रईस नेता, हॉस्पिटल चलाने के साथ पैसा खर्च करने वाले संघ से जुड़े नेता, एक धाकड़ नेता, स्वच्छ छवि के होम्योपैथिक डॉक्टर, पैसे वाले एक युवा डॉक्टर और एक कद्दावर नेता के चहेते दावेदार शामिल थे। पार्टी नेतृत्व इन सब नामों पर विचार कर रहा था लेकिन इसी बीच एक पैसे वाले दावेदार ने खेल कर दिया। इसके बाद प्रत्याशी के लिए एक नाम तय करना पूरी पार्टी को भारी पड़ रहा है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने तीन दिन पहले आगरा और लखनऊ की बैठक में नाम फाइनल कर लिए जाने की बात कही थी। इसके बाद एक नेता का टिकट फाइनल होने की चर्चा ने जोर पकड़ा। मगर इसके बाद भी टिकट की घोषणा नहीं हो पाई।
सूत्र यह घोषणा रुकने के पीछे ‘बीमा बनाम कैडर’ के पेच को कारण बता रहे हैं। इसके पीछे की कहानी यह है कि भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी ने अपने परिवार के नाम से एक बीमा कंपनी की एजेंसी ले रखी है। इसी एजेंसी के जरिये टिकट के एक दावेदार के परिवार का पांच करोड़ का बीमा किया गया है, जिसमें मिला मोटा कमीशन इस पदाधिकारी को दावेदार के टिकट की पैरवी के लिए बाध्य कर रहा है। कुछ और पार्टी पदाधिकारी जिन्हें चुनाव के ऐन मौके पर इस दावेदार ने साधा है, वे भी उसकी पूरी पैरवी कर रहे हैं। यह बात पता लगने के बाद कैडर वालों ने इसे पार्टी में मुद्दा बना दिया है।
विज्ञापन
बता दें कि एक प्रदेश स्तरीय युवा पदाधिकारी के अलावा भाजपा की पहली पंक्ति के एक नेता भी इस दावेदार की पैरवी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बीमा करने वाले पदाधिकारी ने राजनीति में सक्रिय एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे को ‘किसी तरह’ विश्वास में लेकर अपने प्रिय दावेदार का कट्टर पक्षकार बना लिया है। इस बेटे ने अपने पिता के माध्यम से टिकट वितरण में अहम भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी पर अपने दावेदार को ही प्रत्याशी बनाने का दबाव बना दिया है। दावेदार की इतनी जबर्दस्त पैरवी के चलते अब तक कैडर और संघ के पदाधिकारी कुछ बोल नहीं पा रहे थे, लेकिन अब यह मुद्दा पार्टी के शीर्ष स्तर पर हलचल मचाए हुए है। कैडर और संघ के लोग हाईकमान के आगे पार्टी की छवि का हवाला दे रहे हैं। यही वजह है कि टिकट की घोषणा अटक गई है।
कोट--
भाजपा के टिकट की घोषणा कुछ वजहों से रुकी थी। चूंकि अभी बरेली समेत अन्य क्षेत्रों के नामांकन में समय बाकी है। उम्मीद है कि रविवार को देर रात तक बरेली मेयर के टिकट की घोषणा हो जाएगी। - बीएल वर्मा, क्षेत्रीय अध्यक्ष भाजपा
भाजपा में मेयर टिकट के लिए 37 दावेदारों ने आवेदन किया था, लेकिन शुरुआत से ही पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इनमें से छह-सात नामों को ही गंभीरता से लिया। इनमें एक शिक्षण संस्थान चलाने वाले रईस नेता, हॉस्पिटल चलाने के साथ पैसा खर्च करने वाले संघ से जुड़े नेता, एक धाकड़ नेता, स्वच्छ छवि के होम्योपैथिक डॉक्टर, पैसे वाले एक युवा डॉक्टर और एक कद्दावर नेता के चहेते दावेदार शामिल थे। पार्टी नेतृत्व इन सब नामों पर विचार कर रहा था लेकिन इसी बीच एक पैसे वाले दावेदार ने खेल कर दिया। इसके बाद प्रत्याशी के लिए एक नाम तय करना पूरी पार्टी को भारी पड़ रहा है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने तीन दिन पहले आगरा और लखनऊ की बैठक में नाम फाइनल कर लिए जाने की बात कही थी। इसके बाद एक नेता का टिकट फाइनल होने की चर्चा ने जोर पकड़ा। मगर इसके बाद भी टिकट की घोषणा नहीं हो पाई।
विज्ञापन
सूत्र यह घोषणा रुकने के पीछे ‘बीमा बनाम कैडर’ के पेच को कारण बता रहे हैं। इसके पीछे की कहानी यह है कि भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी ने अपने परिवार के नाम से एक बीमा कंपनी की एजेंसी ले रखी है। इसी एजेंसी के जरिये टिकट के एक दावेदार के परिवार का पांच करोड़ का बीमा किया गया है, जिसमें मिला मोटा कमीशन इस पदाधिकारी को दावेदार के टिकट की पैरवी के लिए बाध्य कर रहा है। कुछ और पार्टी पदाधिकारी जिन्हें चुनाव के ऐन मौके पर इस दावेदार ने साधा है, वे भी उसकी पूरी पैरवी कर रहे हैं। यह बात पता लगने के बाद कैडर वालों ने इसे पार्टी में मुद्दा बना दिया है।
विज्ञापन
बता दें कि एक प्रदेश स्तरीय युवा पदाधिकारी के अलावा भाजपा की पहली पंक्ति के एक नेता भी इस दावेदार की पैरवी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बीमा करने वाले पदाधिकारी ने राजनीति में सक्रिय एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे को ‘किसी तरह’ विश्वास में लेकर अपने प्रिय दावेदार का कट्टर पक्षकार बना लिया है। इस बेटे ने अपने पिता के माध्यम से टिकट वितरण में अहम भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी पर अपने दावेदार को ही प्रत्याशी बनाने का दबाव बना दिया है। दावेदार की इतनी जबर्दस्त पैरवी के चलते अब तक कैडर और संघ के पदाधिकारी कुछ बोल नहीं पा रहे थे, लेकिन अब यह मुद्दा पार्टी के शीर्ष स्तर पर हलचल मचाए हुए है। कैडर और संघ के लोग हाईकमान के आगे पार्टी की छवि का हवाला दे रहे हैं। यही वजह है कि टिकट की घोषणा अटक गई है।
कोट--
भाजपा के टिकट की घोषणा कुछ वजहों से रुकी थी। चूंकि अभी बरेली समेत अन्य क्षेत्रों के नामांकन में समय बाकी है। उम्मीद है कि रविवार को देर रात तक बरेली मेयर के टिकट की घोषणा हो जाएगी। - बीएल वर्मा, क्षेत्रीय अध्यक्ष भाजपा