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तो मैदान से बाहर तमाशा देखेगी बसपा
बरेली
Updated Tue, 16 Feb 2016 01:59 AM IST
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बरेली। एमएलसी स्थानीय निकाय चुनाव में सपा और भाजपा जहां एक दूसरे को आमने-सामने की चुनौती दे रहे हैं वहीं बसपा मैदान से बाहर तमाश देख रही है। पिछली बार एमएलसी की जीती हुई एमएलसी की सीट से इस बार प्रत्याशी न खड़ा करने का निर्णय राजनीतिक पंडितों के लिए आश्चर्यजनक है। बसपा के नेता अभी से ये मानने लगे हैं कि एमएलसी का चुनाव सत्ता के बल पर जीता जाता है। जब राज्य में बसपा की सत्ता थी तो उसने एमएलसी प्रत्याशी खड़ाकर जिताया भी लेकिन जब पार्टी विपक्ष में है तो प्रत्याशी खड़ा करने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
वर्ष 2010 में बसपा प्रत्याशी के रूप में केसर सिंह गंगवार बरेली-रामपुर एमएलसी का चुनाव एकतरफा मुकाबले में भारी अंतर से जीते थे। वर्तमान में वह एमएलसी हैं। इस बार के एमएलसी चुनाव में बसपा ने किसी भी सीट से एमएलसी प्रत्याशी घोषित नहीं किए। बरेली-रामपुर सीट पर कुर्मी मतदाताओं की संख्या भी सर्वाधिक है। इसके बावजूद भी बसपा ने चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई। अपनी जीती हुई सीट पर सपा, भाजपा समेत बाकी प्रत्याशियों को वाकओवर दे दिया। इसके पीछे बसपा के नेता तर्क दे रहे हैं कि एमएलसी का चुनाव सत्ता पक्ष का होता है। इसमें सपा गुंडई और धनबल का इस्तेमाल करेगी। इसलिए पार्टी अपनी एनर्जी विधानसभा चुनाव में ही लगाएगी। हालांकि राजनीतिक क्षेत्रों में बसपा नेताओं का तर्क आम जनता के गले नहीं उतर रहा। कुल मिलाकर बसपा अपनी जीती हुई सीट पर चुनाव मैदान से दूर रहकर सिर्फ तमाशा देखेगी।
‘बसपा का पूरा ध्यान विधानसभा चुनावों की ओर हैं। एमएलसी चुनाव में सपा सरकार गुंडई और धनबल का इस्तेमाल करेगी। इसलिए पार्टी हाईकमान ने कार्यकर्ताओं से अपनी एनर्जी केवल विधानसभा चुनावों में लगाने का आदेश दिया है।’ ब्रह्मस्वरूप सागर, जोन काआर्डिनेटर बसपा
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वर्ष 2010 में बसपा प्रत्याशी के रूप में केसर सिंह गंगवार बरेली-रामपुर एमएलसी का चुनाव एकतरफा मुकाबले में भारी अंतर से जीते थे। वर्तमान में वह एमएलसी हैं। इस बार के एमएलसी चुनाव में बसपा ने किसी भी सीट से एमएलसी प्रत्याशी घोषित नहीं किए। बरेली-रामपुर सीट पर कुर्मी मतदाताओं की संख्या भी सर्वाधिक है। इसके बावजूद भी बसपा ने चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई। अपनी जीती हुई सीट पर सपा, भाजपा समेत बाकी प्रत्याशियों को वाकओवर दे दिया। इसके पीछे बसपा के नेता तर्क दे रहे हैं कि एमएलसी का चुनाव सत्ता पक्ष का होता है। इसमें सपा गुंडई और धनबल का इस्तेमाल करेगी। इसलिए पार्टी अपनी एनर्जी विधानसभा चुनाव में ही लगाएगी। हालांकि राजनीतिक क्षेत्रों में बसपा नेताओं का तर्क आम जनता के गले नहीं उतर रहा। कुल मिलाकर बसपा अपनी जीती हुई सीट पर चुनाव मैदान से दूर रहकर सिर्फ तमाशा देखेगी।
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‘बसपा का पूरा ध्यान विधानसभा चुनावों की ओर हैं। एमएलसी चुनाव में सपा सरकार गुंडई और धनबल का इस्तेमाल करेगी। इसलिए पार्टी हाईकमान ने कार्यकर्ताओं से अपनी एनर्जी केवल विधानसभा चुनावों में लगाने का आदेश दिया है।’ ब्रह्मस्वरूप सागर, जोन काआर्डिनेटर बसपा
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