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मंगलसूत्र और कुंडल गिरवी रख बनवाया शौचालय
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 03 Oct 2016 01:49 AM IST
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सुमन
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गुलड़िया भवानी की सुमन गंगवार ने मंगलसूत्र और कुंडल गिरवी रखकर अपने घर में शौचालय बनवाकर स्वच्छ भारत की नई मिसाल पेश की है। सरकारी मदद के प्रयास किए लेकिन कामयाबी नहीं मिली तो खुद ही पहले जेवर गिरवी रखकर शौैचालय बनवाया और उसकी गांधी जयंती के दिन से शुरुआत की।
सुमन की दस साल पहले सोमपाल के साथ शादी हुई थी। करीब पांच साल से उनकी पत्नी घर में शौचालय बनवाने के बारे में कह रही थी, जिसके लिए ब्लाक और पंचायत से सरकारी अनुदान नहीं मिला। हार थक कर तीन महीने पहले सुमन गंगवार ने संकल्प लिया कि चाहें कुछ भी करना पड़े वह घर में शौचालय बनवाकर ही दम लेगी । इसके लिए छह हजार रुपये में अपने कुंडल गिरवी रखकर शौचालय बनवाना शुरू किया। यह रकम कम पड़ी तो एक हजार रुपये में अपना मंगलसूत्र भी गिरवी रख दिया। तब जाकर उसका शौचालय बनकर तैयार हुआ।
सुमन गंगवार और सोमपाल दोनों (पति-पत्नी) मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते हैं। पति खेतों में मजदूरी करता है, जबकि सुमन लोगों के घरों में काम करके घर चला रही हैं। करीब एक हजार की आबादी वाले इस गांव में डेढ़ सौ मकान है। इनमें से चार मकान ही ऐसे थे, जिनमें शौैचालय नहीं थे। जिसमें से अब सुमन के घर शौचालय बन गया है। तीन अन्य परिवार शौचालय के बिना रह गए हैं।
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गांव की प्रधान सारिका चौधरी का कहना है कि गांव के गरीबों के घरों में शौचालय बनवाने के लिए कई बार प्रस्ताव पास करके ब्लाक और जिला स्तरीय अधिकारियों को भेजे थे लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब भी तीन परिवार बिना शौचालय के रह गए हैं। करीब पंद्रह साल पहले यह गांव समग्र गांव घोषित हुआ था।
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सुमन की दस साल पहले सोमपाल के साथ शादी हुई थी। करीब पांच साल से उनकी पत्नी घर में शौचालय बनवाने के बारे में कह रही थी, जिसके लिए ब्लाक और पंचायत से सरकारी अनुदान नहीं मिला। हार थक कर तीन महीने पहले सुमन गंगवार ने संकल्प लिया कि चाहें कुछ भी करना पड़े वह घर में शौचालय बनवाकर ही दम लेगी । इसके लिए छह हजार रुपये में अपने कुंडल गिरवी रखकर शौचालय बनवाना शुरू किया। यह रकम कम पड़ी तो एक हजार रुपये में अपना मंगलसूत्र भी गिरवी रख दिया। तब जाकर उसका शौचालय बनकर तैयार हुआ।
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सुमन गंगवार और सोमपाल दोनों (पति-पत्नी) मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते हैं। पति खेतों में मजदूरी करता है, जबकि सुमन लोगों के घरों में काम करके घर चला रही हैं। करीब एक हजार की आबादी वाले इस गांव में डेढ़ सौ मकान है। इनमें से चार मकान ही ऐसे थे, जिनमें शौैचालय नहीं थे। जिसमें से अब सुमन के घर शौचालय बन गया है। तीन अन्य परिवार शौचालय के बिना रह गए हैं।
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गांव की प्रधान सारिका चौधरी का कहना है कि गांव के गरीबों के घरों में शौचालय बनवाने के लिए कई बार प्रस्ताव पास करके ब्लाक और जिला स्तरीय अधिकारियों को भेजे थे लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब भी तीन परिवार बिना शौचालय के रह गए हैं। करीब पंद्रह साल पहले यह गांव समग्र गांव घोषित हुआ था।