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शहर में 32 वर्ष की भाजपा की बादशाहत बरकरार
बरेली।
Updated Sun, 12 Mar 2017 12:59 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू और डॉ. अरुण कुमार की सादगी पर बरेली शहर एक बार फिर फिदा हो गया है। प्रेमप्रकाश के चेहरे के सहारे सपा कांग्रेस गठबंधन की भाजपा के गढ़ भेदने की रणनीति कारगर नहीं हो पायी। बसपा के प्रत्याशी अनीस न मुस्लिम वोटरों को रिझा पाए न बसपा का कैडर वोट ही उनके पीछे ठीक से खड़ा हो पाया। उनके वोट पांच अंकों में नहीं पहुंच पाए। सपा कांग्रेस के प्रत्याशी प्रेम प्रकाश अग्रवाल करीब साढ़े बारह हजार वोटों से हार गए।
हकीकत में न तो किसी मुद्दे पर शहर के लोगों ने वोट दिया और न हीं उन्हें कोई दावा और वादा याद रहा। भाजपा लहर पर सवार थी और डा. अरुण कुमार के विधायक रहते जनता को उनसे कोई खास शिकायत नहीं रही। अरुण कुमार के जीत में एक प्वाइंट यह भी है कि उन्हें इस बार बसपा का कैडर वोट भी हासिल हुआ। बसपा प्रत्याशी को इस बार दस हजार वोट भी नहीं मिले जबकि पिछले चुनावों में बसपा के अनीस बेग को 21 हजार के करीब वोट हासिल हुए थे। मुस्लिम वोट पिछली बार आईएमसी के शेर अली जाफरी ने बांटे थे उन्हें 31 हजार वोट मिले थे। कांग्रेस ने बिल्कुल नये चेहरे प्रेम प्रकाश अग्रवाल पर भरोसा जताया था। सपा के वोटों के सहारे उन्होंने दम तो भरा लेकिन उतना नहीं भर सके जितनी जीत के लिए जरूरी था। पिछले चुनावों में जहां सपा को 41 हजार वोट मिले थे वहीं इस बार प्रेम प्रकाश ने 86 हजार 343 वोट हासिल कर लिए। जाहिर है वह अपने सजातीय वोट भी डॉ. अरुण के पाले में जाने से नहीं रोक पाए। डॉ अरुण को पिछले चुनावों में करीब 68 हजार वोट मिले थे और इस बार वह रिकार्ड तोड़ते हुए एक लाख के जादुई आंकड़े के पार पहुंच गए और 1 लाख 15 हजार दस वोट पाने में सफल रहे। इसके पीछे माना जा रहा है कि पिछले बार के वोट जो बंट गए थे वह उनके खाते में चले गए। कुल मिलाकर एक बार फिर भाजपा ने अपनी 32 सालों की बादशाहत बरकरार रखी।
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हकीकत में न तो किसी मुद्दे पर शहर के लोगों ने वोट दिया और न हीं उन्हें कोई दावा और वादा याद रहा। भाजपा लहर पर सवार थी और डा. अरुण कुमार के विधायक रहते जनता को उनसे कोई खास शिकायत नहीं रही। अरुण कुमार के जीत में एक प्वाइंट यह भी है कि उन्हें इस बार बसपा का कैडर वोट भी हासिल हुआ। बसपा प्रत्याशी को इस बार दस हजार वोट भी नहीं मिले जबकि पिछले चुनावों में बसपा के अनीस बेग को 21 हजार के करीब वोट हासिल हुए थे। मुस्लिम वोट पिछली बार आईएमसी के शेर अली जाफरी ने बांटे थे उन्हें 31 हजार वोट मिले थे। कांग्रेस ने बिल्कुल नये चेहरे प्रेम प्रकाश अग्रवाल पर भरोसा जताया था। सपा के वोटों के सहारे उन्होंने दम तो भरा लेकिन उतना नहीं भर सके जितनी जीत के लिए जरूरी था। पिछले चुनावों में जहां सपा को 41 हजार वोट मिले थे वहीं इस बार प्रेम प्रकाश ने 86 हजार 343 वोट हासिल कर लिए। जाहिर है वह अपने सजातीय वोट भी डॉ. अरुण के पाले में जाने से नहीं रोक पाए। डॉ अरुण को पिछले चुनावों में करीब 68 हजार वोट मिले थे और इस बार वह रिकार्ड तोड़ते हुए एक लाख के जादुई आंकड़े के पार पहुंच गए और 1 लाख 15 हजार दस वोट पाने में सफल रहे। इसके पीछे माना जा रहा है कि पिछले बार के वोट जो बंट गए थे वह उनके खाते में चले गए। कुल मिलाकर एक बार फिर भाजपा ने अपनी 32 सालों की बादशाहत बरकरार रखी।
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